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बेनामी संपत्ति से राडार में आए 500 लोगों पर कार्रवाई करेगा आयकर विभाग

आयकर विभाग अब ब्लैकमनी के सभी सबूत जुटाने के बाद सर्वे की कार्रवाई शुरू करेगा. बताया जा रहा है कि टीम का गठन होते ही कई आयकर दाताओं के यहां सर्वे और छापामारी का काम शुरू किया जायेगा. लोगों के खाते और इनकम टैक्स फाइल खंगालने के बाद आयकर विभाग ने पाया कि नोटबंदी के दौरान ब्लैकमनी खपाने के लिए करोड़ो रुपए जमीन में निवेश किए गए

रायपुर में जमा हुआ भ्रष्ट लोगों का डाटा रायपुर में जमा हुआ भ्रष्ट लोगों का डाटा

छत्तीसगढ़ में आयकर विभाग ने बेनामी तरीके से संपत्ति की ख़रीद-फरोख्त और रियल स्टेट में निवेश करने वाले पांच सौ लोगों के दस्तावेज तैयार किए हैं. इसमें नौकरशाह से लेकर राजनेता, उद्योगपति और कारोबारियों के नाम शामिल हैं. ज्यादातर लोग उस समय आयकर विभाग के राडार में आ गए जब उन्होंने नोटबंदी के दौरान आनन-फानन में अपनी ब्लैकमनी खपा दी. बाद में इन लोगों ने आयकर रिटर्न भरते वक्त उस निवेश का हवाला भी दिया. आयकर विभाग के मुताबिक राजधानी रायपुर से लेकर राज्य के विभिन्न ग्रामीण इलाकों की थोक के भाव जमीन की खरीद हुई. कई आयकर दाताओं ने पहले कभी भी अपनी जमीनों के निवेश की जानकारी आयकर रिटर्न में नहीं दर्ज कराई थी. नोटबंदी के बाद उनके आयकर रिटर्न में जबरदस्त निवेश दर्ज कराया गया. इन सभी को चिन्हित करने के बाद उनके दस्तावेजों की जांच की गई है. जिसमे पता चला है कि यह निवेश ब्लैकमनी को खपाने का तरीका था.

आयकर विभाग अब ब्लैकमनी के सभी सबूत जुटाने के बाद सर्वे की कार्रवाई शुरू करेगा. बताया जा रहा है कि टीम का गठन होते ही कई आयकर दाताओं के यहां सर्वे और छापामारी का काम शुरू किया जायेगा. लोगों के खाते और इनकम टैक्स फाइल खंगालने के बाद आयकर विभाग ने पाया कि नोटबंदी के दौरान ब्लैकमनी खपाने के लिए करोड़ो रुपए जमीन में निवेश किए गए.

निवेशकों ने पकड़े जाने के डर से किसी दूसरे के नाम से ट्रांजेक्शन कर उन्हें दस्तावेजों में जमीन का मालिक बनाया है. लेकिन जमीनों की खरीद-फरोख्त में परदे के पीछे किसी अन्य ने भूमिका निभाई थी. इस वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद छापेमारी और सर्वे करने की योजना बनाई गई थी. लेकिन केंद्र सरकार की ओर से बेनामी संपति एक्ट में संशोधन करने के बाद यह कार्रवाई कुछ दिनों के लिए टाल दी गई थी.

बेनामी संपति की जांच करने के लिए तीन सदस्यीय विशेष टीम का गठन किया गया है. इस टीम में एक सयुंक्त आयकर अधिकारी और एक आयकर अधिकारी समेत दो सहायक होंगे. यह टीम आयकर महानिदेशक के निर्देशन में सीधे कार्रवाई करेगी. आयकर विभाग के मुताबिक किसी भी अचल संपत्ति की खरीद करने के बाद उसे आयकर रिटर्न में नहीं दर्शाने पर भी उसे बेनामी संपत्ति माना जायेगा . किसी भी तरह का शक होने पर आरोपी को तलब कर पूछताछ की जा सकती है. 90 दिन के भीतर अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो गड़बड़ी मिलने पर नए कानून के तहत बेनामी संपति का लेनदेन करने पर 3 से 7 साल तक के सजा का प्रावधान है.

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