scorecardresearch
 

आरएसएस में संगठनात्मक फेरबदल के आसार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सर्वोच्च निर्णायक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार से बंगलूरू में शुरू हो गई है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले संघ की महत्वपूर्ण बैठक
  • बंगलूरू में दो दिवसीय प्रतिनिधि सभा की बैठक आज से
  • आनुषांगिक संगठनों में आयु सीमा तय करने पर हो सकता है जोर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सर्वोच्च निर्णायक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक शुक्रवार से बंगलूरू में शुरू हो गई है. बैठक में नए सरकार्यवाह (महासचिव) चुनने का फैसला शनिवार को हो सकता है. मौजूदा सरकार्यवाह भैयाजी जोशी की जगह सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले को यह जिम्मेदारी मिल सकती है. भैयाजी जोशी पिछले 12 साल से सरकार्यवाह की जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

कोरोना की वजह से अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक इस बार नागपुर की जगह बंगलूरू में हो रही है. अमूमन इस महत्वपूर्ण बैठक में लगभग 1,500 लोग शामिल होते हैं लेकिन इस बार सिर्फ 450 लोग ही बैठक में शामिल होंगे. संघ प्रवक्ता प्रोफेसर अरुण कुमार ने बताया है कि बैठक में आनुषांगिक संगठनों के प्रमुख शामिल होंगे. कोविड की वजह से पिछले साल प्रतिनिधि सभा की बैठक नहीं हुई थी. बैठक में संघ के भावी कार्यक्रमों की रूपरेखा पर भी चर्चा होगी. अरुण कुमार ने बताया कि संघ की तरफ से जारी सामाजिक कार्यों को और विस्तार देने की योजना पर चर्चा होगी और अयोध्या में बन रहे राम मंदिर को लेकर भी विमर्श किया जाएगा.

सूत्रों का कहना है कि इस बैठक में संघ यह बड़ा निर्णय ले सकता है कि इसके आनुषांगिक संगठनों में आयुसीमा (75 साल) का निर्धारण सुनिश्चित कैसे किया जाए. साथ ही दूसरे राजनीतिक संगठनों और संस्थाओं की तरफ से संघ परिवार में शामिल होने वाले लोगों के लिए क्या मानदंड स्थापित किए जाए, इसको लेकर भी चर्चा हो सकती है. विदित हो कि पश्चिम  बंगाल में टीएमसी और अन्य दलों से बड़ी संख्या में शामिल होने वाले लोगों को ज्यादा प्रमुखता दिए जाने को लेकर भाजपा और संघ के मूल कॉडर में नाराजगी है. इसे देखते हुए संघ एक ऐसी व्यवस्था चाहता है ताकि अन्य जगहों से आने वाले लोगों को लेकर आनुषांगिक संगठनों में असंतोष की गुंजाईश कम हो.

यदि आयुसीमा को लेकर संघ कोई निर्णय लेता है या कोई मैकेनिज्म तय करता है तो इसका सबसे ज्यादा असर भाजपा पड़ेगा. 2024 के लोकसभा चुनाव तक भाजपा के कई नेता 75 साल की आयुसीमा के दायरे में आ जाएंगे. इसलिए उम्रदराज नेताओं को सक्रिय राजनीति से अलग रखने के हालात बन सकते हैं. अभी भी कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा 75 साल से अधिक आयु के हैं. ऐसे में वहां भी परिवर्तन की संभावना बन सकती है. चूंकि अगले साल उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा, उत्तराखंड जैसे राज्यों में विधानसभा के चुनाव हैं, इसलिए इन राज्यों में संगठन और सरकार में युवाओं को तरजीह देना और उम्रदराज नेताओं से पार पाना भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती है. अगले साल ही राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के भी चुनाव होने हैं इसलिए संघ की यह बैठक काफी महत्वपूर्ण है.

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें