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पटना में वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर, निपटने की तैयारी- सुशील मोदी

सुशील मोदी ने कहा कि नदी किनारे वाले शहरों वाराणसी, कानपुर आदि में वायु प्रदूषण बढ़ा है, इनमें पटना भी है. पटना के किनारे नया दियारा का इलाका बना है. हवा के साथ वहां के धूलकण शहर के वायु को प्रदूषित कर रहे हैं.

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बिहार सरकार 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने के अधिकार के लिए भारत सरकार को पत्र लिखेगी. बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि पटना में वायु प्रदूषण की स्थिति चुनौतीपूर्ण है, लेकिन डरने की जरूरत नहीं है. पटना में बुधवार को बढ़ते प्रदूषण पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया. मोदी ने इस अवसर पर कहा कि वायु प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार कुछ फैसले ले सकती है.

उन्होंने कहा कि 15 साल पुराने वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने के अधिकार के लिए राज्य सरकार भारत सरकार को पत्र लिखेगी. नई तीन पहिया वाहन को शहरी क्षेत्र में परमिट देने पर रोक, कचरे व बालू की ढंक कर ढुलाई, सड़क, भवन आदि का निर्माण ग्रीन कवर कर करने, ईंट-भट्ठों को नई स्वच्छता तकनीक में परिवर्तित करने, पटना शहर, कॉलोनियों व गंगा किनारे के दियारा क्षेत्र में इस साल 10 हजार पौधा रोपण करने का लक्ष्य है.

मोदी ने कहा कि गर्मी और बरसात की तुलना में जाड़े के मौसम में पटना में सूक्ष्म धूलकण की मात्रा हवा में बढ़ जाती है. मार्च में 110, अप्रैल में 89.1 तो दिसंबर में 191 और जनवरी में 189 माइक्रोग्राम धूलकण की मात्रा पाई गई. संभवतः सर्दी में धूलकण के बढ़ने से ऐसा होता है. डब्ल्यूएचओ व राज्य प्रदूषण नियंत्रण परिषद के आंकड़े में अंतर है. मंत्री का दावा है कि पटना में स्थिति उतनी खराब नहीं है जितनी डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में बताई जा रही है.

सुशील मोदी ने कहा कि नदी किनारे वाले शहरों वाराणसी, कानपुर आदि में वायु प्रदूषण बढ़ा है, इनमें पटना भी है. पटना के किनारे नया दियारा का इलाका बना है. हवा के साथ वहां के धूलकण शहर के वायु को प्रदूषित कर रहे हैं.

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