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राज्य नहीं बांट पा रहे मुफ्त अनाज

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 से ज्यादा राज्य सरकारें मुफ्त अनाज के कोटे से 15 फीसद भी अनाज नहीं बांट पाईं.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते 30 जून को गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत नवंबर तक पांच किलो अनाज मुफ्त बांटने का ऐलान तो कर दिया लेकिन पिछले दो महीने के दौरान मुफ्त अनाज वितरण के जो आंकड़े हैं वे चौंकाने वाले हैं. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 26 से ज्यादा राज्य सरकारें मुफ्त अनाज के कोटे से 15 फीसद अनाज भी नहीं बांट पाईं. आधा दर्जन राज्यों ने तो पत्र लिख कर कह दिया कि उनके राज्य में मुफ्त में अनाज लेने वाले मजदूर बचे ही नहीं हैं. केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने इसे गंभीर मामला बताया है. ऐसे में सवाल यह उठने लगा है कि गरीब कल्याण अन्न योजना को नवंबर तक जारी रखने से गरीबों और मजदूरों का भला कैसे होगा जब राज्य सरकारें उसे बांट ही नहीं पातीं.

केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि लगभग 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों के लिए मई और जून माह के लिए 8 मीट्रिक टन मुफ्त अनाज की व्यवस्था की गई. 36 राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों ने लगभग 80 फीसद हिस्सा इस पूल से उठाया लेकिन मई और जून माह में सिर्फ 2.21 करोड़ लोगों को ही मुफ्त में अनाज दिया गया. मई और जून महीने के लिए राज्यों ने 8 लाख मीट्रिक टन अनाज में से 6.38 लाख मीट्रिक टन अनाज उठाया लेकिन सिर्फ 1.07 लाख मीट्रिक टन अनाज ही बंट सका. उत्तर प्रदेश ने 1 लाख 40 हजार 677 मीट्रिक टन अनाज उठाया तो बिहार ने 86 हजार 450 मीट्रिक टन अनाज लिया. लेकिन उत्तर प्रदेश में सिर्फ 3,324 मीट्रिक टन और बिहार में 1,882 मीट्रिक टन अनाज ही बंटा. आंध्र प्रदेश, गोवा, गुजरात, झारखंड. महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और त्रिपुरा ने अनाज तो उठाया लेकिन बांट नहीं पाए.

आंकड़े बताते हैं कि मुफ्त अनाज बांटने में राजस्थान अव्वल है. राजस्थान ने अपने कोटे का 100 फीसद उठाया और 95 फीसद बांट दिया. हरियाणा उठाए गए अनाज में से सिर्फ 50 फीसद बांटने में सफल रहा. हिमाचल प्रदेश, असम तथा कर्नाटक जैसे राज्यों का प्रदर्शन भी मुफ्त अनाज बांटने में संतोषजनक है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि गोवा और तेलंगाना समेत छह राज्य ऐसे हैं जिन्होंने पत्र लिख कर कहा है कि चूंकि उनके राज्य में अब प्रवासी मजदूर नहीं हैं, ऐसे में मुफ्त अनाज का वितरण नहीं कर सकते हैं.

सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय उपभोक्ता मामले के मंत्री राम विलास पासवान ने बीते बुधवार तो वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान इस बात पर चिंता जताई कि कई राज्य गरीबों को मुफ्त अनाज नहीं बाट पा रहे हैं. अधिकारियों का कहना है कि चूंकि 80 करोड़ गरीबों के लिए नवंबर तक पांच किलो अनाज फ्री में देने की घोषणा प्रधानमंत्री ने की है, ऐसे में यह देखा जाएगा कि राज्य सरकारें न सिर्फ इस पूल से अनाज उठाएं बल्कि उसे वितरित भी करें.

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