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उत्तर प्रदेशः छोटी सरयू को फिर से जिंदा करने के लिए तेज हो रहा अभियान

मूल सरयू या छोटी सरयू को बचाने के लिए लोगों के आंदोलन के बाद आजमगढ़ में प्रशासन ने ली नदी की सुध

छोटी सरयू छोटी सरयू

मंजीत ठाकुर

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में छोटी या मूल सरयू कही जाने वाली नदी को बचाने का अभियान अब जोर पकड़ता जा रहा है. हाल ही में, लोक दायित्व द्वारा चलाया जा रहा छोटी सरयू बचाओ अभियान के संयोजक पवन कुमार सिंह के साथ जिला प्रशासन की तरफ से बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार ने छोटी सरयू के उद्गम स्थल कमहरिया माझा पहुंचकर उसका निरीक्षण किया. इस अभियान में विभाग के भी अन्य लोग और जनता भी शामिल थी.

आजमगढ़ की नदियों पर काम कर रहे और गैर-सरकारी संस्था लोक दायित्व के संयोजक पवन कुमार सिंह ने 2018 में छोटी सरयू को मूल सरयू का नाम देकर इसको बचाने के लिए अभियान प्रारम्भ किया. उनका कहना है कि छोटी सरयू ही मूल सरयू है.

बहरहाल, जन आंदोलन का शक्ल ले रही नदी बचाने की कोशिश में अब प्रशासन भी साथ आ रहा है. इस सर्वेक्षण में इस नदी को पुनर्जीवित करने और सदानीरा बनाने की संभावनाएं तलाशी गईं. 
इस अभियान में जहां स्थानीय लोग हरसंभव सहयोग करने का भरोसा दे रहे हैं तो वहीं बुजुर्गों को बचपन के दिनों में यहा बहने वाली नदी के फिर से जीवित होने का उत्साह दिख रहा है.

इस सर्वे में प्रथम दृष्टया मूल सरयू सराय अहंकार होते हुए मुबारकपुर पिकार के रास्ते बंधे तक प्रवाहित दिखीं, आगे 1955 में बने महुला गढ़वल बांध के निर्माण से उनका मार्ग अवरूद्ध हो गया है, जिसके कारण यह एक स्पिल के रूप में बंधे के किनारे-किनारे होकर बह रही हैं.

अतीत में लाखों लोगों को लाभ पहुंचाने वाली, हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई करने वाली, जीव-जंतुओं एवं पशुओं की प्यास बुझाने वाली, जलीय जीवों को आश्रय देने वाली नदी आज एक छोटी-सी स्पिल के रूप में बंधे के लिए भी खतरा बन गई है.

अभियान के संयोजक पवन सिंह कहते हैं, “यह विभाग द्वारा अदूरदर्शी सोच की तहत मूल सरयू के मार्ग को बाधित करते हुए बनाए गए बंधे का ही दुष्परिणाम है. इस मार्ग के रुकने का दुष्परिणाम यह भी हुआ कि मूल सरयू तो समाप्त होने के कगार पर आ हो गई साथ ही इससे रिचार्ज होने वाले तमाम तालाब, पोखरे, कुएं, नाले सब सूख गए या सूखने के कगार पर आ गए. नदी सूखने के कारण आज लोग वहां खेती करने लगे हैं, अवैध कब्जे हो गए हैं. कई स्थानों पर अवैध खनन के कारण मार्ग में भी बाधा उत्पन्न हो गई है.” 
सर्वे के लिए बाढ़ खंड, आजमगढ़ ने पूरे क्षेत्र का सर्वेक्षण के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. साथ ही, उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर नदी की वास्तविक स्थिति का पता लगाने की भी जांच चल रही है.

अधिशासी अभियंता दलीप कुमार कहते हैं, “इस सर्वे की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी और आगे की कार्यवाही की जाएगी.” सिंह कहते हैं, “मूल सरयू का अतीत वैभवशाली और पानीदार रहा है. आज महुला गढ़वाल बांध के कारण इसका जल स्रोत टूट गया जिससे यह विलुप्त होने के कगार पर है, हम इसे विलुप्त नहीं होने देंगे. जिस नदी का प्रवाह इस क्षेत्र के लिए अमृत पथ हो, जो प्रभु राम के आने की  साक्षी हो उसके लिए मुख्यमंत्री से मिलकर काम करना होगा. कोशिश यह रहेगी कि यह नदी बड़ी सरयू से जुड़ जाए.”

बहरहाल, 2018 तक स्थिति यह थी कि आकार में काफी हद तक सिकुड़ चुकी छोटी सरयू नदी का क्षेत्रफल लगातार सिमटता जा रहा था. (अभी यह बहुत संकरे बरसाती नाले की रूप में है) साफ-सफाई न होने से नदी का प्रवाह थम-सा गया था. आजमगढ़ के लाटघाट से शुरू हुआ 59 किलोमीटर का सफर तय करते-करते नगर की तलहटी में प्रवाहित तमसा तक आते-आते नदी का पानी काला पड़ जाता था. नदी का अस्तित्व मिटने के कगार पर पहुंच गया था पर प्रशासन मौन ही रहा.

आंबेडकर नगर जिले से निकली छोटी सरयू नदी आजमगढ के विभिन्न इलाकों से होते हुए बड़गांव ब्लाक क्षेत्र से होते हुए कोपागंज ब्लाक के सहरोज गांव के पास टौंस नदी में मिल जाती है. एक जमाना था कोपागंज ब्लॉक क्षेत्र के सिंचाई का एकमात्र साधन छोटी सरयू नदी थी. सैकड़ों गांवों के लोग पेयजल के लिए भी इसी पर निर्भर थे. अब जनता और अभियान से जुड़े लोगों के साथ प्रशासन के आगे आने से मूल सरयू के दिन बहुरेंगे, इसकी उम्मीद बढ़ गई है.

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