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मुसलमानों के लिए जातीय जनगणना का विस्तार करें और घुसपैठियों को बाहर करें: गिरिराज सिंह

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार के जाति सर्वेक्षण कराने से इनकार करने के बावजूद उन्होंने राज्य सरकार के जाति सर्वेक्षण के कदम का पूरा समर्थन किया.

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केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (फाइल फोटो)
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • जातिगत जनगणना पर बोले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह
  • मुसलमानों के लिए करें इसका विस्तार

बिहार में प्रस्तावित जातीय जनगणना को लेकर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने बुधवार को कहा कि जनगणना से बांग्लादेशियों और रोहिंग्या जैसे घुसपैठियों को बाहर रखा जाना चाहिए. गिरिराज का कहना है कि 'तुष्टिकरण की राजनीति' की वजह से उन्हें दूसरी पार्टियां बाहरी नहीं मानती हैं. 

बीजेपी की राज्य कार्यकारिणी की बैठक में भाग लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में एक मजबूत धर्मांतरण विरोधी कानून की जरूरत है. साथ ही 'अल्पसंख्यकों' शब्द के इस्तेमाल को खत्म करने और ज्ञानवापी मस्जिद जैसे सभी 'विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा उत्पीड़न के प्रतीकों' को मिटाने की भी जरूरत है.  

बिहार के बेगूसराय सीट से सांसद गिरिराज ने पत्रकारों से कहा कि ये पार्टी के कई सहयोगियों की मौजूदगी में चर्चित मुद्दों पर उनकी निजी राय थी. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के जाति सर्वेक्षण कराने से इनकार करने के बावजूद उन्होंने राज्य सरकार के जाति सर्वेक्षण के कदम का पूरा समर्थन किया. वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में होने वाली सर्वदलीय बैठक से कुछ घंटे पहले बोल रहे थे. 

तुष्टिकरण की राजनीति पर बोले गिरिराज

उन्होंने कहा, "पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने वाले मुसलमानों को भी इसमें शामिल किया जाना चाहिए." उन्होंने 1990 के दशक में दायर एक याचिका का हवाला देते हुए दावा किया कि बिहार के 11 जिलों में अवैध प्रवासियों की आबादी लगभग चार लाख थी और उन्हें इस जनगणना में शामिल नहीं करना चाहिए. उन्होंने अवैध प्रवासियों को घुसपैठिया बताते हुए कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति की वजह से उन्हें लोग इस नाम से नहीं बुलाते हैं. उन्हें भी इसमें शामिल करने की जरूरत नहीं है. 

'घुसपैठियों को जनगणना से बाहर रखें'

बिहार में जातीय जनगणना की बात करते हुए सिंह ने कहा कि "चाहे वे बांग्लादेशी हों, रोहिंग्या या किसी दूसरे देश के अवैध निवासी हों, उन्हें इससे बाहर रखा जाना चाहिए." अपने कट्टर हिंदुत्व रुख के लिए माने जाने वाले, केंद्रीय मंत्री ने 'मजबूत धर्मांतरण विरोधी कानून' की आवश्यकता पर भी जोर दिया. गिरिराज सिंह ने कहा नरेंद्र मोदी सरकार के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे के बीच अल्पसंख्यक शब्द की परिभाषा दोबारा बनाए जाने की जरूरत है.  

'खुद को बहुमत में समझें मुसलमान'

केंद्रीय मंत्री ने कहा, "यहां तक ​​कि मदनी ने कहा है कि वह अल्पसंख्यक समूह से संबंधित नहीं है." देवबंद के मौलवी मदनी के बयान का जिक्र करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि मुसलमानों को सभी 'समान विचारधारा वाले' को ध्यान में रखते हुए खुद को 'बहुमत' में समझना चाहिए. 

वीडियो लीक होने पर मुसलमान परेशान क्यों?

वाराणसी के ज्ञानवापी विवाद और परिसर में किए गए एक सर्वेक्षण के वीडियो फुटेज के लीक होने और 1991 के पूजा स्थल अधिनियम के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कुछ नहीं कहा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मामला विचाराधीन है और वह इस तरह के मामले पर टिप्पणी नहीं कर सकते. उन्होंने कहा, "फिर भी, मेरे विचार में, पूजा स्थल अधिनियम, 1991 ज्ञानवापी पर लागू नहीं है. हमें यह भी समझना चाहिए कि वीडियो फुटेज के लीक होने पर मुसलमान इतने परेशान क्यों हैं?" उन्होंने कहा, “सरदार पटेल लंबे समय तक जीवित रहते और राजेंद्र प्रसाद अध्यक्ष होते तो यह मामला सुलझ जाता, लेकिन नेहरू की तुष्टिकरण की राजनीति ने इसमें रुकावटें डाल दीं. यह अनावश्यक था. आखिर धर्म के नाम पर देश का बंटवारा हुआ." 

 

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