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म्यूचुअल फंड: बढ़े निवेशक घटा निवेश

कोविड-19 के कारण अधिकांश नौकरीपेशा लोगों और व्यवसायियों की आय प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर उनकी बचत और निवेश पर पड़ा है. म्यूचुअल फंड में सुस्त पड़ी निवेश की रफ्तार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

गाजियाबाद में रहने वाले 30 वर्षीय मुकुल अपने वित्तीय सलाहकार से इस बात पर रायशुमारी कर रहे हैं कि कर्ज की किश्त पर मॉरेटोरियम लेना ठीक रहेगा या सिप के जरिए चल रहे म्यूचुअल फंड निवेश को रोक देने में होशियारी है? दोनो का चल पाना अब मुश्किल है, क्योंकि दिल्ली की जिस इलेक्ट्रॉनिक कंपनी में वे कार्यरत हैं, वहां लॉकडाउन की झोंक रोकने के लिए कर्मचारियों की तनख्वाह 40 फीसद तक काट दी गई है. आय दोबारा कब कोविड से पहले वाले स्तर पर पहुंचेगी इसका कोई सटीक अनुमान नहीं, ऐसे में मुकुल ने कर्ज को चुकाते रहने और सिप को बंद कर देने का निर्णय लिया.

मुकुल अकेले नहीं हैं कोविड-19 के कारण बुरी तरह प्रभावित हुईं आर्थिक गतिविधियों के चलते अधिकांश नौकरीपेशा लोगों और व्यवसायियों की आय प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर उनकी बचत और निवेश पर पड़ा है. म्यूचुअल फंड में सुस्त पड़ी निवेश की रफ्तार इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है. जून में इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड 241 करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश हुआ, जो मई महीने में 5,257 करोड़ रुपए का था. इतनी बड़ी गिरावट की वजह निवेशकों की ओर से की गई बड़ी बिकवाली थी. जून में निवेशकों ने इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में कुल 13,761 करोड़ रुपए की खरीदारी की, वहीं 13,520 करोड़ रुपए की बिकवाली की गई.

मोतीलाल ओसवाल एएमसी के एमडी ऐंड सीईओ आशीष पी सोमैया कहते हैं, "कोविड-19 के चलते भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली, जिसमें तमाम निवेशकों के फंड की वैल्यू उनकी ओर से निवेशित रकम से भी नीचे आ गई. इसके बाद बाजार ने बीते दो महीनों में निचले स्तर से शानदार वापसी की. इस तेजी में म्यूचुअल फंड्स की एनएवी में सुधार हुआ और बड़ी संख्या में निवेशकों ने अपना पैसा बाजार से वापस निकाल लिया.’’ इसके पीछे मुख्य वजह लोगों की आय का टूटना और मौजूदा समय में अर्थव्यवस्था और बाजार में भरोसे की कमी है. सोमैया कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि इक्विटी म्यूचुअल फंड में खरीदारी कम हुई है, लेकिन रिडम्प्शन प्रेशर इतना ज्यादा है कि शुद्ध निवेश का आंकड़ा छोटा दिख रहा. विभिन्न स्कीमों में की गई कुल खरीदारी में से कुल बिकवाली को घटा देने के बाद शुद्ध खरीदारी या बिकवाली का आंकड़ा मिलता है.

म्यूचुअल फंड्स से पैसा निकालने का यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है. इसका संकेत शेयर बाजार में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआइआइ) की ओर से शेयर बाजार में जारी बिकवाली से मिलता है. 15 जुलाई तक डीआइआइ की ओर से शेयर बाजार में 2,715 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की जा चुकी है.

सिप बढ़ीं लेकिन निवेश घटा

जून में कुल 323.48 लाख सिप लेन-देन में थे, जो मई में 320.49 लाख और अप्रैल में 314.07 लाख थे. लेकिन सिप के लेन-देन बढ़ने के बाद भी इसके जरिए आने वाला निवेश घट गया. विभिन्न म्यूचुअल फंड स्कीम में सिप के जरिए जून में कुल 7,917 करोड़ रुपये का निवेश हुआ जो मई में 8,123 करोड़ रुपये का था. सिप बढ़ने और निवेश घटने के गणित को समझाते हुए सर्टिफाइड फाइनेंनशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी कहते है, "इसकी दो बड़ी वजह हो सकती हैं. पहली बाजार में आई तेज गिरावट में बड़े निवेशकों ने म्यूचुअल फंड से पैसा निकालकर सीधे बाजार में निवेश किया हो. इसके अलावा दूसरी वजह नए निवेशकों की ओर से छोटी रकम की सिप शुरू करना. प्रति सिप औसत निवेश जून में 2,447 रुपये रहा, जो मई में 2,535 रुपये और अप्रैल में 2,667 रुपये था."

नए रजिस्ट्रेशन की हल्की पड़ी रफ्तार

जून में सिप के लिए कुल 9.13 लाख नए रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि 6.58 लाख खाते रद्द हुए. इस हिसाब से शुद्ध 2.55 लाख खाते नए खुले. अप्रैल में यह संख्या 2.1 लाख और मई में 1.56 लाख रही थी. जबकि साल 2019-20 में हर माह औसतन 4.14 लाख खाते खुले. नोमुरा की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सिप के जरिए निवेश में गिरावट आई है. जून महीने में कुल निवेश 79.3 अरब रुपए रहा, जो मार्च 2020 की ऊंचाई से 8 प्रतिशत नीचे है. नए रजिस्ट्रेशन में गिरावट इस बात का संकेत है कि आय टूटने का सीधा असर लोगों की बचत और निवेश पर पड़ा है.

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