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राष्ट्रपति चुनाव ने बिहार में NDA को एकजुट करने का काम कर दिया

बिहार में एनडीए दलों के बीच खटपट की खबरें आती रहती हैं. लेकिन राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जिस तरह की एकजुटता देखने को मिली है, ये पार्टी के लिए शुभ संकेत माने जा रहे हैं.

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बिहार सीएम नीतीश कुमार बिहार सीएम नीतीश कुमार

राष्ट्रपति चुनाव बिहार की सियासत के लिए एकता की सियासी फुहार लेकर आया है. द्रौपदी मुर्मू पर बिहार एनडीए में हाल के दिनों में बड़ी एकजुटता नजर आई है. तमाम घटक दलों जिसमें मांझी और जदयू के साथ पशुपति पारस शामिल हैं.

सभी ने एक सुर में एनडीए उम्मीदवार का समर्थन किया है. पीएम मोदी की ओर से घोषित की गई उम्मीदवार द्रौपदी को लेकर अब किसी को सस्पेंस नहीं है. इतना ही नहीं अब चिराग पासवान भी एनडीए के पाले में आते दिख रहे हैं. राजनीतिक जानकारों की नजर में वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति चुनाव के जरिये NDA को पुराने दौर में ले जाने की कवायद शुरू कर दी गई है.

आपको बता दें कि हाल के दिनों में और 2020 में बिहार एनडीए में टकराहट बढ़ गई थी. कहा जाने लगा था कि जातीगत जनगणना और जनसंख्या के मामले पर जदयू का स्टैंड अलग है और विशेष राज्य के दर्जे का मामला जदयू उठाकर एनडीए को असहज कर सकती है. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. 

इस बीच इफ्तार में नीतीश का तेजस्वी से मिलना बीजेपी को असहज कर गया. ऐसा लगा कि गठबंधन यानी एनडीए अब बिखर जाएगी. लेकिन ऐसा भी नहीं हुआ. बात तब और गर्मा गई जब जातिगत गणना के मुद्दे पर नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव बंद कमरे में एक घंटे से ज़्यादा इस मुद्दे के बहाने बैठ गए और इसके साथ ही राजनीतिक क़यास भी तेज हो गए. उसके बाद जातीगत जनगणना पर बीजेपी के सुर जदयू से मिलने लगे. उसके बाद अब राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार की उम्मीदवारी की बात जदयू के बड़े नेताओ के तरफ़ से उठने लगी, जिससे एनडीए में फिर हलचल तेज हुई.

आपको बता दें कि राजनाथ सिंह को राष्ट्रपति चुनाव के मुद्दे पर तमाम दलों से बातचीत करनी थी. राजनाथ ने नीतीश के साथ एनडीए के सभी घटक दलों को समय सीमा के अंदर साध लिया. अब एनडीए में सबकुछ ऑल इज वेल है. नरेंद्र मोदी ने द्रौपदी मुर्मू का नाम आगे किया, उसके बाद नीतीश कुमार ने तुरंत उस पर मुहर लगाकर एनडीए को लेकर चल रही कयासबाजी पर विराम लगा दिया. वही द्रौपदी मुर्मू के नाम पर हम, लोजपा पशुपति पारस गुट ने भी समर्थन का एलान करने में देर नहीं की. वहीं राजनाथ सिंह ने चिराग़ पासवान को भी फ़ोन कर समर्थन माँगा और चिराग़ को भी एनडीए का हिस्सा बताया. चिराग ने भी समर्थन का एलान कर दिया. 

बात करें चिराग और नीतीश कुमार के आपसी संबंध की तो सियासी जानकार मानते हैं कि राजनीति में कोई स्थायी दुश्मन नहीं होता. इफ्तार के दौरान नीतीश ने खुद चिराग को बुलाकर बात की थी. वो आने वाले प्रगाढ़ संबंध वाली राजनीति का संकेत है. फिलहाल एनडीएम में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर ऑल इज वेल है.

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