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कैसे बदल रहा है महाराष्ट्र का रियल एस्टेट सेक्टर?

उद्धव ठाकरे सरकार की ओर से कंस्ट्रक्शन प्रीमियम में छूट देने की वजह से घरों की कीमत में कमी होने की उम्मीद है.

मुंबई में 19 सितंबर को एक आवासीय परिसर के निर्माण में जुटे श्रमिक (इंद्रनील मुखर्जी/एएफपी) मुंबई में 19 सितंबर को एक आवासीय परिसर के निर्माण में जुटे श्रमिक (इंद्रनील मुखर्जी/एएफपी)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • महाराष्ट्र सरकार ने 6 जनवरी को सभी हाउसिंग प्रोजेक्ट में 31 दिसंबर तक प्रीमियम पर 50 फीसद छूट देने का ऐलान किया
  • जिन प्रोजेक्ट में ये छूट ली जाएगी उन्हें उपभोक्ता के बदले की पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होगी
  • ताजा फैसला एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख की अध्यक्षता वाले विशेषज्ञ समूह की सिफारिश के बाद लिया गया

महाराष्ट्र सरकार ने 6 जनवरी को सभी हाउसिंग प्रोजेक्ट में 31 दिसंबर तक प्रीमियम पर 50 फीसद छूट देने का ऐलान किया. इसमें यह भी जोड़ा गया कि जिन प्रोजेक्ट में ये छूट ली जाएगी उन्हें उपभोक्ता के बदले की पूरी स्टांप ड्यूटी देनी होगी. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दावा किया कि इस फैसले से निर्माण लागत घटेगी और इससे घर सस्ते हो जाएंगे.   

यह फैसला सरकार के उस निर्णय के बाद आया है जिसके तहत अगस्त में उसने मकानों की बिक्री पर 1 सितंबर से 31 दिसंबर 2020 तक स्टांप ड्यूटी 3 प्रतिशत घटाई और 1 जनवरी से 31 मार्च 2021 के बीच इसमें 2 प्रतिशत की कमी की है. ताजा फैसला उस विशेषज्ञ समूह की सिफारश के बाद आया है जिसकी अध्यक्षता एचडीएफसी के चेयरमैन दीपक पारेख कर रहे हैं. समूह ने 14 जून को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सेस लेवी के रूप में लिए जाने वाले सभी प्रीमियम में 50 प्रतिशत कमी लाने की सिफारिश की थी.  

बहुत ज्यादा चार्ज 

पारेख कमेटी ने दलील दी कि किसी भी हाउसिंग प्रोजेक्ट में सेस और लेवी प्रीमियम कुल निर्माण लागत का 30 प्रतिशत तक होते हैं. कमेटी ने दिल्ली, हैदराबाद और बेंगलूरू में लग रहे चार्ज का भी अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंची की मुंबई में यह चार्ज बहुत अधिक हैं. समिति का मानना था कि औसत खरीदार को सस्ते घर उपलब्ध कराने के लिए रियल एस्टेट में निवेश को जेब के दायरे में लाना चाहिए. दो शीर्ष रियल एस्टेट संस्थाएं महाराष्ट्र चेंबर ऑफ हाउसिंग इंडस्ट्री (एमसीएचआई-क्रेडाई) और नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (एनएआरईडीसीओ) सेक्टर को आर्थिक प्रोत्साहन देने के पक्ष में थीं और उनका कहना था कि इस सेक्टर में मंदी के कारण नौकरियां तो चली ही गई हैं, साथ ही नकदी की आवक थम गई है जिससे प्रोजेक्ट में विलंब हो रहा है.  

एनएआरईडीसीओ के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने सरकार के फैसले को डेवलपर्स और घर के खरीदारों दोनों के हित में बताया है. एमसीएचआइ-क्रेडाई के अध्यक्ष दीपक गारोदिया ने कहा कि इस फैसले से प्रोजेक्ट में तेजी आएगी जिसका असर 250 से ज्यादा संबद्ध उद्योगों पर भी पड़ेगा.   

सतर्क कदम 

ठाकरे सरकार बहुत दिनों से यह प्रोत्साहन देने पर विचार कर रही थी लेकिन राजनीतिक प्रतिक्रिया की आशंका को लेकर वह उलझन में थी. स्टांप ड्यूटी घटाने के उसके फैसले के बाद सितंबर से दिसंबर के बीच प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में पिछले साल इसी कालखंड के दौरान हुई खरीद के मुकाबले तेजी दर्ज की गई थी. सरकार ने इस दौरान 300 करोड़ का राजस्व अर्जित किया जिससे उसका आत्मविश्वास बढ़ा. सतर्क कदम बढ़ाते हुए सरकार ने छूट देने के लिए प्रीमियम की गणना 2020 या 2019 की दरों (रेडी रेकनर या आरआर), जो भी ऊंची होगी, के आधार पर करने का फैसला लिया है. आरआर वैल्यू संपत्ति की बाजार वैल्यू होती है जिसे हर साल सरकार तय करती है. आरआर वैल्यू के आधार पर ही स्टांप ड्यूटी तय होती है. इसी के आधार पर डेवलपर को कंस्ट्रक्शन प्रीमियम का भुगतान करना होता है.

विपक्ष के नेता देवेंद्र फड़नवीस ने आरोप लगाया है कि इन हाउसिंग नीतियों से सरकार कुछ बिल्डरों को फायदा पहुंचाना चाहती है. 28 दिसंबर को ठाकरे को लिखे एक पत्र में फड़नवीस ने आरोप लगाया कि आरआर वैल्यू में टुकड़ों में पूर्वाग्रह के साथ कटौती करने से कुछ खास डेवलपर्स को भारी मुनाफा होगा. ठाकरे ने सतर्कता बरतते हुए शर्त लगाई है कि जो बिल्डर इस छूट का फायदा उठाएंगे उन्हें खरीदारों की स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री का खर्च 2021 तक उठाना होगा. मुख्यमंत्री मानते है कि इस शर्त से उनकी सरकार बिल्डर हितैषी होने के आरोपों से बच सकेगी. लेकिन भाजपा उन्हें आसानी से छोड़ने वाली नहीं है. बांद्रा से भाजपा विधायक आशीष सेलार कहते हैं, "प्रीमियम में छूट की पूर्व शर्त भ्रामक है. इससे सिर्फ बड़े डेवलपर्स को फायदा मिलेगा, आम आदमी इसके फायदे से वंचित रहेगा." बहरहाल, बिल्डर और कंज्यूमर की तरफ से अभी कोई शिकायत सामने नहीं आई है.

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