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भाजपा के और अनुकूल हुआ संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्तात्रेय होसबले को संघ का नया सरकार्यवाह बनाया गया है.

दत्तात्रेय होसबले दत्तात्रेय होसबले
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सरकार और भाजपा नेतृत्व के साथ होसबले का तारतम्य काफी बेहतर है
  • होसबले ने मोदी को पीएम प्रत्याशी बनाने में निभाई थी महत्वपूर्ण भूमिका
  • होसबले नए लोगों को संगठन में तरजीह देने की वकालत करते हैं

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रतिनिधि सभा की बैठक में दत्तात्रेय होसबले को संघ का नया सरकार्यवाह बनाया गया है. वह भैयाजी जोशी का स्थान लेंगे. जोशी पिछले 12 साल से सरकार्यवाह के पद पर थे. दत्तात्रेय को नई जिम्मेदारी मिलने के बाद संघ, भाजपा के और अनुकूल हो गया है. सरकार और भाजपा नेतृत्व के साथ होसबले का तारतम्य काफी बेहतर है.

दत्तात्रेय होसबले कर्नाटक से आते हैं और भाजपा में भी संगठन महामंत्री बीएल संतोष कर्नाटक से ताल्लुक रखते हैं. संतोष को जब पिछले साल संगठन महामंत्री बनाया गया था तो इसी उद्देश्य से कि वह संघ की तरफ से आनुषांगिक संगठनों में युवाओं को तरजीह देने में भूमिका निभाएंगे. अब दत्तात्रेय होसबले को सरकार्यवाह बनने के बाद भाजपा सहित संघ के दूसरे आनुषांगिक संगठनों में बड़े पैमाने पर फेरबदल की संभावना है. होसबले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में भी रहे हैं और संघ के बौद्धिक प्रकोष्ठ को भी संचालित किया है. इसलिए वह विभिन्न आनुषांगिक संगठनों के सहयोगियों को बेहतर तरीके से जानते हैं. वह 67 साल के हैं, इसलिए उनसे 10 साल या इससे अधिक छोटी उम्र के सहयोगियों को भी वह भली प्रकार जानते हैं और उन्हें विभिन्न आनुषांगिक संगठनों में नई जिम्मेदारी देने में भूमिका निभा सकते हैं.

सूत्रों का कहना है कि 2013 के जून में जब गोवा में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति का प्रमुख बनाया गया तो वह चाहते थे कि अभियान समिति का प्रमुख बनाने की जगह उन्हें सीधे पीएम प्रत्याशी घोषित कर दिया जाए. भाजपा की तरफ से जब कहा गया कि लाल कृष्ण आडवाणी ऐसा नहीं चाहते हैं तो उन्होंने दो टूक कहा था कि जब संगठन (भाजपा) यह मानकर चल रही है कि चुनाव अभियान समिति का प्रमुख नियुक्त करने के बाद यदि आडवाणी नाखुश हुए तो उन्हें मना लिया जाएगा तो फिर सीधे पीएम प्रत्याशी नियुक्त करने के बाद भी आडवाणी को मनाया जा सकता है. हालांकि उस वक्त भैयाजी जोशी ने हस्तक्षेप करते हुए इस सुझाव को अपनी सहमति नहीं दी और तीन महीने बाद ही मोदी को पीएम प्रत्याशी घोषित किया जा सका. संघ से जुड़े लोगों का कहना है कि होसबले नए लोगों को संगठन में तरजीह देने की वकालत करते हैं और उन्हीं के सुझाव पर 75 साल की उम्र सीमा का परोक्ष फॉर्मूला भाजपा ने अपनाया था. माना जा रहा है कि होसबले के सरकार्यावह बनने के बाद भाजपा में 75 की जगह 70 साल की उम्र सीमा का नया फॉर्मूला लागू किया जा सकता है.

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