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पटना-दरभंगा सहित PFI से जुड़े 32 ठिकानों पर NIA के छापे, टेरर मॉड्यूल से जुड़ा है मामला

पटना टेरर मॉड्यूल से जुड़े मामले पर नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) ने सख्ती दिखाई है. पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 32 ठिकानों पर छापेमारी की गई है. टीम ने फुलवारी शरीफ में अहतर परवेज के घर पर 2 घंटे तक छापेमारी की है. NIA की दो टीम्स ने दरभंगा में भी ताबड़तोड़ छापे मारे हैं.

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सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर

बिहार के पटना टेरर मॉड्यूल में जांच को आगे बढ़ाते हुए नेशनल इन्वेस्टीगेशन एजेंसी (NIA) ने गुरुवार को 32 ठिकानों पर छोपमारी की है. जांच एजेंसी की टीम ने पटना के अलावा दरभंगा में भी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े ठिकानों पर छापे मारे हैं.

एनआईए की टीम ने पटना के फुलवारी शरीफ में अहतर परवेज के घर पर 2 घंटे तक छापेमारी की. जांच एजेंसी की टीम यहां सुबह 6 बजे पहुंची थी. NIA की दो टीम दरभंगा भी पहुंची. पहली टीम ने उर्दू बाजार के एक लॉज में छापा मारा. यहां गिराफ्तार किए गए नरुद्दीन जंगी के घर से चंद कदम दूर स्थित लॉज पर छापा मारा गया. वहीं, दूसरी टीम ने दरभंगा के सिंघवाड़ा इलाके में छापेमारी की. 

बता दें कि फुलवारी शरीफ मामले में NIA ने 2 अलग अलग FIR दर्ज की हैं.  NIA ने एक एफआईआर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रोग्राम से पहले रची गई साजिश के मामले में दर्ज की है. इस FIR में 26 संदिग्ध हैं. 14 जुलाई को पटना के फुलवारी शरीफ इलाके में छापेमारी की गई थी. छापेमारी में भारत को इस्लामिक राज्य बनाने के लिए कट्टरपंथी समूह पीएफआई के 'मिशन 2047' के बारे में दस्तावेज जब्त किए गए थे.

वहीं, दूसरी FIR एनआईए ने गजवा-ए-हिन्द मॉड्यूल की जांच के मामले में केस दर्ज की है. इस ग्रुप का मुख्य आरोपी मरगूब अहमद दानिश है. दोनों मामलों का एक-दूसरे से लिंक है. NIA ने पूरी साजिश को समझने के लिए और पीएफआई के लिंक कार्रवाई सख्त कर दी है.

एनआईए सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एफआईआर में मौजूद संदिग्धों में कई ऐसे हैं, जिनके सीधे तौर पर पीएफआई (PFI) यानी पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया से संबंध हैं. जिसके लिंक की जांच एनआईए गहराई से कर रही है. यही वजह है कि एनआईए फुलवारी शरीफ के मामले में 32 जगहों पर छापेमारी कर रही है.

NIA की टीम ने PFI के सारण जिला अध्यक्ष और सरकारी शिक्षक परवेज आलम के घर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक छापेमारी की. NIA परवेज का मोबाइल अपने साथ ले गई. रामपुर मध्य विद्यालय में नियोजित शिक्षक और PFI के जिलाध्यक्ष ने बताया कि फुलवारी शरीफ के एक घर मे 6-7 जुलाई को PFI के गणतंत्र बचाओ मुहिम के तहत एक मीटिंग की थी.

NIA की टीम टेरर मॉड्यूल में शामिल (FIR में नामजद ) रियाज अहमद के घर वैशाली के छापड़ा भी पहुंची है. रियाज के घर की तालाशी ली जा रही है. NIA टीम के साथ बड़ी तादाद में स्थानीय पुलिस तैनात है. आरोपी रियाज के भाई ने PFI के आतंकी मॉड्यूल का खुलासा किया था. उसने बताया था कि पटना के अलावा कई जिलों में कैंप लगाकर लड़कों को ट्रेनिंग दी जाती थी. रियाज अपने घर पर लड़कों को ट्रेनिंग देता था.

रियाज पिछले दो विधानसभा चुनाव में संदिग्ध SDPI का उम्मीदवार बनकर चुनाव लड़ चुका है. 5 भाइयों और एक बहन में रियाज सबसे छोटा है. रियाज की पूरी पढ़ाई लिखाई उत्तरप्रदेश से हुई है, जिसके बाद रियाज अपने गांव लौट कर पार्टी के काम के साथ स्थानीय स्तर पर आयुर्वेद दवाओं का काम करता है. 

वहीं, जांच एजेंसी की टीम ने अररिया के जोकीहाट थाना क्षेत्र के अरतिया गांव में इंजीनियर एहसास परवेज के घर पर भी छापा मारा. एहसान घर पर नहीं मिला, उसके रिश्तेदारों से पूछताछ की जा रही है. पिछले महीने भी एनआई की टीम ने एहसान परवेज के घर पर छापेमारी की थी. उस वक्त भी वह घर पर नहीं मिला था.

बिहार के पटना टेरर मॉड्यूल में जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने 15 जुलाई को फुलवारी शरीफ से मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर को गिरफ्तार किया था. पुलिस के मुताबिक, जब ताहिर को पूछताछ के लिए थाने पर लाया गया तो उसके मोबाइल में ऐसी कई चीजें मिलीं, जो इस बात की ओर इशारा करती थीं कि वह स्थानीय और विदेशी तत्वों की मदद से संप्रदाय विरोधी और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में संलिप्त है.

पुलिस के अनुसार, ताहिर साल 1996 में फुलवारी शरीफ में जन्मा. उसका परिवार मूलतः गया जिले के बिठो शरीफ का रहने वाला है. ताहिर के परिवार के कुछ लोग पाकिस्तान के कराची में बसे हुए हैं. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस जांच में पता चला है कि ताहिर 2016 से ही वॉट्सएप, ईमेल और फेसबुक के जरिए पाकिस्तान में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के संपर्क में था. पुलिस जांच में अब तक जो साक्ष्य मिले हैं, उनके मुताबिक, ताहिर पाकिस्तान स्थित कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से जुड़ा है. पाकिस्तान में फैजान नाम का शख्स उसके साथ लगातार संपर्क में था.

पुलिस को ताहिर के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पता चला कि उसके वॉट्सएप में गजवा-ए-हिंद नाम का एक ग्रुप भी बना हुआ था. इस ग्रुप का वह एडमिन था, जो इस ओर इशारा करता है कि उसके तार गजवा-ए-हिंद से भी जुड़े हैं. इसी ग्रुप में फैजान है, जो लगातार ताहिर के संपर्क में था. फैजान भी इस ग्रुप का एडमिन है. गजवा-ए-हिंद नाम के इस वॉट्सएप ग्रुप में कई पाकिस्तानी नंबर भी हैं. इसमें पाकिस्तानियों के अलावा भारत और यमन के भी कई लोगों के नंबर हैं. इस वॉट्सएप ग्रुप का आइकन और चैट देश विरोधी, संप्रदाय विरोधी, भड़काऊ, आपत्तिजनक और गैर कानूनी और गैर-संवैधानिक है.

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