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चीन से आयातित वस्तुओं को मिली मंजूरी, उद्योगों को राहत

चीन से आयात पर निर्भर विभिन्न उद्योगों के लिए राहत की खबर है. सरकार ने कस्टम को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी आयात जिनके बिल ऑफ एंट्री 30 जून की मध्यरात्रि तक दाखिल किए जा चुके हैं उन्हें क्लीरेंस दे दी जाए.

चीन से आयातित वस्तुएं बंदरगाहों पर फंसी हुई थीं (फोटो: रॉयटर्स/प्रतीकात्मक फोटो) चीन से आयातित वस्तुएं बंदरगाहों पर फंसी हुई थीं (फोटो: रॉयटर्स/प्रतीकात्मक फोटो)

चीन से आयात पर निर्भर विभिन्न उद्योगों के लिए राहत की खबर है. सरकार की ओर से कस्टम को यह निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे सभी आयात जिनके बिल ऑफ एंट्री 30 जून की मध्यरात्रि तक दाखिल किए जा चुके हैं उन्हें क्लीरेंस दे दी जाए. इस बावत एमएसएमई मंत्री ने वित्त मंत्री से अपील कर पोर्ट पर फंसे माल को रिलीज करने को कहा. इसके बाद आयात के सुचारू होने की उम्मीद है. हालांकि एक जुलाई के बाद के कंसाइंनमेंट के लिए भौतिक निरीक्षण जारी रखने को कहा गया है. सीमा पर तनाव के बाद चीन से आयातित वस्तुओं को पोर्ट पर रोकने का असर भारत के कई बाजारों में उभरने लगा.

ऐसा माना जा सकता है कि सरकार का फैसला खुद को ही ज्यादा नुक्सान पहुंचाने लगा. चीन से आयात पर निर्भर बाजार में बढ़ती बेचैनी इसका प्रमाण है. अब सिकंदराबाद इंडस्ट्रियल एरिया को ले लीजिए. यहां 40 से ज्यादा कीटनाशक दवाईयां बनाने वाली कंपनी हैं. इनकी निर्भरता कच्चे माल (टेक्निकल) के लिए चीन पर है. पहले कोरोना और अब पोर्ट से क्लीरेंस न हो पाने की वजह से कच्चे माल की शॉर्टेज है. यही कारण है कि बीते दो महीनों में कच्चे माल के भाव तेजी से बढ़े और मैन्युफैक्चरर्स हफ्ते भर बाद क्या भाव होंगे इस पर कुछ कहते डर रहे हैं. सामान्य दिनों में दिए गए भाव 90 दिनों तक मान्य होते हैं. यहां के एक बड़ी मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “जुलाई-अगस्त का महीना पीक सीजन होता है क्योंकि धान की बुआई शुरू हो जाती है. ऐसे में अगर समय रहते आयात सुचारू नहीं हुआ तो कीटनाशक के दाम कहां पहुंचेंगे इसका कोई अनुमान नहीं लगाया जा सकता.’’

दिल्ली में देश के सबसे बड़े कम्प्यूटर बाजार का हाल भी सिकंदराबाद से बहुत जुदा नहीं है. बाजार जाकर पता चला कि इन दिनों यहां बेव कैमरा, हार्ड डिस्क, हेडफोन जैसे विभिन्न उत्पादों की शॉर्टेज है. साथ ही कई ब्रांडेड प्रोडक्ट की कीमतें भी बीते छह महीनों में 20 से 40 फीसद तक बढ़ गई हैं. छोटी-छोटी चीजों का आयात चीन से सुचारू न होने पर महंगाई बढ़ने का खतरा है. ऑल दिल्ली कम्प्यूटर ट्रेडर्स एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी स्वर्ण सिंह कहते हैं, “पहले कोरोना की वजह से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई और अब सीमा पर तनाव के बाद से आयात हुए माल की क्लिरेंस में दिक्कत आ रहीं हैं. यही कारण ही कई प्रोक्ट्स की मार्केट में शॉर्टेज है.’’ वे बताते हैं, "अभी तो चार दिन ही हुए हैं अगर हालात नहीं सुधरे तो कीमतें और भी बढ़ेंगी."

ऑटो कलपुर्जा उद्योग की संस्थाओं सियाम और एसीएमए ने भी चीन से आने वाली आयात खेप के भौतिक निरीक्षण पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसी वस्तुओं की निकासी में देरी से देश भर में वाहन विनिर्माण बाधित हो सकता है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (सियाम) के अध्यक्ष राजन वढेरा ने एक बयान में कहा, ‘‘बंदरगाहों पर माल की अधिकता के कारण निकासी में असामान्य देरी से भारत में वाहनों के विनिर्माण पर असर पड़ सकता है.’’

उद्योग संस्था सीईएएमए के मुताबिक, भारत में बिकने वाले लगभग 95 प्रतिशत उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक और उपकरण स्थानीय स्तर पर ही बनते हैं, लेकिन इनके कलपुर्जों के लिए चीन पर 25 से लेकर 70 प्रतिशत तक निर्भरता अभी बरकरार है, जिसे रातोरात खत्म करना कठिन है.

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