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योगी ने विशेष सुरक्षा बल को दिया 'फ्री-हैंड'

यूपी एसएसएफ को ओडिशा और महाराष्ट्र की तर्ज पर असीमित अधिकार दिए गए हैं. यह बिना वारंट के किसी की संपत्ति व घर की तलाशी लेने के साथ ही उसे गिरफ्तार कर सकती है. ऐसी कार्यवाही में एसएसएफ के अधिकारी या सदस्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सकेगा.

पुलिस अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी पुलिस अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री योगी
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी एसएसएफ को असीमित अधिकार होंगे.
  • सुरक्षा बल के अधिकारी या सदस्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सकेगा
  • न्यायालय भी एसएसएफ के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा

कानून व्यवस्था के मोर्चे पर विरोधि‍यों की आलोचनाओं का शि‍कार हो रही उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने नव गठित विशेष सुरक्षा बल को असीमित अधि‍कार दिए हैं. 'उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल' (यूपी एसएसएफ) को बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति और वारंट के किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने का अधिकार होगा. यदि यूपी एसएसएफ को विश्वास हो जाए कि कोई अपराध किया गया है या किया जा रहा है और अपराधी भाग सकता है, हमला कर सकता है तो वह उसकी संपत्ति व घर की तलाशी लेने के साथ ही उसे गिरफ्तार कर सकती है. इसके लिए वारंट और मजिस्ट्रेट की अनुमति की जरूरत नहीं होगी. ऐसी कार्यवाही में सुरक्षा बल के अधिकारी या सदस्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं कराया जा सकेगा. न्यायालय भी विशेष सुरक्षा बल के किसी सदस्य के विरुद्ध किसी अपराध का संज्ञान नहीं लेगा. अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी ने 13 सितंबर को यूपीएसएसएफ के गठन की अधिसूचना जारी कर दी है. इसका मुख्यालय लखनऊ होगा और अपर पुलिस महानिदेशक स्तर का अधिकारी इसका मुखिया होगा. 

नाम न छापने की शर्त पर गृह विभाग के एक अधि‍कारी बताते हैं, “यूपी में महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों और व्यक्तियों की सुरक्षा पुलिस व पीएसी कर रही है जो इस कार्य के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित व कुशल नहीं है. इसे देखते हुए तथा प्रदेश की अदालतों व महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के मद्देनजर यूपी एसएसएफ के गठन का निर्णय किया गया. यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का ड्रीम प्रोजेक्ट है.”

अधिसूचना के अनुसार, उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल विधेयक 2020 को 22 अगस्त को विधानमंडल में पारित किया गया था. यह 6 अगस्त 2020 से लागू माना जाएगा. विशेष सुरक्षा बल को बहुत सारी शक्तियां दी गई हैं. बिना सरकार की इजाजत के यूपी एसएसएफ  के अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ  कोर्ट भी संज्ञान नहीं लेगा. यूपी एसएसएफ के पास इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ, जिला न्यायालयों, राज्य सरकार के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यालयों, पूजा स्थलों, मेट्रो रेल, हवाई अड्डों, बैंकों व वित्तीय संस्थाओं, औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होगी. प्राइवेट कंपनियां भी पेमेंट देकर यूपी एसएसएफ की सेवाएं ले सकेंगी. अवनीश कुमार अवस्थी बताते हैं, “महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए कुल 9,919 सुरक्षाकर्मी कार्यरत रहेंगे. विशेष सुरक्षा बल के गठन के पहले चरण में पांच बटालियन का गठन किया जाएगा. इसके लिए कुल 1,913 पदों का सृजन होगा.”

इन पांच बटालियनों के गठन में यूपी सरकार कुल 1,747 करोड़ रुपए खर्च करेगी जिसमें कर्मचारियों के वेतन भत्ते और अन्य सुविधाएं शामिल हैं. पहले चरण में इस विशेष सुरक्षा बल के संचालन में पीएसी का भी सहयोग लिया जाएगा. अवनीश कुमार अवस्थी बताते हैं, “इस विशेष सुरक्षा बल को विशि‍ष्ट अधि‍कार देने के लिए अलग से नियमावली बनाई जाएगी. बल के सभी सदस्यों का वेतन और पारिश्रमिक तय करने का अधि‍कार राज्य सरकार का होगा. बल के अधीनस्थ अधि‍कारियों और सदस्यों की भर्ती ‘उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड द्वारा राज्य सरकार के कार्मिक विभाग की नियमावली के अनुसार की जाएगी.” वे यह भी कहते हैं, “देश में ओडिशा और महाराष्ट्र में स्पेशल सिक्युरिटी फोर्स का गठन पहले ही हो चुका है. यूपी एसएसएफ का गठन कोई पहली घटना नहीं है.”

'उत्तर प्रदेश विशेष सुरक्षा बल विधेयक-2020' के तहत गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को पुलिस के अधिकारी या उनकी अनुपस्थिति में नजदीकी पुलिस थाने में रिपोर्ट के साथ ले जाना होगा. बल के प्रत्येक सदस्य को सदैव ड्यूटी पर माना जाएगा. उन्हें राज्य के भीतर किसी भी स्थान पर नियोजित किया जा सकता है. अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश कुमार अवस्थी ने पुलिस महानिदेशक हितेश चंद्र अवस्थी को विशेष सुरक्षा बल के गठन से जुड़े अधि‍नियम की प्रति भेजकर बल के गठन के बारे में तीन दिन में रोडमैप और पदों के सृजन का प्रस्ताव सात दिन में उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है. पुलिस मुख्यालय को अधि‍नियम के उपबंधों को लागू करने के लिए नियमावली का प्रस्ताव 15 दिन के भीतर गृह विभाग को उपलब्ध कराने को कहा गया है. तीन महीने के भीतर इस विशेष सुरक्षा बल के पहले चरण को लांच करने का लक्ष्य रखा गया है.

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