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शराब की कमी से 'सूख' रही दिल्ली इन महंगे ब्रांड्स की किल्लत, पब-बार में भी नहीं छलक रहे जाम

Delhi Liquor Shortage: दिल्ली में पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू होने के बाद भी शराब का संकट बना हुआ है. महंगे ब्रांड्स की शराब मिल नहीं रही है. रेस्टोरेंट-पब के मेन्यू कार्ड में 50 फीसदी आइटम हैं ही नहीं. बार मालिकों का कहना है कि शराब की किल्लत की वजह से हर महीने 4-5 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है.

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दिल्ली में महंगे ब्रांड्स की शराब की कमी हो रही है.
दिल्ली में महंगे ब्रांड्स की शराब की कमी हो रही है.

Delhi Liquor Shortage: दिल्ली सूख रही है. पानी की कमी से नहीं, बल्कि शराब की किल्लत से. राजधानी में शराब के बड़े ब्रांड्स की भारी किल्लत हो गई है. पब और बार में तो मैन्यू से 50 फीसदी आइटम गायब हो गए हैं. सिर्फ शराब पीने के शौकीन ही परेशान नहीं है, बल्कि शराब बेचने वाले भी इस संकट से परेशानी का सामना कर रहे हैं और वो इसलिए क्योंकि इन्हें लाखों रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है. 

दिल्ली में शराब का संकट न हो, इसके लिए मेट्रो स्टेशनों पर दुकानें खोली गईं हैं, लेकिन पसंद की शराब लेने के लिए लोगों को अब भी काफी जतन करने पड़ रहे हैं. रेस्टोरेंट और बार बिजनेस से जुड़े लोगों का कहना है कि 5 हजार रुपये से ऊपर की कीमत की शराब मिल ही नहीं रही है. 

दुकानदारों का कहना है कि पूरी एक्साइज पेमेंट दे रहे हैं, फिर भी इसका फायदा नहीं मिल रहा है. उन्होंने एक्साइज फीस में कटौती करने की मांग की है. दुकानदारों का दावा है कि मौजूदा ब्रांड सस्ते हैं, जिससे मार्जिन नहीं निकल रहा है. महंगी और ब्रांडेड शराब एनुअल एक्साइज फीस को कवर कर देती है. 

दिल्ली में 1 सितंबर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू कर दी गई है. इसके बाद अब दिल्ली में सारी शराब की दुकानें सरकारी एजेंसियां ही चला रहीं हैं. कोई प्राइवेट प्लेयर नहीं है. जबकि, पहले जो पॉलिसी लागू थी, उसके तहत सरकार शराब के कारोबार से हट गई थी और पूरी जिम्मेदारी प्राइवेट वेंडर्स को सौंप दी गई थी. सरकार ने स्टॉक भी होने का दावा किया था, लेकिन अब राजधानी में शराब की किल्लत होने लगी है.

दुकानदारों को हर महीने लाखों का नुकसान

खान मार्केट में स्थित स्लाय ग्रेनी रेस्टोरेंट के मैनेजर गोपाल ने आजतक को बताया कि शराब की कमी की वजह से हर महीने 4 से 5 लाख रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है.

उन्होंने बताया कि बहुत सारे कस्टमर खास ब्रांड मांगते हैं, लेकिन हमारे मेन्यू कार्ड में लिखे 50 फीसदी आइटम है ही नहीं. टकीला और उसके जैसे खास कॉकटेल भी हम सर्व नहीं कर पा रहे हैं. 

इतना ही नहीं, बार और रेस्टोरेंट में आने वाले ग्राहकों की संख्या भी 40 फीसदी कम हो गई है.

कनॉट प्लेस स्थित एक बार के मालिक ने बताया कि कुछ लोग होते हैं जो पसंदीदा ब्रांड नहीं मिलने पर दूसरे ब्रांड की शराब पी लेते हैं. लेकिन कुछ लोग उठकर चले जाते हैं. 

नेशनल रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के ट्रेजरार मनप्रीत ने बताया कि प्रीमियम इंपोर्टेड ब्रांड अब तक उपलब्ध नहीं हैं. वाइन के भी अच्छे ब्रांड मौजूद नहीं हैं. इंडियन बीयर भी लिमिटेड ही है. उन्होंने बताया कि या तो ब्रांड्स ने एक्साइज से अप्रूवल नहीं लिया है या फिर डिपार्टमेंट ने उन्हें अप्रूवल नहीं दिया है.

खान मार्केट स्थित आउट ऑफ द बॉक्स में बार टेंडर देवांश ओबेरॉय ने कहा कि सरकार को इस बारे में कुछ देखना होगा. अगर ये किल्लत जारी रही, तो इससे हमारे जीवन पर असर पड़ेगा क्योंकि लोग आएंगे ही नहीं.

किन ब्रांड्स की हो रही है किल्लत?

- शिवास 12, 21
- लेगर बोलेन
- ब्लैक लेबल
- मंकी शोल्डर
- ग्लेनमोरंगी
- लैफोरी
- बेल्वेडेरे
- स्मिरनॉफ
- वेलेवाइन
- वीना टेम्पोराना
- जस्ट रोबर्टो
- कैस्टेलो बेनफिटल राइम आईजीटी

शराब पीने के शौकीन भी हो रहे परेशान

शराब की किल्लत से जहां एक ओर रेस्टोरेंट, बार और पब मालिकों को नुकसान हो रहा है तो दूसरी ओर शराब पीने के शौकीन भी खासे परेशान हो रहे हैं. 

25 साल के आदित्य ने बताया, '15 दिन पहले मेरे बर्थडे था. बीयर ढूंढना एक मुश्किल टास्क था. रेस्टोरेंट ही नहीं, बल्कि वाइन शॉप में भी बीयर के ज्यादा ब्रांड्स अवेलेबल नहीं थे.'

आदित्य ने बताया कि उन्होंने अपना बर्थडे दिल्ली की बजाय गुरुग्राम में मनाया था. उन्होंने कहा, 'मुझे पता था कि दिल्ली में बहुत सारे ब्रांड अवेलेबल नहीं होंगे. गुरुग्राम जाने से पहले मैंने दिल्ली के 15 रेस्टोरेंट में पता भी किया था.'

अधिकारियों का क्या है कहना?

एक्साइज विभाग के मुताबिक, देसी-विदेशी शराब के करीब 500 ब्रांड रजिस्टर्ड हैं. सरकारी पोर्टल पर लॉग-इन करने पर सभी ब्रांड्स दिखते हैं और सीधे होलसेलर (L-1) से ऑर्डर किए जा सकते हैं. खास ब्रांड के ना मिलने की शिकायत पर कारवाई होगी.

 

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