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भारत में कोरोना से मृत्यु दर 1.1%, 12 राज्यों में एक लाख से ज्यादा एक्टिव मामले: हेल्थ मिनिस्ट्री

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव IAS अधिकारी लव अग्रवाल ने कहा कि ऑक्सीजन उत्पादन से लेकर वितरण तक के प्रबंधन के लिए सरकार रोज समीक्षा कर समुचित कदम उठा रही है. पूर्वी और दक्षिणी भारत में उत्पादन ज्यादा है, वहीं उत्तरी और पश्चिमी भारत में मांग ज्यादा. ट्रांसपोर्ट ज्यादा बड़ी चुनौती है.

सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भारत में मृत्यु दर 1.1 फीसदी है
  • 12 ऐसे भी राज्य हैं जहां कोरोना के एक लाख से ज्यादा एक्टिव मामले

देशभर में कोरोना के हालात को लेकर आज (सोमवार) को स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रेस वार्ता की. केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव IAS अधिकारी लव अग्रवाल ने कहा- 15 दिनों में कोरोना संक्रमण में कमी आई है. छत्तीसगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, मुंबई, औरंगाबाद, महाराष्ट्र और झारखंड में कमी आई है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोरोना संक्रमितों के ठीक होने की दर भी पहले से बढ़ी है. उन्होंने कहा कि भारत में मृत्यु दर 1.1 फीसदी है. वहीं 12 ऐसे भी राज्य हैं जहां कोरोना के एक लाख से ज्यादा एक्टिव मामले हैं. लव अग्रवाल ने कहा कि सरकार, डिमांड सप्लाई की आपूर्ति करते हुए संक्रमण की चेन तोड़ने के प्रयास में जुटी हुई है. 

उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन उत्पादन से लेकर वितरण तक के प्रबंधन के लिए सरकार रोज समीक्षा कर समुचित कदम उठा रही है. पूर्वी और दक्षिणी भारत में उत्पादन ज्यादा है, वहीं उत्तरी और पश्चिमी भारत में मांग ज्यादा. ट्रांसपोर्ट ज्यादा बड़ी चुनौती है. तभी खाली टैंकर्स विमान से उत्पादन स्थल पर ले जाया जा रहा है और भरे टैंकर्स रेल से भेजे जा रहे हैं. वहीं ऑक्सीजन प्लांट में टैकरों को भरे जाने पर लग रहे समय को लेकर कोर्ट ने पूछा कि और अधिक रिफिलिंग पॉइंट्स के लिए क्या किया जा सकता है. जिससे टैकरों को जल्द भरा जा सके. कंपनियों का कहना था कि एक टैंकर को भरने में ढाई से तीन घंटे लगते हैं.

इसके अलावा प्रेस वार्ता में एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोविड की शुरुआत में सीटी स्कैन कराने का कोई फायदा नहीं. कई बार पैचेज आते हैं, लेकिन इलाज के साथ वो खत्म हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि एक सीटी से 300 एक्सरे के बराबर रेडिएशन होता है. इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. चेस्ट एक्स रे के बाद ही जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उचित परामर्श दे सकते हैं कि सीटी करने की जरूरत है या नहीं. उन्होंने कहा कि खून की जांच भी अपने मन से ना कराएं, खुद से खुद के डॉक्टर ना बनें. 

 

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