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Delhi Fire: तीसरी मंजिल, नींद में थे लोग, ऐसे डेथ चैंबर में तब्दील हो गई फैक्ट्री

चश्मदीदों के मुताबिक मृतकों में ज्यादातर लोग बाहर के हैं. जिनमें बिहार और यूपी के लोग शामिल हैं. 100-150 लोग हादसे की शिकार हुई इस बिल्डिंग में काम करते थे. यहां बैग बनाने का काम होता था जहां मजदूर दिन रात काम करते थे.

घटनास्थल की तस्वीर (फोटो- PTI) घटनास्थल की तस्वीर (फोटो- PTI)

  • धुएं के कारण दम घुटने से हुई कई लोगों की मौत
  • कई अस्पतालों में जख्मी लोगों का इलाज जारी
  • दिल्ली का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया

दिल्ली के रानी झांसी रोड में रविवार सुबह भीषण आग लग गई जिसमें अब तक 43 लोगों की मौत हुई है. पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग का रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है जिसमें 50 से ज्यादा लोगों को बाहर निकाला गया है. आग पहले अनाज मंडी में लगी, उसके बाद तीसरी मंजिल पर चल रही पैकेजिंग फैक्ट्री में लग गई. जख्मी लोगों को लोक नायक जयप्रकाश नारायण (एलएनजेपी) और लेडी हार्डिंग्स जैसे अस्पतालों में पहुंचाया गया है.

आग की इस भीषण घटना में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें कुछ दम घुटने से भी मारे गए हैं. डॉक्टरों का कहना है कि कुछ लोगों को बेहोशी की हालत में इलाज के लिए लाया गया था. बाद में वे मृत पाए गए. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी हालत गंभीर है. डॉक्टरों का कहना है कि उन्हें बचाने की कोशिश जारी है. घायलों में कई 50 फीसदी से ज्यादा जल गए हैं. लेडी हार्डिंग्स अस्पताल में भी कुछ लोगों को दाखिल कराया गया है जहां उनका इलाज चल रहा है.

पुलिस का कहना है कि मौत का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है. घटनास्थल पर चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन दिल्ली का सबसे बड़ा ऑपरेशन है क्योंकि पुलिस काफी मशक्कत के बाद मौके पर पहुंच पाई है. अभी तक 56 लोगों को निकाला जा चुका है. आग का कारण शॉर्ट शर्किट बताया जा रहा है. दो घरों की सीढ़ी एक थी इसलिए अफरा-तफरी में लोग सुरक्षित नहीं निकल पाए और आग में फंस गए. कई अस्पतालों के डॉक्टर एक साथ काम कर रहे हैं और इलाज कर रहे हैं.

100-150 लोग इमारत में करते थे काम

रानी झांसी रोड में गलियां काफी संकरी हैं, इसलिए दमकल कर्मियों को घटनास्थल पर पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा. हालांकि तमाम मुश्किलों के बावजूद कई लोगों को बचाया गया है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया है. चश्मदीदों के मुताबिक मृतकों में ज्यादातर बाहर के हैं. जिनमें बिहार और यूपी के लोग शामिल हैं. 100-150 लोग हादसे का शिकार हुई बिल्डिंग में काम करते थे. यहां बैग बनाने का भी काम होता था जहां मजदूर दिन रात काम करते थे. आम लोगों ने भी कई घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया.

जिस इलाके में आग लगी है वहां हथरघा के काम ज्यादा होते थे. सिलाई-कढ़ाई और उससे जुड़े पैकिंग के काम होते थे. इस इलाके में घर एक दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए मौतों का आंकड़ा और भी बढ़ सकता है. यहां दमकल विभाग का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया है. इससे पहले दिल्ली में उपहार अग्निकांड हुआ था जिसमें 50 से ज्यादा मौतें हुई थीं. रानी झांडी रोड के इस अग्निकांड में जिस प्रकार से शव निकाले जा रहे हैं, उससे साफ है कि यह भी काफी भयानक घटना है.

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