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कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग के फैसले से मिलेगी कितनी राहत?

रिजर्व बैंक ने सिर्फ उन्हीं कर्जदारों के लोन को रिस्ट्रक्चर करने की अनुमति दी है, जिनका 1 मार्च, 2020 की स्थिति में 30 दिन से ज्यादा का डिफॉल्ट नहीं था.

आरबीआइ के गवर्नर शक्तिकांत दास (एएनआइ) आरबीआइ के गवर्नर शक्तिकांत दास (एएनआइ)

बीते छह माह से अपने व्यक्तिगत कर्ज की किस्त टाल रहे 35 वर्षीय मयंक गुरुवार (6 अगस्त) को मौद्रिक पॉलिसी समीक्षा में मॉरेटोरियम से जुड़े अगले फैसले का इंतजार कर रहे थे. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने मौद्रिक नीति समिति की बैठक के निष्कर्षों की जानकारी देते हुए इस बावत यह कहा कि बैंक एक बार कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और पर्सनल लोन को पुनर्गठन (रिस्ट्रक्चरिंग) कर सकते हैं. रिस्ट्रक्चरिंग माने क्या? इस सवाल के जवाब के लिए वह बैंकिंग एक्सपर्ट अरविंद मिश्रा को फोन लगाते हैं, जो 35 वर्ष से ज्यादा एक सरकारी बैंक में नौकरी करके वरिष्ठ प्रबंधक के पद से हाल में ही रिटायर हुए हैं.

• रिस्ट्रक्चरिंग का क्या मतलब है?

रिस्ट्रक्चरिंग का मतलब यह है कि अगर आप अपने कर्ज की अदायगी में मॉरेटोरियम की सीमा खत्म होने के बाद भी असमर्थ हैं तो अपने बैंक में जाकर कर्ज वापसी में सहुलियत दी जाने की अर्जी दे सकते हैं. बैंक अधिकारी अगर आपकी बातों से मुतमईन हुआ तो कई तरह से आपको ये सहुलियतें मिल सकती हैं.

• मॉरेटोरियम और लोन रिस्ट्रक्चरिंग में क्या अंतर है?

मॉरेटोरिम की अवधि के ब्याज को बैंक मूलधन में जोड़ देता है. मोहलत की अवधि खत्म होने के बाद ग्राहक को पूरा पैसा चुकाना होता है. रिस्ट्रक्चरिंग की स्थिति में बैंक पर ज्यादा अधिकार हैं. वह ग्राहक की वित्तीय स्थिति, पिछले रिकॉर्ड जैसे कारकों के आधार पर यह तय कर सकते हैं कि कर्जदार को राहत किस तरह दी जाए.

• बैंक अधिकारी क्या पूछेंगे?

वे यह जानना चाहेंगे कि क्या वाकई कोविड-19 के कारण प्रभावित हुई आर्थिक गतिविधियों ने आपकी आय को प्रभावित किया है. अगर हां तो अब आप अपने कर्ज की अदायगी करने के लिए किस तरह की सहूलियतें चाहते हैं? उदाहरण से समझिए अगर आपने कोई पर्सनल लोन 5 साल के लिए लिया था, तीन साल की अदायगी हो चुकी है. अब आप चाहते हैं कि किस्त कम हो जाए क्योंकि आपकी सैलरी कट गई है. तो आप इस लोन की अवधि को तीन से बढ़ाकर पांच साल कर देना जिससे समयावधि बढ़ जाएगी लेकिन किस्त की राशि कम हो जाएगी. ऐसी स्थिति में बैंक नया खाता खोलेगा और पिछले में पूरे भुगतान की एंट्री कर देगा. लेकिन यह सब होगा तभी जब आप कर्ज अदायगी का कोई ठोस प्लान बैंक के समक्ष रखेंगे.

• सहूलियत और किस तरह मिल सकती है?

मान लीजिए कोई कारोबारी कोविड-19 के कारण प्रभावित हुए व्यापार को पटरी पर लाने के लिए कुछ नए लोन की मांग करता है, जिससे वह पिछला लोन भी चुका सके. तो बैंक उसे कुछ नया कर्ज देकर पुराने लोन की अदायगी भी सुनिश्चित कर लेना. हालांकि इसके लिए वह कुछ नकद भुगतान की शर्त रख सकता है. सामान्य तौर पर खाता 90 दिन बाद एऩपीए (डूबे कर्ज) की श्रेणी में चला जाता है. रिस्ट्रक्चरिंग में नया लोन दिखाकर एनपीए के मोर्चे पर कुछ राहत मिल जाती है.

• रिस्ट्रक्चरिंग से बैंक को क्या फायदा होगा?

बैंक अपने अच्छे ग्राहकों को छोड़ना कभी नहीं चाहती. अगर वाकई किसी स्वाभाविक दिक्कत के कारण वह कर्ज की अदायगी नहीं कर पा रहा तो बैंक उसके कर्ज का पुर्नगठन करके उसकी मदद करते हैं, जिससे वह परिस्थितिवश डिफॉल्टर बनने पर मजबूर न हो.

• रिस्ट्रक्चरिंग का मौका सबको मिलेगा?

नहीं, रिजर्व बैंक ने सिर्फ उन्हीं कर्जदारों के लोन को रिस्ट्रक्चरिंग करने की अनुमति दी है, जिनका 1 मार्च, 2020 की स्थिति में 30 दिन से ज्यादा का डिफॉल्ट नहीं था. यानी जिन पर कोविड-19 के कारण लगे लॉकडाउन का सीधा असर हुआ है. इससे पुराने डिफॉल्टर इस स्कीम में एडजस्ट नहीं हो सकेंगे. बैंकों को रिस्ट्रक्चरिंग के बाद बचे कर्ज पर अतिरिक्त प्रावधान करने होंगे.

• छोटे उद्योग और कॉर्पोरेट्स का क्या होगा?

आरबीआइ ने छोटे उद्योगों को भी वन-टाइम रिस्ट्रक्चरिंग की अनुमति दी है. यह स्कीम 25 करोड़ रुपए तक के बकाया कर्ज वाले एमएसएमई के लिए उपलब्ध होगी. इनकी रिस्ट्रक्चरिंग 31 मार्च 2021 तक करनी होगी. वहीं बड़े कॉर्पोरेट्स के लिए के. वी. काथम के नेतृत्व में समिति बनाई है. यह रिजॉल्युशन प्लान के लिए सेक्टर विशेष के मापदंड तय करेगी. 1,500 करोड़ रुपए या उससे ज्यादा के कर्ज पर रिजॉल्युशन प्लान भी समिति तय करेगी. बैंक 31 दिसंबर, 2020 तक रिजॉल्युशन प्लान लागू कर सकते हैं. कोई कर्जदार बैंक के पास आवेदन करता है तो बैंकों को उस पर 180 दिन में समाधान प्रस्तुत करना होगा. इन दोनों ही स्थितियों में बैंकों को प्रावधान करने होंगे.

कुछ जरूरी बातें..

1. बैंक कॉर्पोरेट्स और छोटे उद्योगों से लॉकडाउन के दौरान का कैश फ्लो स्टेटमेंट मांग सकते हैं.

2. रिस्ट्रक्चर प्लान मंजूर करने के लिए बैंक लोन एकाउंट में एकमुश्त राशि जमा करने को बोल सकते हैं.

3. रिस्ट्रक्चरिंग के बाद भी अगर कोई खाता डिफॉल्ट होता है तो यह बैंक के प्रबंधन की जिम्मेदारी बन जाती है तो कई बार प्रबंधन जोखिम वाले रिस्ट्रचरिंग से बचते हैं.

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