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बिहारः कोरोना काल में कैसे हो चुनाव प्रचार? EC ने जारी की गाइडलाइन

चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय क्षेत्रीय पार्टियों से सुझाव मांगे हैं कि कोरोना के इस समय में पार्टियों के प्रचार और जनसंवाद का तरीका क्या होगा.

निर्वाचन आयोग भवन (फाइल फोटो) निर्वाचन आयोग भवन (फाइल फोटो)

  • जनसंवाद के तरीके पर राजनीतिक पार्टियों से मांगे सुझाव
  • चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों के ज्ञापन पर भी की सुनवाई

बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं. बिहार में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप का हवाला देते हुए विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) विधानसभा चुनाव टालने की मांग भी कर रहा है. इन सबके बीच चुनाव आयोग ने चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी हैं. कोरोना काल में चुनाव प्रचार कैसे हो, चुनाव आयोग ने इसके लिए गाइडलाइन जारी कर दी है.

चुनाव आयोग ने बड़ी संख्या में पब्लिक गैदरिंग पर रोक लगाने के साथ ही मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करने के निर्देश दिए हैं. चुनाव आयोग ने सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय क्षेत्रीय पार्टियों से सुझाव मांगे हैं कि कोरोना के इस समय में पार्टियों के प्रचार और जनसंवाद का तरीका क्या होगा? आयोग ने सभी पार्टियों को अपने सुझाव 31 जुलाई तक देने के लिए कहा है.

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इससे पहले चुनाव आयोग ने बिहार की विपक्षी पार्टियों के ज्ञापन पर भी सुनवाई की. विपक्षी पार्टियों ने आयोग को ज्ञापन देकर कहा है कि कोरोना के समय बिहार में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कैसे हो सकते हैं? विपक्षी पार्टियों का तर्क है कि इस बार कोरोना की वजह से चुनावी रैलियां, जुलूस, जलसे वगैरह तो होने से रहे. सभी दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार के समान अवसर के सिद्धांत के तहत ई-प्रचार में मोबाइल फोन और इंटरनेट ही बच गए हैं, जबकि बिहार में 34 फीसदी आबादी के पास ही मोबाइल फोन है.

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विपक्षी पार्टियों ने यह भी कहा है कि जब जलसे-जुलूस होंगे ही नहीं तो चुनाव खर्च की सीमा भी नए सिरे से तय की जाए. यानी अधिकतम खर्च की सीमा घटाई जाए. ताकि सभी दलों को चुनाव में अपनी बात मतदाता तक पहुंचाने के लिए बराबर अवसर मिल सके. इन पार्टियों की ओर से कहा गया है कि पूरे राज्य में कोरोना का प्रकोप है. राज्य में शुक्रवार तक 22 हजार लोग कोरोना से संक्रमित हैं.

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विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि विशेषज्ञों की राय लेकर ही आयोग फैसला करे, जिससे जनता अपने लोकतांत्रिक अधिकार का प्रयोग निडर होकर कर सके और सही जनादेश तैयार हो सके. दरअसल, चुनाव आयोग पहले ही कह चुका है कि बिहार के चुनाव समय पर होंगे. इसी को लेकर चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव आयोग को बिहार की सभी पार्टियों के साथ मीटिंग करने के लिए कहा था.

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