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बिहार में सियासी विरासत सौंपने की तैयारी, खुद MP और बेटे के लिए MLA की कुर्सी पर नजर

बिहार की सियासत में कई ऐसे नेता हैं, जो अपनी सियासी विरासत को अपने बेटे-बेटियों को सौंपने की कवायद में जुटे हैं. ऐसे नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है जो खुद तो सांसद हैं और बेटे को विधायक बनाने के लिए टिकट की दावेदारी कर सकते हैं. इनमें से कई ऐसे नेता हैं, जो पिछली बार भी ऐसी कोशिश कर चुके हैं लेकिन अपने वारिस को जीत दिला नहीं सके थे.

अर्जित शाश्वत और अश्विनी चौबे अर्जित शाश्वत और अश्विनी चौबे

  • बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मियां हुईं तेज
  • सांसद अपने बेटे को विधायक बनाने की जुगत में

बिहार में विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात बिछाई जाने लगी है. ऐसे में सूबे में कई ऐसे नेता हैं, जो अपनी सियासी विरासत को अपने बेटे-बेटियों को सौंपने की कवायद कर रहे हैं. ऐसे नेताओं की फेहरिस्त काफी लंबी है जो खुद तो सांसद हैं और बेटे को विधायक बनाने के लिए टिकट की दावेदारी कर सकते हैं. इनमें से कई ऐसे नेता हैं, जो पिछली बार भी ऐसी कोशिश कर चुके हैं, लेकिन अपने वारिस को जीत दिला नहीं सके थे. इस बार फिर वो ताल ठोक सकते हैं.

अश्विनी चौबे को सियासी विरासत की चिंता

बिहार में बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे अपनी राजनीतिक वारिस के तौर पर अपने बेटे अर्जित शाश्वत को आगे बढ़ाना चाहते हैं. 2015 के विधानसभा चुनाव में अश्विनी चौबे बेटे अर्जित को भागलपुर विधानसभा सीट से बीजेपी से टिकट दिलाने में कामयाब रहे थे, लेकिन समीकरण ऐसे बने कि वह जीत नहीं दिला सके. अर्जित 11 हजार मतों से हार गए थे. भगलपुर विधानसभा सीट अश्विनी चौबे की परंपरागत सीट रही है. यहां से एमपी बनने के पहले वे पांच बार विधायक रह चुके है. ऐसे में इस बार फिर से वो अपने बेटे अर्जित शाश्वत के लिए टिकट की दावेदारी कर सकते हैं.

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छेदी पासवान बेटे को MLA बनाने की कवायद में जुटे

सासाराम से बीजेपी सासंद छेदी पासवान भी अपनी सियासी विरासत अपने बेटे रविशंकर पासवान को सौंपने की कवायद में हैं. इसके लिए उन्होंने ने 2015 के चुनाव में बीजेपी से टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी ने नहीं दिया तो रविशंकर पासवान ने सपा उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोक दी. हालांकि, चुनाव में उनकी साइकिल पंचर हो गई और हार गए. इसके बाद रविशंकर बीजेपी में फिर से सक्रिय हो गए और फिलहाल पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य हैं. इस बार के चुनाव में फिर से चेनारी और मोहनिया विधानसभा सीट से दावेदारी कर रहे हैं, इन दोनों सीटों से छेदी पासवान विधायक रह चुके हैं.

रामकृपाल अपने बेटे को MLA बनाने की जुगत में

बिहार की सियासत में बीजेपी के दिग्गज नेता माने जाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री और सांसद रामकृपाल यादव अपने सियासी वरिस के तौर पर बेटे अभिमन्यु को बढ़ाना चाहते हैं. हालांकि, एक दौर में रामकृपाल यादव आरजेडी प्रमुख लालू यादव के राइटहैंड माने जाते थे, लेकिन 2014 में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया था. रामकृपाल के बेटे अभिमन्यु एलजेपी ज्वाइन करने वाले थे, लेकिन कोरोना संक्रमण के चलते उनकी एंट्री टल गई थी. बिहार विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मियों को देखते हुए अभिमन्यु एनडीए के किसी दल से किस्मत आजमाना चाहते हैं, जिसके लिए उनकी नजर औरंगाबाद जिला की ओबरा सीट पर है. हालांकि, इस सीट पर आरजेडी का कब्जा है.

अखिलेश सिंह सियासी विरासत सौंपने को तैयार

बिहार में कांग्रेस के दिग्गज नेता और राज्यसभा सदस्य अखिलेश प्रसाद सिंह अपनी राजनीतिक विरासत के तौर पर अपने बेटे आकाश कुमार सिंह को आगे बढ़ाना चाहते हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आकाश को पूर्वी चंपारण संसदीय सीट से आरएलएसपी के कोटे से मैदान में उतारा था, लेकिन जीत नहीं दिला सके. अखिलेश सिंह राज्यसभा सदस्य से पहले अरवल सीट से विधायक रह चुके हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि इस बार विधानसभा के सियासी मैदान में उतार सकते हैं.

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वीणादेवी के सामने विरासत की चिंता

वैशाली लोकसभा सीट से एलजेपी की सांसद वीणा देवी अपनी राजनीतिक विरासत के लिए परिवार के किसी सदस्य को अपनी परंपरागत सीट से मुजफ्फरपुर जिला के गायघाट से टिकट की जुगत में है. इस सीट से वीणा देवी विधायक रह चुकी हैं. मौजूदा समय में उनके पति दिनेश सिंह इस समय बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं और ऐसे में अपनी गायघाट सीट से परिवार के किसी सदस्य को मैदान में उतारकर जीत दिलाने की कवायद में हैं.

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