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दिल्ली: सुलझाने की कोशिश में और गहराया एलजी बनाम सीएम विवाद, जानें पूरा मामला

दिल्ली के सीएम केजरीवाल और एलजी वीके सक्सेना का विवाद अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया कि दोनों की तस्वीरें वन महोत्सव में एक साथ मौजूद रही लेकिन केजरीवाल की कुर्सी खाली पड़ी रही. 2015 में जब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली का चुनाव जीता, लेकिन उस वक्त चूंकि दिल्ली में अलग पार्टी की सरकार थी. तभी से ये विवाद तूल पकड़ता रहा है.

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जैसे-जैसे दिल्ली बदली वैसे ही एलजी बनाम सीएम विवाद भी गहराता गया. -सांकेतिक तस्वीर जैसे-जैसे दिल्ली बदली वैसे ही एलजी बनाम सीएम विवाद भी गहराता गया. -सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • समय के साथ गहराता गया एलजी बनाम सीएम विवाद
  • जब-जब केंद्र और राज्य में अलग सरकार रही, तब विवाद हुआ

2014 के कई साल पहले अटल बिहारी वाजपेई और मदन लाल खुराना ने दिल्ली के लिए फुल स्टेटहुड की मांग की थी. 2014 के लोकसभा चुनाव के मेनिफेस्टो में बीजेपी की तरफ से दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की घोषणा हुई. शीला दीक्षित की कांग्रेस और आप ने भी दिल्ली को पूर्ण राज्य बनाने की बात कही लेकिन दिल्ली विशेष राज्य से केंद्र शासित हुई और अब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र. जैसे-जैसे दिल्ली बदली वैसे ही एलजी बनाम सीएम विवाद भी गहराता गया.

संविधान में पहले दिल्ली को यूनियन टेरिटरी के रूप में शामिल किया गया. बाद में संवैधानिक प्रावधानों में बदलाव कर 69वें संविधान संशोधन के तहत नया अनुच्छेद 239 AA जोड़ा गया जिसके तहत दिल्ली को विशेष दर्जा दिया गया और दिल्ली के केंद्र शासित क्षेत्र को दिल्ली का राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र कहा जाने लगा. विधानसभा भी स्थापित हुई, तभी से उप राज्यपाल के साथ ही चुनी हुई सरकार भी शामिल हुई.

क्लॉज 239 AA (4) क्या कहता है?

दिल्ली के मुख्यमंत्री और एलजी के बीच मतभेद की स्थिति को एलजी राष्ट्रपति को भेजेंगे. संवैधानिक रूप से प्रमुख एलजी और जनता के जरिए चुनी गई दिल्ली सरकार के अधिकार क्या होनी चाहिए यह बड़ा सवाल है? अक्सर ये रार तब हुई जब केंद्र और राज्य में अलग-अलग सरकार रही.

एलजी को मिली पावर 

दिल्ली हाईकोर्ट के अगस्त 2016 के निर्णय में कहा गया- “वैसे तो 1991 के बाद से ही दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र घोषित किया गया है, लेकिन उपराज्यपाल की उपस्थिति भी महत्वपूर्ण है. ऐसे में किसी भी प्रस्ताव की मंजूरी से पहले उपराज्यपाल का निर्णय जरूरी है. जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया तो जुलाई 2018 का जजमेंट बहुत मायने रखता और हाई कोर्ट के जजमेंट के उलट सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया उसमें दिल्ली सरकार को विधान बनाने में स्वतंत्रता की छूट दी और साथ में यह भी कहा कि हर मामले में रोक-टोक जरूरी नहीं है. उसके बाद से ही दिल्ली सरकार ने दिल्ली के लिए बस में फ्री यात्रा, 200 यूनिट बिजली फ्री जैसे निर्णय लिए. The government of National capital territory of Delhi (Amendment) bill, 2021 जिसे GNCT bill 2021 कहते हैं, 15 मार्च 2021 को लोकसभा और 24 मार्च 2021 को राज्य सभा में पास हो गया.

1952 में पहली बार दिल्ली में हुआ था चुनाव

- 1952 में पहली बार दिल्ली में चुनाव हुआ और कांग्रेस के चौधरी ब्रहम प्रकाश दिल्ली के पहले चीफ मिनिस्टर बने.
- 1956 में स्टेट रिऑर्गनाइजेशन एक्ट पास हुआ और दिल्ली राज्य खत्म होकर Union terrority बन गया.
- 1991 में कांग्रेस सरकार ने 69वां कांस्टीट्यूशनल अमेंडमेंट एक्ट पास किया और दिल्ली को स्पेशल स्टेटस मिला जिसके बाद यूनियन टेरिटरी ऑफ दिल्ली बन गया. फिर तय हुआ कि एलजी और विधानसभा साथ-साथ होगी. 1993 में हुए चुनाव में मदन लाल खुराना दिल्ली के चीफ मिनिस्टर बने.

 

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