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बिहार में अब BJP एकला चलो की राह पर, जानिए क्यों अमित शाह सीमांचल से कर रहे मिशन-2024 का आगाज?

बिहार में बीजेपी और जेडीयू की सियासी राहें जुदा हो चुकी हैं. नीतीश कुमार की महागठबंधन में वापसी हो गई है तो बीजेपी बिहार में एकला चलो की राह पर अपने कदम बढ़ा दिए हैं. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार में मिशन-2024 का आगाज मुस्लिम बहुल सीमांचल से कर रहे हैं ताकि बिहार में सियासी जमीनी को ऊपजाऊ बनाई जा सके...

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह

बिहार में सियासी बदलाव के बाद राजनीतिक समीकरण पूरी तरह से बदल गए हैं. बीजेपी अब किसी दल की बैसाखी के बजाय एकला चलो की राह पर है. जेडीयू के साथ गठबंधन में रहते हुए बीजेपी बिहार में अभी तक खुलकर हिंदुत्व का दांव नहीं खेल पा रही थी, लेकिन नीतीश से राहें अलग होने बाद उसे आपदा में अवसर नजर आ रहा. यही वजह है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बिहार में मिशन-2024 का आगाज मुस्लिम बहुल माने जाने वाले सीमांचल से कर रहे हैं. 

नीतीश कुमार के एनडीए से अलग होने के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पहली बार शुक्रवार को बिहार के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं. अमित शाह शुक्रवार को सीमांचल के पूर्णिया और शनिवार को किशनगंज रैली करेंगे. शाह मुख्य रूप से बिहार के उन इलाकों का दौरा कर रहे हैं, जिसे आरजेडी के यादव-मुस्लिम समीकरण और महागठबंधन के गढ़ के रूप में देखा जाता है. यही वजह है कि अमित शाह के दौरे के लेकर महागठबंधन के नेता सवाल खड़े कर रहे हैं. 

दरअसल, जेडीयू से दोस्ती टूटने के बाद यह बात साफ है कि बीजेपी 2024 के लोकसभा चुनाव में बिहार में अकेले दम पर उतरने की तैयारी में है. उतरेगी. नीतीश कुमार का अचानक रातों-रात पाला बदलने से बीजेपी को तात्कालिक झटका लगा है, लेकिन उसके सियासी महत्वाकांक्षा के हक में है. बीजेपी के तमाम नेता यह महसूस कर रहते थे कि गठबंधन में रहते हुए बिहार में अपना सीएम बनाने पर मंसूबे पूरे नहीं हो सकते हैं. यही वजह है कि गठबंधन टूटते ही बीजेपी ने बिहार में अपना टारेगट तय कर लिया है. 

बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में 40 सीटों में से 35 प्लस जीतने का टारगेट तय कर रखा है. बीजेपी के इस लक्ष्य को अमलीजामा पहनाने का जिम्मा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अपने कंधों पर ले लिया है. इसी मद्देनजर अमित शाह बिहार में मिशन-2024 का आगाज मुस्लिम बहुल सीमांचल इलाके से करने जा रहे हैं, जिसके जरिए महागठबंधन के मजबूत दुर्ग में सियासी चुनौती खड़ी कर सकें.  

अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर सीमांचल के पूर्णिया पहुंच रहे हैं, जहां पर मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाकर और नीतीश सरकार के खिलाफ माहौल बनाकर राज्य में फतह करने की सियासी बिसात बिछाएंगे. बीजेपी शुरू से ही सीमांचल को अपने टारगेट पर रखा है, क्योंकि इलाका काफी संवेदनशील माना जाता है. सीमांचल में 40 से 70 फीसदी तक मुस्लिम आबादी है. 

सीमांचल का इलाका असम और पश्चिम बंगाल के साथ-साथ लगा हुआ है. इस इलाके में शुरू से ही बांग्लादेश घुसपैठ एक बड़ा मुद्दा है. ऐसे में अमित शाह सीमांचल दौरे पर इस मुद्दे को रैली में उठाकर सियासी एजेंडा सेट कर सकते हैं. बीजेपी के नेता इस बात का खुले तौर पर संकेत भी दे रहे हैं तो विपक्ष अमित शाह के सीमांचल के दौर पर सवाल खड़े करने के साथ सतर्क भी है. 

आरजेडी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बिहार के सीमांचल इलाके के आगामी दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों को सतर्क व सावधान रहने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के नेता राज्य में विभिन्न समुदायों के लोगों को आपस में लड़ाने के लिए उकसाते हैं. केंद्रीय गृह मंत्री के इस दौरे को लेकर नीतीश कुमार भी काफी सावधान हैं तो जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह से लेकर उपेंद्र कुशवाहा तक कह चुके हैं कि बीजेपी बिहार का माहौल खराब करना चाहती है. 

सीमांचल क्षेत्र में घनी मुस्लिम आबादी है, जिसके चलते बीजेपी के लोग जनसंख्या के असंतुलन और घुसपैठ को मुद्दा बनाते रहे हैं. इतना ही नहीं वो महागठबंधन के दलों पर इस इलाके में तुष्टिकरण के आधार पर राजनीति करने का आरोप लगाते रहे हैं. जेडीयू के साथ होने के चलते बीजेपी खुलकर हिंदुत्व कार्ड नहीं खेलती थी, लेकिन बदले हुए माहौल में अपने एजेंडे पर सियासी समीकरण सेट करने का मौका दिख रहा है.

