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यूपी के अस्पतालों में कबाड़ हो रहे वेंटीलेटर

प्रदेश में सरकारी और निजी अस्पतालों में बड़ी संख्या में वेंटीलेटर डिब्बे में बंद पड़े हैं. इनको चलाने वाले स्टाफ की कमी और ऑक्सीजन की उपलब्धता न होने से गंभीर कोविड मरीजों को वेंटीलेटर का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स) प्रतीकात्मक फोटो (रॉयटर्स)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • कानपुर में पीएम केयर फंड से खरीदे गए 34 वेंटीलेटर में कुछ तकनीकी खराबी होने के चलते शुरू नहीं हो पाए हैं. दूसरे जिलों में भी यही हाल है
  • बांदा में 15 हजार की आबादी पर महज एक वेंटीलेटर मौजूद है. सोनभद्र में 90 हजार की आबादी पर एक वेंटीलेटर
  • स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों से मांगे खराब पड़े वेंटीलेटर का ब्योरा. जल्द चालू कराए जाएंगे सभी

कोरोना महामारी के बीच इससे दुखद क्या हो सकता है कि जब गंभीर मरीज इलाज के लिए तड़प रहे हों, वेंटीलेटर युक्त आइसीयू बेड के लिए अंतहीन इंतजार करने को विवश हों और दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों में वेंटीलेटर रखे-रखे खराब हो रहे हों. कानपुर के सबसे बड़े अस्पताल हैलट अस्पताल को ही लीजिए. पिछले वर्ष जब कोरोना की पहली लहर के दौरान सरकार ने यहां पर डेढ़ सौ बिस्तरों को वेंटीलेटर युक्त करने की योजना बनाई थी. प्रस्ताव तैयार हुआ और बजट भी मुहैया कराया गया. पिछले साल के अंत तक 120 वेंटीलेटर हैलट अस्पताल में आ भी गए. वर्तमान में इनमें केवल 86 वेंटीलेटर ही चालू हालत में हैं. 34 वेंटीलेटर में कुछ तकनीकी खराबी होने के चलते यह शुरू नहीं हो पाए हैं. जो 86 वेंटीलेटर चालू हालत में हैं भी उनमें करीब दो दर्जन में समय-समय पर कुछ न कुछ गड़बड़ी भी सामने आ रही है. हैलट अस्पताल के जो 34 वेंटीलेटर खराब हैं उन्हें बनवाने में जीएसवीएम मेडि‍कल कालेज प्रशासन ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है. मेडिकल कालेज से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक खराब पड़े वेंटीलेटर की सूचना शासन और संबंधि‍त कंपनी को भेज दी गई है. जानकारी के मुताबिक कंपनी ने वेंटीलेटर को बनाने से हाथ खड़े कर दिए हैं. मेडिकल कालेज के एक डाक्टर बताते हैं कि इन वेंटीलेटर में “ह्यूमिड फायर किट” नहीं लगी है. इसके बिना तो वेंटीलेटर को चलाया ही नहीं जा सकता है. इस किट से आक्सीजन लेते समय मरीज को नमी मिलती है जिससे उसके फेफड़े में ड्राइनेस और कंजेशन में कमी आती है. इसके अलावा कई वेंटीलेटर के साफ्टवेयर में भी गड़बड़ी है. जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. आर. बी. कमल कहते हैं, “अस्पताल में लगे वेंटीलेटर में जो खराबी आती है उसे तुरंत ठीक करवा दिया जाता है. खराब पड़े वेंटीलेटर के बारे में शासन से निर्देश लिया जाएगा.” समस्या केवल मेडिकल कालेज के हैलट अस्पताल तक ही सीमित नहीं है. कानपुर के उर्सला अस्पताल में लगे चार वेंटीलेटर आक्सीजन की कमी के चलते पर्याप्त प्रेशर न मिलने से ठीक से काम नहीं कर रहे हैं. यहां पर छह वेंटीलेटर पहले से ही खराब पड़े हैं. उर्सला अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अनिल निगम कहते हैं, “आक्सीजन का पर्याप्त प्रेशर न मिलने से वेंटीलेटर के काम करने में दिक्कतें हैं.” इस दिक्कत को दूर करने के लिए उर्सला अस्पताल में इंमरजेंसी बिल्डिंकग के समीप एक आक्सीजन जेनरेशन प्लांट लगाया जा रहा है. 

