scorecardresearch
 

छोटे उद्योगों को आठ से नौ प्रतिशत दर पर मिल रहा बिना गारंटी वाला कर्ज

केयर रेटिंग्स की ओर से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 345 एमएसएमई इकाइयों पर एक सर्वे किया गया, जिसमें यह पता चला कि छोटे उद्योगों को कर्ज की पेशकश आठ से नौ फीसद ब्याज दर पर दिए जा रहे हैं.

प्रतीकात्मक फोटो (शेखर घोष) प्रतीकात्मक फोटो (शेखर घोष)

कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार की ओर से आत्मनिर्भर पैकेज की घोषणा की गई थी. इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों (एमएसएमई) के लिए बिना गारंटी वाले (कॉलैट्रल फ्री) कर्ज की पेशकश की गई. कर्ज किस दर पर मिलेगा यही उस समय सबसे बड़ा सवाल था.

केयर रेटिंग्स की ओर से विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 345 एमएसएमई इकाइयों पर एक सर्वे किया गया, जिसमें यह पता चला कि छोटे उद्योगों को कर्ज की पेशकश आठ से नौ फीसद ब्याज दर पर दिए जा रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उपक्रमों ने इस योजना का लाभ उठाने के लिये बैंकों से संपर्क किया है. सर्वे में शामिल इकाइयों में से 70 प्रतिशत ने बैंकों से संपर्क साधा. इनमें से अधिकांश एक करोड़ रुपए से कम का कर्ज उठाना चाहती हैं. बैंकों ने अब तक एक-तिहाई आवेदकों को कर्ज की मंजूरी दी है.

यह सर्वेक्षण 23 जून से सात जुलाई के बीच दो सप्ताह से अधिक समय में किया गया. इसमें विभिन्न क्षेत्रों के 345 एमएसएमई इकाइयों को शामिल किया गया. ये इकाइयां 25 करोड़ रुपए से कम से लेकर 100 करोड़ रुपये तक के टर्नओवर वाली हैं. कोरोना वायरस महामारी की रोकथाम के लिये देश भर में लगाये गये लॉकडाउन ने उनके कारोबार को बुरी तरह से प्रभावित किया है.

एजेंसी ने अपने वक्तव्य में कहा, ‘‘आधे से अधिक इकाइयों ने बैंकों से कर्ज की किस्तें चुकाने में दी गयी राहत की सुविधा का लाभ उठाया है. करीब 27 प्रतिशत एमएसएमई ने इस सुविधा का लाभ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) से उठाया है.’’

सर्वे में यह भी बात साफ हुई की मौजूदा समय में एमएसएमई इकाइयों के सामने मुख्य चुतौतियां मांग में गिरावट, नकदी प्रवाह (कैश फ्लो) का टूटना, वित्त, श्रम की कमी, लॉजिस्टिक की कमी और बढ़ती देनदारियां हैं.

सर्वे में शामिल इकाइयों के एक तिहाई को पिछले तीन महीनों में 50 प्रतिशत से अधिक के राजस्व नुक्सान का सामना करना पड़ा है. इसके साथ ही, उनमें से 60 प्रतिशत से अधिक अपने कर्मचारियों को पूरा वेतन देने में असमर्थ रहे हैं. हालांकि, केवल एक चौथाई ने अपने कर्मचारियों को हटाया है.

लगभग 65 प्रतिशत प्रतिभागियों को उम्मीद है कि उनके व्यवसाय को सामान्य होने में 12 महीने से अधिक समय लगेगा, जबकि आधे लोगों को उम्मीद है कि अगले 6 महीनों में उनकी व्यावसायिक स्थिति में सुधार होगा.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें