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'मेरा 72 घंटे का इंटरनेट डाटा वापस दो', बिहार में यूजर ने मोबाइल कंपनी के खिलाफ कोर्ट में किया केस

बिहार में अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान प्रशासन के आदेश पर 72 घंटों की इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी. यूजर इंटरनेट पैक का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. इसी बात को लेकर भोजपुर के यूजर ने अपभोक्ता कोर्ट में केस दर्ज करके मोबाइल कंपनी से डाटा वापस मांगा है.

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सांकेतिक तस्वीर. सांकेतिक तस्वीर.
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 20 जिलों में इंटरनेट सेवा पर लगाई गई थी रोक
  • भोजपुर के यूजर ने उपभोक्ता कोर्ट में किया केस
  • इंटरनेट बंदी से हुए नुकसान की भरपाई की मांग

बिहार के भोजपुर जिले में यूजर ने मोबाइल कंपनी के ऊपर ही केस दर्ज कर दिया है. यूजर अपने नुकसान की भरपाई की मांग मोबाइल कंपनी से कर रहा है. दरअसल, अग्निपथ योजना के विरोध के दौरान अफवाह फैलने से रोकने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के इरादे से प्रशासन के आदेश पर 72 घंटों की इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी. बंदी के दौरान लोग इंटरनेट पैक को इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे. इसी बात को लेकर यूजर ने कंज्यूमर कोर्ट में केस दर्ज किया है.

जानकारी के मुताबिक, शंकर प्रकाश नामक युवक ने चार दिनों का अपना बचा हुआ डाटा टेलीकॉम कंपनी से पाने के लिए मंगलवार को स्थानीय कंज्यूमर कोर्ट में केस दर्ज करवाया. कोर्ट ने उसका मामला सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है. यूजर ने बताया कि इंटरनेट बंदी का नुकसान मोबाइल उपभोक्ताओं को झेलना पड़ा है.

अधिकांश टेलीकाम कंपनियां प्रीपेड प्लान में प्रतिदिन उपलब्ध कराने वाले डाटा का पैसा पहले ही ले लेती हैं. स्मार्ट फोन यूजर प्रतिदिन औसतन एक जीबी डेटा का इस्तेमाल करते हैं. इस तरह उनका डाटा का इस्तमाल नहीं हो पा रहा था, जिसे वापस देने के लिए केस किया गया है.

20 जिलों में इंटरनेट सेवा पर लगाई गई थी रोक
बता दें कि केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना को लेकर राज्य में तीन दिन तक भारी हंगामा हुआ था. पुलिस ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए 20 जिलों में इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी थी. इन शहरों में फेसबुक, ट्विटर और वाट्सऐप और इंटरनेट मीडिया पर तस्वीरें, वीडियो या संदेश भेजने पर रोक लगा दी थी. रेलवे, बैंकिंग एवं अन्य सरकारी सेवाएं इससे प्रभावित नहीं थीं. सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, आगजनी तथा तोड़फोड़ करने के मामले में राज्य भर में अब तक 150 से अधिक FIR दर्ज की गई हैं.

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, तोड़फोड़ और अफवाह फैलाने वाले लोगों को उकसाने वालों की पहचान की जा रही है. साक्ष्य मिलने पर उनके विरुद्ध भी विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी.

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