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पटना में 2 साल बाद भी नहीं शुरू हो पाया गंगा रिसर्च सेंटर, बना नशेड़ियों का अड्डा

साल 2019 में नमामि गंगे योजना के तहत पटना में 243 करोड़ से ज्यादा की लागत से 16 घाट, 3 भवन और एक शवदाह गृह लोकार्पण किया गया था, वह भी किसी और के द्वारा नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा. लेकिन हैरानी की बात ये है कि लोकार्पण के 2 साल बाद भी इन भवनों में काम नहीं शुरू हो पाया है.

गंगा रिसर्च सेंटर गंगा रिसर्च सेंटर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • केंद्र सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है नमामि गंगे
  • 2019 में पटना में 243 करोड़ के शुरू गए थे प्रोजेक्ट्स
  • दो साल बाद भी काम नहीं हुआ शुरू
  • प्रधानमंत्री मोदी ने किया था लोकार्पण

नमामि गंगे केंद्र सरकार के सबसे बड़े प्रोजेक्ट में से एक है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट से गंगा का कायाकल्प करने का सपना देश के सामने रखा था. साल 2019 में नमामि गंगे योजना के तहत पटना में 243 करोड़ से ज्यादा की लागत से 16 घाट, 3 भवन और एक शवदाह गृह लोकार्पण किया गया था, वह भी किसी और के द्वारा नहीं बल्कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा. लेकिन हैरानी की बात ये है कि लोकार्पण के 2 साल बाद भी इन भवनों में काम नहीं शुरू हो पाया है.

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पटना के कलेक्ट्रेट घाट पर बने गंगा रिसर्च सेंटर में अब तक रिसर्च का काम शुरू नहीं हो पाया है. रिसर्च के संसाधनों से लेकर कुर्सी टेबल तक यहाँ मौजूद नहीं हैं. वहां मौजूद गार्ड बताते हैं कि 2 साल से कोई अधिकारी देखने नहीं आया. इमारत बन कर खड़ी है लेकिन अंदर कुछ भी नहीं. प्रशासनिक लापरवाही के कारण गंगा रिसर्च सेंटर नशेड़ियों का अड्डा बन चुका है. बुडको से लेकर नगर निगम तक, कोई इस मुद्दे पर बात करने को तैयार नहीं है.

पटना का गंगा रिसर्च सेंटर बना नशेड़ियों का अड्डा
पटना का गंगा रिसर्च सेंटर बना नशेड़ियों का अड्डा

इस योजना के तहत बड़हरवा घाट पर ऑडियो विजुअल थियेटर और राजाघाट पर कम्युनिटी कम कल्चरल सेंटर भी बनाया गया है, लेकिन यहां भी अब तक कोई काम शुरू नहीं हो पाया है. नमामी गंगे योजना के तहत कलेक्ट्रेट से राजाघाट के बीच 16 घाट का निर्माण पूरा हो गया है. गुलबी घाट पर विद्युत शवदाह गृह भी बनाया गया है.

 

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