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सदी के पहले सुपरसाइक्लोन अंफन से बेअसर रहेगा मॉनसून, दो दिन पहले पहुंचेगा केरल

आशंका थी कि चक्रवात अंफन की वजह से मॉनसून में देर होगी, पर वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून अपनी रफ्तार पर है और वह केरल तट पर अपने सामान्य तय तारीख 1 जून से दो दिन पहले यानी 28 मई को आएगा. उधर, अंफन सदी के पहले सुपर साइक्लोन में बदल गया है

फोटो सौजन्यः स्काइमेट फोटो सौजन्यः स्काइमेट

भले ही अंफन चक्रवात सदी के पहले सुपर साइक्लोन में बदल गया हो और इससे भारत के पूर्वी तटीय राज्यों में भीषण बरसात और तूफानी हवाएं चलें, पर इसका फर्क मॉनसून की रफ्तार पर नहीं पड़ेगा. हालांकि, कुछ मौसम वैज्ञानिकों ने मॉनसून के आगमन में 4 दिन के देरी के अंदेशे जताए थे, पर मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली निजी एजेंसी स्काइमेट के वैज्ञानिकों का कहना है कि मॉनसून अपनी रफ्तार पर है और वह केरल तट पर अपने सामान्य तय तारीख 1 जून से दो दिन पहले यानी 28 मई को ही आएगा.

स्काइमेट के प्रबंध निदेशक जतिन सिंह के मुताबिक, "दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अंडमान सागर और आसपास के इलाकों में अपने समय से 5 दिन पहले पहुंच चुका है. इसको केरल के तट पर पहुंचने में अमूमन 10 दिन और लगते हैं. हालांकि, अंडमान सागर और केरल में मॉनसून के आगमन का देश के बाकी हिस्सों में आने से संबंध नहीं है."

असल में, भारत के मुख्य भू-भाग पहुंचने से पहले ही मॉनसून अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, अंडमान सागर और दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में आता है. भारत में मॉनसून के आगमन को केरल पहुंचने की तारीख के रूप में ही माना जाता है. केरल में मॉनसून के आगाज के साथ ही देश के बाकी हिस्सों में पर भी इसका इंतज़ार शुरू हो जाता है.

अंफन के सुपर साइक्लोन में बदलने से ऐसा अंदेशा जताया जा रहा था कि भारतीय सागरों की नमी के खिंच जाने से मॉनसून 4 दिन देर से केरल तट पहुंचेगा.

लेकिन स्काइमेट के वाइस प्रेसिडेंट महेश पालावत साफ करते हैं, "अंफन का असर मॉनसून पर पड़े, इसका अंदेशा बहुत कम है. क्योंकि यह चक्रवातीय सिस्टम 21 मई को खत्म हो जाएगा और इसके बाद भी मॉनसून के लिए 9 दिन का समय बचेगा. क्रॉस इक्वेटोरियल फ्लो की शुरुआत हो गई है इससे हमें उम्मीद है कि दक्षिण-पश्चिम मॉनसून समय पर ही आएगा."

इस बीच बंगाल की खाड़ी में उम्मीद के अनुसार 17 मई को आने के बाद मॉनसून अनुकूल स्थिति में आगे बढ़ रहा है.

सुपर साइक्लोन अंपन के उत्तरी दिशा में बढ़ने के साथ खाड़ी में स्थितियां मॉनसून के अनुकूल हैं. पिछले 24 घंटों के दौरान इसमें कुछ और प्रगति दिखी है तथा यह अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के कुछ और हिस्सों में पहुंच गया.

स्काइमेट के मुताबिक, "मॉनसून-2020 का बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी भागों और इससे सटे अंडमान सागर तथा अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह पर मॉनसून का आगमन 17 मई को हो गया. मॉनसून की उत्तरी सीमा एक तरफ 5 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 85 डिग्री पूर्वी देशांतर से तो दूसरी ओर 11 डिग्री उत्तरी अक्षांश तथा 95 डिग्री पूर्वी देशांतर से होकर गुजर रही है."

स्काइमेट का आकलन है कि अगले 24 से 48 घंटों के बीच दक्षिण-पश्चिम मॉनसून बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी भागों से थोड़ा और आगे बढ़ेगा और दक्षिण मध्य भागों तक पहुंचेगा. इन क्षेत्रों पर मॉनसून के आगमन की सामान्य तारीख पहले 20 मई थी, जिसे इसी वर्ष भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) ने संशोधित कर दो दिन आगे 22 मई कर दिया है. यानी, मॉनसून सामान्य समय से तकरीबन 5 दिन पहले अंडमान और निकोबार पहुंचा है.

इसके पहले स्काइमेट ने अनुमान जारी किया था कि मॉनसून 2020 का आगमन समय से पहले होने वाला है. स्काइमेट के अनुसार केरल में 1 जून के बजाय 28 मई को इस बार मॉनसून का आगमन हो सकता है. इसी तरह से आने वाले समय में श्रीलंका को पार करते हुए केरल के दक्षिणी भागों पर भी मॉनसून का आगमन 1 जून की बजाय 3 दिन पहले 28 मई को हो सकता है.

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