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अगले तीन दिन घुटेगा दिल्ली का दम, पराली जलने से बन सकते हैं हॉट-स्पॉट!

दिल्ली की एयर क्वालिटी तेजी से खराब हो सकती है. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के मुताबिक जल्द ही यूपी, पंजाब और हरियाणा की तरफ से हवा चलना शुरू हो जाएगी. इससे पराली जलने पर उसका धुआं दिल्ली की ओर आएगा. ऐसा होने पर दिल्ली की हवा तेजी से बिगड़ जाएगी.

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26 अक्टूबर की शाम से हवा की गुणवत्ता में होने लगेगा सुधार (फाइल फोटो)
26 अक्टूबर की शाम से हवा की गुणवत्ता में होने लगेगा सुधार (फाइल फोटो)

दिल्ली की एयर क्वालिटी दो दिन बाद यानी 24 अक्टूबर तक बहुत खराब स्तर पर पहुंच सकती है. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फॉरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार दिल्ली के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में अभी तक पराली जलाने के कम मामले सामने आए हैं, हवा का बहाव भी कम है, इसलिए दिल्ली में प्रदूषण का स्तर चिंताजनक स्तर पर नहीं आया है.

SAFAR ने बताया कि पंजाब-हरियाणा-पश्चिमी यूपी से दिल्ली की ओर हवाएं 24 अक्टूबर से बहना शुरू होंगी इसलिए इसकी पूरी आशंका है कि दिल्ली में पराली के धुएं से प्रदूषण बढ़ेगा. दिल्ली का PM2.5 23 अक्टूबर को 5%, 24 अक्टूबर को 8% और 25 अक्टूबर को 16-18% तक बढ़ सकता है. रिसर्च इंस्टिट्यूट के मुताबिक पराली जलने के कारण दिल्ली में हॉट स्पॉट भी बन सकते हैं.

अनुमान जताया गया है कि 26 अक्टूबर की शाम से हवा की गुणवत्ता में सुधार होने शुरू हो सकता है. दरअसल उस दिन से सतही हवाएं ऊपर उठने लगेंगी और पंजाब-हरियाणा-पश्चिमी यूपी से दिल्ली की ओर से चलने वाली हवाएं धीमी हो जाएंगी, जिससे पराली से होने वाला प्रदूषण कम हो जाएगा.

16 अक्टूबर को पराली से निकली थी 2000 वाट ऊर्जा

सीएसई के सीनियर प्रोग्राम मैनेजर ने बताया कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि पंजाब-हरियाणा-दिल्ली में पराली जलने के मामले तेजी से बढ़ गए हैं. इन राज्यों में पराली जलाने से 16 अक्टूबर को 2,000 वाट तक का ऊर्जा का उत्सर्जन हुआ था. सीएसई ने बताया कि सर्दियों में प्रदूषण होने और इसके परिणामों को लेकर अलर्ट जारी कर दिया गया है.

उन्होंने बताया कि 2021 में पिछले सात साल में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज किए गए. पिछले साल 10 फीसदी की वृद्धि देखी गई जबकि 2020 में केवल 5 फीसदी की बढ़ोत्तरी देखी गई थी.

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए उठाए कदम

दिल्ली में हवा के स्तर को चिंताजनक हालात तक पहुंचने से रोकने के लिए कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट की आपात बैठक में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान यानी ग्रैप के दूसरे चरण को लागू करने का फैसला किया गया है. इसके तहत प्रदूषण कम करने के लिए हर दिन सड़कों की सफाई होगी. जबकि हर दूसरे दिन पानी का छिड़काव किया जाएगा. 

इसके अलावा होटल या रेस्टोरेंट में कोयले या तंदूर का इस्तेमाल नहीं होगा. अस्पताल, रेल सर्विस, मेट्रो सर्विस जैसी जगहों को छोड़कर कहीं और डीजल जनरेटर का इस्तेमाल नहीं होगा. वहीं भीड़-भाड़ वाले इलाकों में स्मॉग टावर लगाए हैं.

दिल्ली सरकार द्वारा 28 नवंबर से "रेड लाइट, ऑन गाड़ी ऑफ" का अभियान शुरू होगा, जो 1 महीने तक चलेगा. इसके लिए 2500 सिविल डिफ़ेंस वॉलंटियर्स को लगाया जाएगा. इसके लिए 100 बड़े चौराहों को चुना जाएगा.

क्या होता है पीएम 2.5 और पीएम 10

जानकारी के मुताबिक पीएम 2.5 और पीएम 10 एयर क्वालिटी को मापने का पैमाना है. पीएम का मतलब पार्टिकुलेट मैटर  होता है. ये हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों को मापते हैं. पीएम का आंकड़ा जितना कम होगा हवा में मौजूद कण उतने ही छोटे होंगे. अगर हवा में पीएम 2.5 की मात्रा 60 और पीएम 10 की मात्रा 100 आती है तो माना जाता है कि हवा सांस लेने के लिए सुरक्षित है.


 

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