लखनऊ में 100 से ज्यादा वेंटीलेटर डिब्बे में बंद
लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में भी वेंटीलेटर डिब्बे में बंद पड़े हैं. प्रदेश में प्रांतीय चिकित्सा सेवा के जरिए संचालित सबसे बड़ा जिला अस्पताल लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में 28 वेंटीलेटर डिब्बे में बंद पड़े हैं. बलरामपुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आर. के. गुप्ता के मुताबिक आक्सीजन की कमी होने से वेंटीलेटर का इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है. डॉ. गुप्ता बताते हैं कि जैसे जैसे आक्सीजन मिलती जाएगी वेंटीलेटर को चालू कर दिया जाएगा. इसी तरह लखनऊ के ही लोकबंधु अस्पताल में 18 वेंटीलेटर बंद पड़े है जिनकी जगह बाइपैप मशीनों से ही काम चलाया जा रहा है. सभी वेंटीलेटर एक्टिटव करने के लिए करीब 12 एनेस्थेटिस्ट और 24 टेक्नीशि‍यन व अन्य स्टाफ चाहिए क्योंकि इन्हें शिफ्ट के अनुसार ड्यूटी करनी होती है. लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शंकर त्रिपाठी बताते हैं स्टाफ न होने की वजह से वेंटीलेटर को चलाने में दिक्क्तें हैं. डॉ. त्रिपाठी के मुताबिक अगर आयुष के 20 डाक्टर लोकबंधु अस्पताल को मिल जाएं तो वेंटीलेटर चलाए जा सकते हैं. लखनऊ में सरकारी अस्पतालों में ही नहीं निजी अस्पतालों में भी बड़ी संख्या में वेंटीलेटर बंद पड़े हैं. टीएस मिश्रा मेडिकल कालेज में छह, मेट्रो अस्पताल में चार, सीएनएस अस्पताल में चार, टेंडर पाम अस्पताल में पांच वेंटीलेटर काम नहीं कर रहे हैं. लखनऊ के सीएमओ डॉ. संजय भटनागर बताते हैं, “सभी निजी अस्पतालों में आक्सीजन की सप्लाई शुरू कराकर बंद पड़ें वेंटीलेटर को शुरू कराया जाएगा.”

बुंदेलखंड में जरूरत से कोसों दूर उलब्धता 
कोरोना महामारी की दूसरी लहर के कहर ने स्वास्थ्य सुविधाओं की पोल खोल कर रख दी है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक बुंदेलखंड के जिले बांदा में कोविड मरीजों के लिए कुल 600 बेड और 136 वेंटीलेटर हैं. आबादी के अनुसार करीब साढ़े 3000 लोगों पर एक कोविड बेड और साढ़े 15 हजार लोगों पर एक वेंटीलेटर है. हालांकि इतनी बड़ी आबादी के बीच ये स्वास्थ्य सुविधाएं ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ भर है. वर्ष 2020 के अनुसार, बांदा जिले की आबादी लगभग 20 लाख 84 हजार 796 है. करीब दो लाख आबादी शहर की है. यहां राजकीय मेडिकल कालेज और मंडलीय चिकित्सालय को कोविड अस्पताल बनाया गया है. स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक मेडिकल कालेज में कोविड मरीजों के लिए 400 बेड और मंडलीय चिकित्सालय में 200 बेड हैं. इसी तरह क्रमश: 109 और 27 वेंटीलेटर उपलब्ध हैं. इस तरह कुल जनसंख्या के अनुसार 15,329 लोगों पर एक वेंटीलेटर है. झांसी में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 70 वेंटिलेटर में 10 वेंटीलेटर अभी भी खराब हैं. मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सिंह ने बताया कि 70 वेंटीलेटर में 25 वेंटीलेटर खराब पड़े थे. इनमें से 15 इंजीनियरों ने ठीक कर दिए. शेष 10 बचे हैं जिन्हें ठीक कराया जा रहा है.  

प्रदेश में बड़े पैमाने पर बंद पड़े वेंटीलेटर की जानकारी स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डी. एस. नेगी ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधि‍कारियों से उनके जिले में बंद पड़े वेंटीलेटर और इनके न चलने की वजह की जानकारी मांगी है. इसके बाद विभाग सभी वेंटीलेटर को चालू करने के लिए जरूरी कार्रवाई करेगा. 

इन जिलों में भी वेंटीलेटर का कोई पुरसाहाल नहीं
# अलीगढ़---दीनदयाल कोविड केयर सेंटर के आइसीयू में वेंटीलेटर युक्त 44 बेड की क्षमता है. तीन वेंटीलेटर 100 बेड हास्पिटल अतरौली में हैं. एनेस्थेटिस्ट और टेक्नीशि‍यन न होने से सभी वेंटीलेटर एक साथ काम नहीं कर रहे हैं. 
# रामपुर--- कोरोना संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए शासन ने सप्ताह भर पहले भी जिला अस्पताल को 14 वेंटिलेटर दिए हैं, ताकि कोरोना के गंभीर रोगियों की जान बचाई जा सके, लेकिन अस्पताल प्रशासन द्वारा सभी वेंटीलेटर को नहीं चलाया जा सका है.
# गोंडा-- गोंडा में टाटा के सहयोग से बनाए गए कोविड हॉस्पिटल में 17 वेंटिलेटर बेड आपरेटर न होने के कारण धूल फांक रहे हैं. जिला अस्पताल के सीएमएस ने बताया कि इस कोविड हॉस्पिटल में बेड पर ही ऑक्सीजन पाइप की व्यवस्था समेत केन्डुला व बाइपैक की भी व्यवस्था है. सभी वेंटीलेटर के जल्द शुरू करने का प्रयास किया जा रहा है. 
# कन्नौज-- राजकीय मेडिकल कॉलेज के आइसीयू में 10 सामान्य वेंटीलेटर व दो डिजिटल वेंटीलेटर थे. इसके बाद वर्ष 2020 में कोरोना का संक्रमण बढ़ने से मेडिकल कॉलेज में आइसोलेशन वार्ड लेवल-टू का बनाया गया. इसमें गंभीर संक्रमित मरीजों का इलाज करने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड से 80 वेंटीलेटर भेजे गए थे. डॉक्टरों की कमी होने से वेंटीलेटर चालू नहीं हो सके. 
# कानपुर देहात--- बीते वर्ष कोरोना काल से पहले जिला अस्पताल में शासन से पहले चार पोर्टेबल वेंटीलेटर दि‍ए गए थे. बाद में इनकी संख्या और बढ़ा दी गई और कुल 22 की संख्या हो गई. मौजूदा समय पर केवल चार वेंटीलेटर ही कोविड एल 2 अस्पताल में सक्रिय हैं. बाकी वेंटीलेटर चालू नहीं हो सके हैं.
# बरेली---पिछले वर्ष 300 बिस्तरों वाले कोविड अस्पताल में 18 वेंटीलेटर लगाए गए थे. स्टाफ की कमी थी लेकिन इस बार कोरोना महामारी की दूसरी लहर में डाक्टरों और अन्य स्टाफ के संक्रमित होने की वजह से ये सभी वेंटीलेटर शुरू नहीं हो पाए हैं. 
# बदायूं---- बदायूं राजकीय मेडिकल कालेज में 103 वेंटीलेटर हैं और संचालित सिर्फ 12 हैं. इनको भी चलाने के लिये मेडिकल कालेज प्रशासन के पास सिर्फ एक ही एनीथेटिक्स डॉक्टर हैं, जबकि यहां 10 से 12 एनीथेटिक्टस डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिये. स्टाफ की कमी तो है ही लेकिन एनीथेटिक्स डॉक्टरों की कमी की वजह से वेंटीलेटर चल नहीं पा रहे हैं.
# लखीमपुरखीरी---- जिले के कोविड अस्पताल में दस वेंटिलेटर होने की बात कहीं जा रही है. हकीकत इससे उलट है. दस में से सात वेंटिलेटर पर उपकरण ही नहीं है. शेष तीन वेंटिलेटर चलाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का न होना बताया जा रहा. इसमें टैक्नीशियन की कमी है. वहीं दूसरी तरफ जिला आस्पताल दो चरणों में 16 वेंटिलेटर भेजने का दावा स्वास्थ्य विभाग कर रहा है. इनमें से कितने काम कर रहे हैं इसकी कोई जानकारी विभाग के पास नहीं है.

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