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आलू के जरिए किसानों की झोली भरेगी योगी सरकार

बहुराष्ट्रीय फूड एवं बेवरेज कंपनी 'पेप्सिको' उत्तर प्रदेश में 814 करोड़ रुपये के निवेश से एक नवीन (ग्रीनफील्ड) आलू चिप्स उत्पादन इकाई स्थापित करने जा रही है.

आलू किसान (प्रतीकात्मक फोटो) आलू किसान (प्रतीकात्मक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पेप्सिको यूपी में आलू चिप्स उत्पादन इकाई स्थापित करेगी
  • इस चिप्स फैक्ट्री से 1,500 लोगो को प्रत्यक्ष व परोक्ष रोज़गार मिलेगा
  • यूपी में देश में पैदा होने वाले आलू का एक तिहाई उत्पादन होता है

यूपी में आलू की खेती किसानों के लिए अब पूरी तरह फायदे का सौदा होने जा रही है. बहुराष्ट्रीय फूड एवं बेवरेज कंपनी 'पेप्सिको' प्रदेश में 814 करोड़ रुपये के निवेश से एक नवीन (ग्रीनफील्ड) आलू चिप्स उत्पादन इकाई स्थापित करने जा रही है. यह इकाई कोसी-मथुरा में राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) द्वारा उपलब्ध कराई गई करीब 35 एकड़ जमीन पर स्थापित की जाएगी. अगले वर्ष 2021 में शुरू होने वाली इस चिप्स फैक्ट्री से 1,500 लोगो को प्रत्यक्ष व परोक्ष रोज़गार मिलेगा. ऐसा पहली बार है कि पप्सिको द्वारा उत्तर प्रदेश में स्वयं एक ग्रीनफील्ड परियोजना की स्थापना की जा रही है.

आलू की फसल हमेशा से किसानो के साथ सरकार लिए चूनौतीपूर्ण रही है. कभी अधि‍क पैदावार से किसानों को इसे फसल को फेंकना पड़ता है तो कभी कम पैदावार आलू के दाम को ऊंचाई पर पहुंचा देती है. उत्तर प्रदेश देश में आलू का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है. यूपी में देश में पैदा होने वाले आलू का एक तिहाई उत्पादन होता है. पिछले साल प्रदेश में 147.77 लाख टन आलू का उत्पादन हुआ था. अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त आलोक टण्डन बताते हैं, “मंत्रिपरिषद द्वारा इस वर्ष जनवरी में पेप्सिको के निवेश प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी गई थी. राज्य सरकार ने प्रदेश में निवेशकों को हर संभव मदद की प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए 'औद्योगिक निवेश एवं रोज़गार प्रोत्साहन नीति' के अन्तर्गत 'लेटर आफ कम्फर्ट' जारी कर दिया गया था. इस परियोजना की स्थापना से न केवल राज्य में खाद्य-प्रसंस्करण उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय किसानों को भी लाभ होगा.”

यूपी में आगरा, फि‍रोजाबाद, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद, कन्नौज, अलीगढ़, हाथरस, इटावा, कानपुर, बदायुं, बरेली, इलाहाबाद, लखनऊ, बाराबंकी, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, फैजाबाद आलू का उत्पादन करने वाले प्रमुख जिले हैं. कन्नौज के एक आलू किसान रंजीत सिंह बताते हैं कि आलू पर आधारित कोई बड़ी इकाई न होने से किसानों के पास मंडी में आलू बेचने के अलावा कोई अन्य चारा नहीं रहता है. चिप्स फैक्ट्री लगने से किसानों को आलू की अच्छा दाम मिल सकेगा. इससे ज्यादा से ज्यादा संख्या में किसान आलू पैदा करने को प्रेरित होंगे. परोक्ष रूप इसका असर यह भी होगा कि किसान गन्ने की बजाय आलू की खेती को प्राथमिकता देंगे. पेप्सिको इंडिया के चेयरमैन अहमद अल शेख ने एक समाचार एजेंसी को जानकारी दी है कि यूपी में स्थापित होने वाली चिप्स फैक्ट्री में पहले 500 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित था, जिसको बढ़ाकर अब 814 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसके लिए कच्चा माल (आलू) स्थानीय स्रोतों से खरीदा जाएगा.

अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग, आलोक कुमार बताते हैं, “पेप्सिको द्वारा यूपी इन्वेस्टर्स समिट-2018 में 500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित निवेश वाली इस परियोजना की स्थापना हेतु एमओयू किया गया था तथा जुलाई 2019 में आयोजित ग्राउंड ब्रेकिंग समारोह में भूमि की व्यवस्था के साथ परियोजना का शुभारंभ हो गया था.” यहां बता दें कि पेप्सिको द्वारा उत्तर प्रदेश में 1990 से अब तक 30 वर्षों में फ्रैंचाइजी़ के माध्यम से राज्य में अनेक स्थानों पर ‘कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक्स’ एवं ‘नान-कार्बोनेटेड बेवरेज’ का उत्पादन किया जा रहा है. ये इकाइयां ग्रेटर नोएडा, कोसी, सथरिया-जौनपुर, कानपुर देहात-जैनपुर तथा हरदोई में संचालित हो रही हैं. यूपी के औद्योगिक विकास, सतीश महाना कहते हैं, “मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देशन में राज्य सरकार द्वारा 'ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस' के सुधारों को  तेजी से लागू किया गया है. इससे निवेशकों में यूपी के प्रति विश्वास बढ़ा है. पेप्सिको सहित अनेक कंपनियां सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ राज्य में निवेश कर रही हैं." महाना बताते हैं कि एमओयू ट्रैकिंग, भूमि आवंटन एवं श्रम से संबंधित सुधारों के फलस्वरूप प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल एक पारदर्शी निवेश व्यवस्था स्थापित हो रही है, इसी का परिणाम है कि पेप्सिको द्वारा अपने निवेश में वृद्धि की गई है.

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