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LIC का विनिवेश अंतिम तिमाही तक, एयर इंडिया से 15,000 करोड़ रु. मिलने की उम्मीद

सरकारी संपत्तियों का निजीकरण और विनिवेश ही दरअसल बजट 2021 के केंद्र में है. हालांकि विनिवेश इतना आसान नहीं होगा.

सरकार अंतिम तिमाही में एलआइसी के विनिवेश की योजना बना रही है सरकार अंतिम तिमाही में एलआइसी के विनिवेश की योजना बना रही है
स्टोरी हाइलाइट्स
  • वित्त वर्ष 2022 के लिए सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य रखा है
  • एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया, जिस पर पिछले वित्त वर्ष में कुल 38,366 करोड़ रुपए का कर्ज था, प्रगति के रास्ते पर है
  • विनिवेश लक्ष्य का बड़ा हिस्सा एलआइसी से ही पूरा होने की उम्मीद है

वित्त वर्ष 2022 के लिए सरकार ने 1.75 लाख करोड़ रुपए के विनिवेश का लक्ष्य रखा है. राजकोषीय घाटा एक सीमा से अधिक न बढ़ जाए इसके लिए विनिवेश के लक्ष्य को हासिल करना जरूरी है. फिच और मूडीज जैसी वैश्विक रेटिंग एजेंसियां राजकोषीय घाटे के बढ़ने की आशंका जता चुकी हैं. सरकारी संपत्तियों का निजीकरण और विनिवेश ही दरअसल बजट 2021 के केंद्र में है. हालांकि विनिवेश इतना आसान नहीं होगा. बजट में घोषणा के बाद ही मजदूर संगठन और सरकारी कर्मचारियों का देशव्यापी प्रदर्शन इसका साफ और सीधा संकेत है. फिलहाल सरकार निजीकरण के मोर्चे पर आगे बढ़ती दिख रही है. सरकार वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एयर इंडिया और अंतिम तिमाही में एलआइसी के विनिवेश की योजना बना रही है.

एयर इंडिया से 15,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद

एयर इंडिया की विनिवेश प्रक्रिया, जिस पर पिछले वित्त वर्ष में कुल 38,366 करोड़ रुपए का कर्ज था, प्रगति के रास्ते पर है. एयर इंडिया का विनिवेश वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में ही होने की संभावना है. एयर इंडिया की बिक्री से सरकार को करीब 15,000 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 3 फरवरी को यह स्पष्ट किया कि एयर इंडिया को बेचने की प्रक्रिया में कर्मचारियों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा. पुरी ने राज्यसभा को एक लिखित उत्तर में कहा, ‘‘एयर इंडिया के कर्मचारियों के हित को वित्त मंत्रालय के निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग के मार्गदर्शन के अनुसार सुरक्षित किया जाएगा और इस बात को विनिवेश के बाद नये मालिक के साथ हस्ताक्षरित किए जाने वाले शेयर खरीद समझौते में परिलक्षित किया जाएगा.’’ गौरतलब है कि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस में सरकार के 100 प्रतिशत हिस्सेदारी और एयर इंडिया एक्सप्रेस में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी रणनीतिक विनिवेश हेतु अभिरुचि पत्र आमंत्रित करने के लिए 27 जनवरी, 2020 को प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआइएम) जारी किया गया था. कोरोनोवायरस महामारी के मद्देनजर, अभिरुचि पत्र (ईओआई) की समय सीमा को समय-समय पर बढ़ाया गया था और अंतिम तिथि 14 दिसंबर, 2020 थी.

एलआइसी का विनिवेश चौथी तिमाही तक संभव

विनिवेश लक्ष्य का बड़ा हिस्सा इसी बिक्री से आने की उम्मीद है. एलआइसी के विनिवेश का ऐलान वित्त वर्ष 2021 में भी किया गया था लेकिन कोरोना महामारी के चलते यह संभव नहीं हो सका. अब सरकार को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2022 की चौथी तिमाही तक एलआइसी का विनिवेश कर लिया जाएगा. आर्थिक मामलों से जुड़े विभाग के सचिव तरूण बजाज के मुताबिक, एलआइसी का आइपीओ अगले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में आ सकता है. सरकार ने इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिये जीवन बीमा निगम कानून 1956 में संशोधन का प्रस्ताव किया है.

बजाज ने कहा, ‘‘अगले वित्त वर्ष की संभवत: तीसरी या चौथी तिमाही में आइपीओ आ सकता है. यह इस बात पर निर्भर करता है कि कितनी जल्दी मूल्यांकन सामने आता है.’’ गौरतलब है कि सरकार की एलआइसी में 100 प्रतिशत हिस्सेदारी है. लगभग 8 से 10 लाख करोड़ रुपए के मूल्यांकन के अनुमान के साथ इसके सूचीबद्ध होने पर बाजार पूंजीकरण के लिहाज से यह संभवत: देश की सबसे बड़ी कंपनी होगी. निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) पहले ही एलआइसी का मूल्यांकन करने के लिये कंपनी मिलीमैन एडवाजर्स का चयन कर चुकी है, जबकि डेलॉयट और एसबीआई कैप को ‘प्री-आइपीओ’ सौदा सलाहकर नियुक्त किया गया है.

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