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Agnipath Scheme: 'क्या 'अग्निपथ' आत्मनिर्भर बनाएगा...' भर्राए गले और टपकते आंसुओं की बीच युवाओं के दिल की बात

Agnipath scheme के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच कुछ युवाओं ने अपना दर्द साझा किया है. उनका कहना है कि इस योजना ने उनकी कड़ी मेहनत पर पानी फेरने का काम किया है.

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रांची में Agnipath योजना के खिलाफ प्रदर्शन करता युवक रांची में Agnipath योजना के खिलाफ प्रदर्शन करता युवक
स्टोरी हाइलाइट्स
  • युवाओं का दर्द कौन सुनेगा
  • 4 साल बाद क्या करेंगे

सेना में भर्ती के लिए 'अग्निपथ योजना' पर देश में बवाल और बहस के बीच कुछ युवाओं ने अपना दर्द साझा किया है. उनका कहना है कि इस स्कीम के चलते सेना में भर्ती होने का सपना टूट गया है. सरकार को समझना चाहिए कि आखिर क्यों युवक सड़कों पर निराश होकर दिख रहे हैं.  इस योजना के खिलाफ प्रदर्शन कर सैकड़ों युवाओं में शामिल विकास रंजन ने गुहार लगाते हुए कहा कि सरकार को बेरोजगारों युवकों का दर्द समझना होगा. 

पटना कॉलेज से ग्रेजुएट और बीते 7 महीनों से सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे विकास रंजन का कहना है कि यह योजना सेना में पक्की नौकरी को खत्म करने का जरिया है. विकास ने प्रधानमंत्री से सीधे सवाल करते हुए कहा कि वो आत्मनिर्भर भारत की बात करते हैं तो क्या ये 'अग्निपथ' युवाओं को आत्मनिर्भर बनाएगा? ये सवाल वहां मौजूद ज्यादातर युवाओं के 'मन की बात' है कि आखिर चार साल बाद वो क्या करेंगे.

विकास रंजन की तरह ही अभिषेक सिंह को भी लगता है कि सेना में शामिल होने के लिए अभी तक जो उन्होंने कड़ी मेहनत की है अग्निपथ योजना उसमें पानी फेर देगी. आरा के वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट अभिषेक सिंह ने कहा, 'एनडीए भले ही चुनाव जीत गया हो लेकिन नौकरी की तलाश कर रहे है युवाओं का विश्वास जीतने में नाकाम साबित हुआ'. निराशा में डूबे अभिषेक का कहना है कि केंद्र उन युवाओं का विश्वास खो चुकी है जो नौकरी तलाश रहे हैं. हमारे सपने टूट गए'. अभिषेक ने जब ये बातें कहीं तो उनकी आंखों में आंसू और गला रूंध गया था.

प्रदर्शनकारियों में शामिल हर्षित भारद्वाज भी सरकार से कम नाराज नही हैं. केंद्र सरकार पर गुस्सा उतारते हुए उन्होंने कहा कि ये योजना दिमाग का बिना इस्तेमाल किए लागू की गई है.  हर्षित ने कहा, कोई भी देश की सरकार ठेके पर सैनिकों की भर्ती कैसे करती है. यह तो पूरी तरह से देश की सुरक्षा से खिलवाड़ है'. इसी तरह प्रदर्शन के दौरान तमाम युवाओं ने जब अपना दर्द साझा किया तो उनका गला भर्रा गया और कइयों के आंखों में आंसू तक आ गए. 

दरअसल बिहार और पूर्वांचल में युवाओं में सेना में भर्ती का सपना वहां के सामाजिक और आर्थिक तानेबाने को भी बुनता है. इस नौकरी में ज्यादातर युवा सामान्य परिवारों से आते हैं जो अपने घरों के बच्चों लाखों की फीस देकर इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट जैसे कोर्सों में दाखिला नहीं दिला पाते हैं या फिर कोचिंग संस्थानों की फीस देकर उनको कंपटीशन की तैयारी करवा सकें. 

पटना के एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर विद्यार्थी विकास ने सरकार के इस फैसले पर हैरानी जताई है. उनका कहना है कि जब देश में बेरोजगारी की दर इतनी ज्यादा है तो ऐसे समय में यह स्कीम लागू करना समझ से परे है. 

विकास विद्यार्थी ने कहा, ' मुझे लगता है कि देश में कुल 21 करोड़ बेरोजगार युवकों में डेढ़ से 2 करोड़ बिहार से हैं. बिहार में प्रति व्यक्ति आय भी राष्ट्रीय औसत आय से आधी है. और जब इन हालात में युवक नौकरी मांग रहे हैं तो आप उन्हें रिटायरमेंट का प्लान बता रहे हैं. इस योजना को तुरंत ही वापस लिया जाना चाहिए'.

गौरतलब है कि बिहार में लगातार चार दिन तक इस योजना के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए हैं. राज्य के 15 जिलों में इसका असर दिखा है. पुलिस ने इस मामले में 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार और 25 एफआईआर दर्ज किए हैं. 

क्या है अग्निपथ योजना
अग्निपथ योजना के तहत अब सेना में 17.5 साल से लेकर 23 साल तक की उम्र के युवाओं को चार साल के लिए भर्ती किया जाएगा. इस दौरान उनको महीने की सैलरी और अन्य सुविधाएं दी जाएंगी. पीएफ के खाते में जमा होने वाला रुपया भी उनको सैलरी से नहीं काटा जाएगा. लेकिन चार साल बाद  इसमें 75 फीसदी को रिटायर कर दिया जाएगा और बाकी 25 फीसदी की सेवाएं उनकी कार्यक्षमता को देखकर जारी रखी जाएंगी. रिटायरमेंट के बाद उनको पेंशन नहीं दी जाएगी. पीएफ के तौर पर 12 लाख रुपये दिए जाएंगे. योजना के खिलाफ विरोध को बढ़ता देख सरकार के कई मंत्रालयों की ओर से अग्निवीरों को नौकरी देने में प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया है. वहीं आज तीनों सेनाओं के प्रमुखों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस करके इस योजना के तहत भर्ती प्रक्रिया की तारीखों का ऐलान भी कर दिया है.

 

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