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मार्च तक बिहार में अपहरण कर शादी करने के 687 मामले

जबरन पैसे वसूलने या कोई पुरानी रंजिश या हत्या के लिए लोगों को अगवा किए जाने की बात आपने सुनी होगी, लेकिन बिहार में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब किसी व्यक्ति का अपहरण शादी के लिए किया गया.

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जबरन पैसे वसूलने या कोई पुरानी रंजिश या हत्या के लिए लोगों को अगवा किए जाने की बात आपने सुनी होगी, लेकिन बिहार में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जब किसी व्यक्ति का अपहरण शादी के लिए किया गया.

पुलिस मुख्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, इस साल मार्च तक 687 ऐसी घटनाएं घट चुकी हैं जिसमें विवाह के लिए अपहरण किया गया है. इन घटनाओं में न केवल पीड़ित युवतियां होती हैं, बल्कि युवकों का भी अपहरण विवाह के लिए किया गया.

बिहार में इस साल जनवरी में 216 अपहरण की घटनाएं विवाह को लेकर हुई हैं, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा विवाह के मौसम के नहीं रहने के कारण घटकर 193 रहा. मार्च में जब विवाह का लग्न तेज हुआ तो इस प्रकार की घटनाओं में भी वृद्धि हुई और यह आंकड़ा 278 तक जा पहुंचा.

कम नहीं हो रही घटनाएं
पिछले कुछ वर्षो के रिकॉर्ड पर नजर डाली जाए तो भले ही बिहार सरकार अपहरण की घटनाओं में कमी आने का दावा करती हो, मगर विवाह के लिए अपहरण की घटनाएं कम होने की बजाय बढ़ी हैं. बिहार के विभिन्न थानों में वर्ष 2011 में विवाह के लिए अपहरण की 2326 मामले दर्ज कराए गए थे, वहीं 2012 में ऐसी घटनाओं में अभूतपूर्व इजाफा हुआ और यह संख्या 3007 तक पहुंच गई. वर्ष 2013 में ऐसी घटनाएं भले ही थोड़ी कम हुईं, फिर भी यह आंकड़ा 2922 तक पहुंच गया था.

गौर करने वाली बात है कि विवाह के लिए अपहरण की सबसे ज्यादा घटनाएं उस महीने में ज्यादा दर्ज की जाती रही हैं, जिस महीने में विवाह के लिए लग्न सबसे अधिक रहा हो. वर्ष 2011 में वैसे तो सभी महीनों में विवाह के लिए अपहरण की घटनाएं हुई हैं, परंतु सबसे ज्यादा जून में 244 मामले सामने आए थे. उस महीने विवाह का सबसे ज्यादा लग्न था. इसी तरह वर्ष 2012 में अप्रैल में विवाह के लिए शुभ मुहूर्त बड़ी संख्या में था. उस वर्ष अप्रैल में राज्य के विभिन्न थानों में विवाह के लिए अपहरण के 337 मामले दर्ज हुए थे, जबकि 2013 में अप्रैल में ऐसी घटनाओं के 315 मामले दर्ज हुए थे.

उत्‍तरी बिहार में सबसे ज्‍यादा मामले
आंकड़ों के अनुसार, ऐसी घटनाएं मुंगेर, गया, नवादा, नालंदा, जहानाबाद, नवगछिया, पटना जैसे क्षेत्रों में अधिक होती हैं. पुलिस अधिकारियों का भी मानना है कि लड़की और लड़के के परिजन तो अपहरण का मामला थाना में दर्ज करवाते हैं, लेकिन जब जांच में पता चलता है कि अपहरण विवाह के लिए किया गया. ऐसे में पुलिस कुछ नहीं कर पाती.

पटना विश्वविद्यालय की प्रोफेसर भारती एस. कुमार इस मसले पर कहती हैं कि विवाह के लिए अपहरण का प्रचलन मुख्य रूप से उत्तर बिहार में है. ऐसे विवाह से अभिभावक तो लड़कियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं, परंतु इस बेमेल विवाह का नकारात्मक प्रभाव पति-पत्नी पर जीवनभर देखने को मिलता है. वह कहती हैं कि प्रेम-प्रसंग को लेकर भी अपहरण के मामले दर्ज हो रहे हैं, जिसकी परिणति बाद में विवाह के रूप में सामने आती है.

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