scorecardresearch
 

मिशन 2018 के लिए छत्तीसगढ़ में मचा राजनीतिक घमासान

एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जागी की पत्नी रेणु जोगी को पार्टी के सभी पदों से हटा दिए जाने के बाद पार्टी में उठापटक की स्थिति बन गई है. तो वहीं मिशन 2018 के तहत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल. पुनिया ने प्रदेश में नई कार्यकारणी का गठन कर पार्टी में वापस जान डालने की कोशिश की है.

फाइल फोटो फाइल फोटो

2018 आते ही छत्तीसगढ़ में राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है. भारतीय जनता पर्टी को चौथी बार सत्ता में आने से राकने के लिए कांग्रेस पार्टी ने अपनी राजनैतिक बिसाद बिछाना शुरू कर दी है. वहीं बीजेपी भी अपने प्रत्याशी चयन से लेकर बूथ मैनेजमेंट पर काम शुरू कर दिया है. इसी बीच कांग्रेस में दो बार की विधायक और विधानसभा में पार्टी की उपनेता रहीं रेणु जोगी को पार्टी ने सभी पदों से मुक्त कर दिया है.  जिससे कांग्रेस के भीतर और बहार नए समीकरण बनने शुरू हो गए है. हालांकी पार्टी में हुए फेरबदल से जमीनी कार्यकर्ताओं को अहमियत नहीं मिलने पर कांग्रेस की एकजुटता और मजबूती फिर से खतरे में दिखाई दे रही है. अब इससे कांग्रेस पार्टी की नई कार्यकारणी की साख भी दांव पर लग गई है.

एक तरफ जहां छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जागी की पत्नी रेणु जोगी को पार्टी के सभी पदों से हटा दिए जाने के बाद पार्टी में उठापटक की स्थिति बन गई है. तो वहीं मिशन 2018 के तहत छत्तीसगढ़ कांग्रेस के प्रभारी पीएल. पुनिया ने प्रदेश में नई कार्यकारणी का गठन कर पार्टी में वापस जान डालने की कोशिश की है.

बता दें कि पुनिया ने राज्य के सभी चर्चित कांग्रेसी नेताओं को कहीं न कहीं एडजस्ट कर दिया है. लेकिन विधान सभा में पार्टी की उपनेता रहीं रेणु जोगी से किनारा कर सभी को हैरत नेम डाल दिया है. रेणु जोगी अब पार्टी में किसी भी पद पर नहीं है. अब वो सिर्फ विधायक बन कर रह गई है. पार्टी में यह भी कहा जा रहा है की चुनाव से पहले पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता भी दिखा सकती है. पार्टी ने रेणु जोगी की परंपरागत कोटा विधानसभा सीट से एक आदिवासी नेता को टिकट देने का भी वादा कर चुकी है.         

वहीं कांग्रेस ने पुर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी को राजनैतिक जवाब देने के लिए उनके दो सबसे करीबी कह जाने वाले साथियों को पार्टी फोरम में महत्वपूर्ण पद दिए जाने के बावजूद पीएल. पुनिया का मकसद साफ नहीं हो पा रहा है. वहीं अजीत जोगी के करीबी और पूर्व विधायक शिव डहरिया को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी की वो रणनीतिक तौर पर अजीत जोगी पर निशाना साधेंगे.

लेकिन वहीं अपने राजनैतिक गुरु कह जाने वाले अजीत जोगी के प्रति चेले ने कठोर रुख अपनाने से साफ इंकार कर दिया है. यही हाल अजीत जोगी के एक और विश्वास पात्र आदिवासी विधायक कवासी लकमा का है. पार्टी ने उन्हें रेणु जोगी की जगह विधानसभा में उपनेता बनाया है. लेकिन इस पद पर आने के बाद वो भी रेणु जोगी के सामने खड़े होने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहें है.

बता दें कि छत्तीसगढ़ में ग्रीष्मकालीन सत्र 4 फरवरी से शुरू हो रहा है. ऐसे में पूर्व उपनेता रेणु जोगी और वर्तमान उपनेता कवासी लकमा के बीच वैचारिक आदान प्रदान और सदन के भीतर रणनीतिक मोर्चे पर चर्चा की अटकले चल रही है. बताया यह भी जा रहा है कि कवासी लकमा  उपनेता  पद की  घोषणा होने के  बाद से ही असमंजस की स्थिति में है.  लम्बे समय से वे जितने करीब 'जोगी कांग्रेस' के साथ है उतने करीब वे कांग्रेस पार्टी के साथ नहीं है. वहीं उनके पुत्र ने तो अपने इलाके में 'जोगी कांग्रेस' का दामन भी थाम लिया है.

राजनीतिक गलियारों से यह भी जानकारी मिल रही है की प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पीएल. पुनिया की यह नई रणनीति भी कारगर साबित नहीं हो रही है. अजीत जोगी को कमजोर करने का उनका यह दाव किसी और नेता पर आजमाया गया होता तो ज्यादा कारगर साबित होता.

छत्तीसगढ़ में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां जोरों है. बीजेपी के राष्ट्रीय  संगठन महामंत्री रामलाल और संगठन मंत्री सौदान सिंह पुरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं. इस दौरे का मकसद उन उम्मीदवारों को मौदान में लाना है जो विधानसभा चुनाव में जीत सकते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं और स्वयं सेवकों को गुरु मंत्र देने के लिए अगले हफ्ते बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत रायपुर का दौरा करेंगे. हालांकि विपक्ष के कई नेता दबी हुई जुबान से यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि बीजेपी द्वारा प्रायोजित हेलीकॉप्टर की यह सवारी अजीत जोगी को बड़ी रास आ रही है.

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें