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पीसीएस का सपना देखने वालों को नहीं भाया आइएएस का परीक्षा पैटर्न

बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थ‍ियों का चयन होने से यूपी में रहकर प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे लोगों में खासा आक्रोश है.

यूपी लोक सेवा आयोग का कार्यालय (प्रतीकात्मक फोटो) यूपी लोक सेवा आयोग का कार्यालय (प्रतीकात्मक फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी लोक सेवा आयोग ने 11 सितंबर को पीसीएस-2018 का रिजल्ट घोषित किया
  • रिजल्ट में हरियाणा की अनुज शर्मा ने पहला स्थान, गुरुग्राम की संगीता राघव ने दूसरा और पटना के कर्मवीर केशव ने पांचवां स्थान प्राप्त किया
  • आयोग के चेयरमैन प्रभात कुमार ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा को संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तर्ज पर कराया

उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज की प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) परीक्षा प्रदेश की सबसे अहम परीक्षा होती है. आयोग ने 11 सितंबर को पीसीएस-2018 की परीक्षा का अंतिम नतीजा घोषि‍त किया. यह परीक्षा कई मायनों में खास थी. काफी समय बाद इस परीक्षा के जरिए उपजि‍लाधि‍कारी (एसडीएम) के 119 और पुलिस उपाधीक्षक के 94 पदों पर चयन किया गया था. पिछले दस वर्षों में पहली बार एसडीएम और पुलिस उपाधीक्षक के इतनी बड़ी संख्या में पदों पर चयन किया गया था. खास बात यह भी थी कि कोरोना संक्रमण के चलते लॉकडाउन के बीच आयोग ने इस परीक्षा को संपन्न कराया था. लॉकडाउन के चलते आयोग को प्रदेश के विभि‍न्न विभागों में 42 तरह के पदों पर चयन के लिए साक्षात्कार कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ा था.

जैसे ही पीसीएस-2018 की परीक्षा का परिणाम घोषि‍त हुआ विवाद शुरू हो गया. विवाद मेरि‍ट में आए अभ्यर्थ‍ियों को लेकर हुआ. मेरिट सूची में पानीपत, हरियाणा की अनुज शर्मा ने पहला स्थान प्राप्त किया. गुरुग्राम की संगीता राघव ने दूसरा और पटना के कर्मवीर केशव ने पांचवां स्थान प्राप्त किया. पहले पांच स्थानों पर तीन पर दूसरे राज्यों के अभ्यर्थि‍यों के काबिज‍ होने से यूपी के परीक्षार्थि‍यों ने यूपीपीएससी की परीक्षा के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए. सेवानिवृत्त आइएसएस अधि‍कारी प्रभात कुमार जब पिछले वर्ष आयोग के चेयरमैन बने तो उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ि‍यों के लिए कुख्यात रही यूपीपीसीएस की परीक्षाओं को पटरी पर लाने की थी. आयोग में डॉ. प्रभात कुमार ने पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा को संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तर्ज पर कराने का नियम लागू किया.

पहली बार यूपीपीएससी की पीसीएस मुख्य परीक्षा महज चार दिनों में 18 से 22 अक्तूबर, 2019 के बीच संपन्न कराई गई जो पहले 18 से 20 दिन में पूरी होती थी. बदले पैटर्न में मुख्य परीक्षा के लिए वैकल्प‍िक विषय दो से घटाकर एक कर दिया गया. पहले सामान्य ज्ञान के दो पेपर होते थे उसे बढ़ाकर चार कर दिया गया. सामान्य ज्ञान की ऑब्जेक्टि‍व होने वाली परीक्षा पीसीएस-2018 की मुख्य परीक्षा में सब्जेक्ट‍िव हुई. पीसीएस की परीक्षाओं में होने वाले इंटरव्यू में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने के मामले सामने आए हैं. ऐसे ही मामलों की जांच सीबीआइ भी कर रही है. इंटरव्यू की महत्ता को पीसीएस की परीक्षा में थोड़ा कम करने के लिए आयोग ने इसे 200 की बजाय 100 अंकों का कर दिया था. यही नहीं आयोग अपनी परीक्षाओं में पहले से यूपी की महिलाओं को 20 प्रतिशत आरक्षण देता आ रहा था. पीसीएस-2018 की प्रारंभि‍क परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद गैर-प्रांत के अभ्यर्थि‍यों ने इसे कोर्ट में चुनौती दी. कोर्ट ने आयोग से सभी अभ्यर्थि‍यों को समान चयन का अवसर देने का निर्देश दिया. कोर्ट के इस फैसले के बाद आयोग को मुख्य परीक्षा की चयन सूची में बदलाव करना पड़ा था. हालांकि इस आदेश के विरोध में राज्य सरकार की ओर से स्पेशल अपील कोर्ट में लंबित है.

आमतौर पर यूपीपीएससी की परीक्षा में यूपी से जुड़े प्रश्नों की भरमार रहती थी. प्रारंभि‍क परीक्षा में 30 से 40 फीसद प्रश्न यूपी से जुड़े होते थे लेकिन पीसीएस- 2018 की प्रारंभि‍क परीक्षा में यूपी से जुड़े प्रश्न नाममात्र के थे. संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर परीक्षा होने से उन अभ्यर्थि‍यों को फायदा हुआ जो भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस) को ध्यान में रखकर अपनी तैयारी कर रहे थे. पीसीएस परीक्षा में पांचवें स्थान पर आए पटना के कर्मवीर का चयन कुछ दिन पहले ही भारतीय विदेश सेवा के लिए हुआ है. बड़ी संख्या में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थ‍ियों का चयन होने से यूपी में रहकर प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहे लोगों में खासा आक्रोश है.

पीसीएस-2018 के प्रतियोगी छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक पत्र भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की गई है. पत्र में लिखा है, “पीसीएस-2018 परीक्षा के विज्ञापन संख्या A-2/E-1/2018 के बिंदु 13(15) में स्केलिंग पद्धति लागू रहने का साफ- साफ उल्लेख है. इस पद्धति को उच्चतम न्यायालय ने भी स्वीकार किया है. वर्ष 1996 से 2017 तक निरंतर इस पद्धति को अपनाया गया है. जो आयोग 5 जनवरी 2014 को पीसीएस मुख्य परीक्षा-2012  के परिणाम घोषित करने के तुरंत बाद और साक्षात्कार शुरू होने से पहले ही स्केलिंग पद्धति की प्रक्रिया को समाचार पत्र में विज्ञप्ति जारी करता है, वह अब आरटीआइ के माध्यम से भी नहीं बता रहा है. इस सन्दर्भ में आयोग ने शासन द्वारा भेजे गये पत्र का भी जवाब नहीं दिया. परिणामस्वरूप हिंदी भाषी छात्र जो प्रमुखतः मानविकी विषय जैसे इतिहास, समाजकार्य, रक्षा अध्ययन से मुख्य परीक्षा दिये थे वे अंतिम रुप से ना के बराबर चयनित हैं. स्केलिंग को विधि विरुद्ध हटाकर मानविकी विषयों वाले छात्रों के साथ घोर अन्याय हुआ है. साथ ही दूसरे राज्यों के छात्रों को बड़ी संख्या में सफल कर अव्वल श्रेणी का दर्जा दिया गया है." 

सेवानिवृत्त आइएसए अधि‍कारी रमेश चंद्र कुशवाहा बताते हैं, “संघ लोक सेवा आयोग की तर्ज पर परीक्षा कराने पर बड़ी संख्या में दूसरे प्रदेशों के परीक्षार्थी यूपी पीसीएस में आएंगे. यूपी की प्रांतीय सेवा में आने वाले दूसरे प्रदेशों के अभ्यर्थी जैसे ही संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में चयनित होंगे यूपी सिविल सेवा को छोड़ देंगे. इससे आने वाले दिनों में बड़ी संख्या में पीसीएस अधि‍कारियों के पद खाली हो जाएंगे. इसका पूरा असर सरकार की कार्यप्रणाली पर दिखेगा क्योंकि आइएएस का ख्वाब लेकर तैयारी कर रहे अभ्यर्थी यूपी पीसीएस में चयन होने के बावजूद इसे अपने लिए दूसरे दर्जे की ही नौकारी समझेंगे.”

पीसीएस-2018 का अंतिम चयन परिणाम आने के बाद अभ्यर्थ‍ियों को अब कट-ऑफ अंक और मार्कशीट जारी होने का इंतजार है. अभ्यर्थि‍यों को आशंका है कि आयोग मार्कशीट और कट-ऑफ अंक जारी करने में देरी कर सकता है. पीसीएस-2017 की परीक्षा में भी आयोग ने ऐसा ही किया था. तब अभ्यर्थ‍ियों को ज्वाइनिंग के बाद से मार्कशीट और कट-ऑफ अंक जारी किए गए थे. आयोग ने पीसीएस-2018 के नतीजों में यह स्पष्ट किया है कि मार्कशीट और कट-ऑफ अंक आयोग की वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे और इस बारे मे जनसूचना अधि‍कार के तहत आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे. 'प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति' के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय कहते हैं, “ आयोग पीसीएस-2016 की परीक्षा तक स्केल्ड और नॉन स्केल्ड अंकों की जानकारी देता था लेकिन पीसीएस-2017 में केवल स्केल्ड अंकों की जानकारी दी गई थी.” नॉन स्केल्ड अंक से तात्पर्य यह है कि अभ्यर्थी को परीक्षक ने वास्तविक रूप से कितने अंक दिए हैं. स्केल्ड अंक का तात्पर्य यह है कि स्केलिंग के बाद वास्तविक अंकों में कितने अंक बढ़ाए या घटाए गए हैं. अवनीश का कहना है कि आयोग को गोपनीयता के नाम पर पारदर्श‍िता से खि‍लवाड़ नहीं करना चाहिए. परीक्षार्थि‍यों की मांग है कि आयोग को समय से मार्कशीट और कट-ऑफ अंक जारी कर स्केल्ड और नॉन स्केल्ड अंकों की भी जानकारी देनी चाहिए.

प्रतियोगी छात्रों की मुख्य मांगें

# प्रारंभि‍क परीक्षा में यूपी से संबंधि‍त कम से कम 30 से 40 फीसद प्रश्न हों. मुख्य परीक्षा में एक पेपर यूपी स्पेशल हो.

# प्रारंभिक परीक्षा का रिजल्ट सीटों के अनुपात में 18 गुना निकाला जाए, मुख्य परीक्षा में तीन गुना अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित किए जाएं.

# प्रश्नों के गलत उतर की परंपरा को समाप्त किया जाए. पेपर को कम से कम 3 पैनल से परीक्षण करवाया जाए. उसके बाद पेपर को निर्धारित किया जाए.

# परीक्षा में पारदर्शी रूप से स्केलिंग/मॉडरेशन हो. अंतिम परिणाम के 2 हप्ते के बाद प्राप्तांक व कटऑफ आयोग की साइट पर जारी किया जाए. वेटिंग लिस्ट का भी प्रावधान हो.

# टॉप 20 कंडीडेट्स की उत्तर-पुस्तिका आयोग की साइट पर सार्वजनिक की जाए. सभी कंडीडेट्स की उत्तर-पुस्तिका परिणाम के 2 माह बाद साइट पर लोड कर दिया जाए.

# हिंदी माध्यम के कॉपियों का मूल्यांकन व अंग्रेजी माध्यम के कॉपियों का मूल्यांकन में आ रही विसंगतियों को दूर किया जाये.

# मुख्य परीक्षा के पाठ्यक्रम को मानविकी /साहित्य के विषय व अभियांत्रिकी /विज्ञान के विषय मे संतुलन लाया जाये.

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