माना जा रहा है कि अमित शाह सीमांचल के दो दिवसीय दौरे पर बिहार में बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर आरजेडी और जेडीयू को घेर सकते हैं. केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे ने कहा कि सीमांचल की सुरक्षा और विकास को लेकर गृहमंत्री अमित शाह का ये दौरा है. इस दौरे से पीएफआई के गढ़ बन रहे सीमांचल में उनके नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने का प्लान है. बिहार सरकार पीएफआई को पनाह दे रही है. अल्पसंख्यक तुष्टिकरण कर रही है, आतंकवाद व घुसपैठ को बढ़ावा दे रही है. इसे तोड़ने के लिए अमित शाह सीमांचल आ रहे हैं. 

वहीं, अमित शाह के सीमांचल दौरे को जेडीयू ने सांप्रदायिकता से जोड़ते हुए हमला किया है. जेडीयू नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि बीजेपी बिहार में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिशों में जुट गई है. यह बात अमित शाह की पहली यात्रा के लिए जगह के चुनाव में नजर आ गई है, लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होगा. बिहार में सांप्रदायिकता को भुनाने की बीजेपी की योजना उसी तरह विफल हो जाएगी जैसे उसने पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में की थी.  

सीमांचल में चार लोकसभा सीट

बीजेपी बिहार में 2024 के लोकसभा और 2025 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर अभी से अपनी जमीन तैयार करने में जुट गई है. 2019 के चुनाव में बीजेपी ने इस क्षेत्र की 4 लोकसभा सीटों में से एक अररिया से जीत सकी थी तो एनडीए में रहते हुए जेडीयू को कटिहार और पूर्णिया सीट मिली थी. ये दोनों ही सीटें परंपरागत रूप से बीजेपी की मानी जाती रही हैं. इसके अलावा किशनगंज सीट से कांग्रेस को जीत मिली थी. अब जेडीयू ने रास्ते अलग कर लिए हैं तो बीजेपी यहां एक बार फिर से चार की सीटों सीटों पर जीत के लिए प्लान बना रही है. 

सीमांचल में 24 विधानसभा सीट

सीमांचल के इलाके में कुल 24 विधानसभा सीटें हैं, जिसमें से 16 पर महागठबंधन का कब्जा है. कांग्रेस के पांच आरजेडी के पास सात सीटें हैं तो जेडीयू के पास चार सीटें हैं. भले ही यह इलाका मुस्लिम बहुल है, लेकिन यहां अति पिछड़ा और पिछड़ा वोटर की भी अच्छी खासी आबादी है. आरजेडी यहां पर मुस्लिम-यादव समीकरण के जरिए मजबूत मानी जाती है तो जेडीयू मुस्लिम और अतिपिछड़े के दम पर जीतती रही है. 

मुस्लिम वोटों के सहारे असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM भी सीमांचल में 5 सीटें जीतकर बिहार में दमदारी के साथ एंट्री की थी, लेकिन उसके चार विधायक आरजेडी के साथ चले गए हैं. ओवैसी की पार्टी दोबारा से सीमांचल में सक्रिय हैं तो बीजेपी की नजर भी इसी इलाके पर है. सीमांचल के किशनगंज में एक समय बीजेपी के नेता शाहनवाज हुसैन सांसद रह चुके हैं और अब बिहार में वो सक्रिय हैं. 

क्या है बीजेपी की रणनीति?

बिहार में सत्ता गंवाने के बाद बीजेपी की निगाहें 2024 के लोकसभा पर है. एनडीए ने 2019 के चुनाव में 39 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें जदयू को 16 सीट मिली थी. अब नई परिस्थितियों में बीजेपी के पास या एनडीए के पास कुल 23 सीट ही बची हुई है. 2024 के लिए नीतीश कुमार के बिना भी बीजेपी ने 35 सीटों का लक्ष्य निर्धारित किया है. अमित शाह का ये दौरा इसी मुहिम की पहली और महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है. पिछली बार जब अमित शाह दौरे पर थे, तो उन्होंने पटना के नेताओं से मुलाकात की थी और 40 सीटें जीतने की बात कही थी.

नीतीश के अलग होने के बाद दिल्ली में बीजेपी कोर ग्रुप की बैठक हुई थी, जिसमें अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल थे. इस बैठक में लोकसभा और विधानसभा चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की थी. बीजेपी मिशन-35 को पूरा करने के लिए निकट भविष्य के अंदर बिहार बीजेपी सांगठनिक तौर पर बड़े बदलाव किए जाएंगे. साथ ही केंद्रीय नेता राज्य के अलग-अलग क्षेत्र का दौरा करके नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धियों को गिनाएंगे और बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेंगे. 

अमित शाह का दो महीने के भीतर बिहार का यह दूसरा दौरा है. हालांकि, महागठबंधन ने भी अमित शाह के सीमांचल में रैली के जवाब में रैली करने की रणनीति बनाई है. जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि महागठबंधन भी दशहरे के बाद सीमांचल में रैली करेगी, जो तेजस्वी यादव के अगुवाई में होगी. उनका कहना है कि सीमांचल में बीजेपी का आज भी कोई अस्तित्व नहीं है. चाहे कितना भी जोर लगा ले. ऐसे में सीमांचल के सियासी समीकरण में बीजेपी और महागठबंधन के बीच शह-मात का खेल तेज हो गया है? 

 

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