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यूपी में अपहरणकर्ताओं के आगे बेबस योगी की पुलिस

यूपी में पिछले एक महीने में गोरखपुर, कानपुर, कानपुर देहात, गाजियाबाद, गोंडा समेत कई जिलों में आधा दर्जन से अधि‍क अपहरण की वारदातें सामने आ चुकी हैं.

गोंडा ज‍िले में अपहृत बच्चे को मुक्त कराने के बाद यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार गोंडा ज‍िले में अपहृत बच्चे को मुक्त कराने के बाद यूपी के एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार

बुलंदशहर में 25 जुलाई से लापता/अपहृत वकील धर्मेंद्र चौधरी का शव 1 अगस्त को जिले की मखदूमगंज चौकी से बमुश्कि‍ल 70 मीटर की दूरी पर सात फीट गहरे गड्ढे में मिलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर शव मिलना देश के सबसे बड़े पुलिस बल की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर रहा है. वकील के लापता या अपहृत होने के सात दिन तक पुलिस खानापूर्ति ही करती रही और अपने आसपास की घूम रहे आरोपी को पहचानने की कोई कोशि‍श नहीं की. शुरुआती तफ्तीश में यह बात सामने आ रही है कि हत्या वाली रात आरोपी ने एक होटल से 56 रोटी ऑर्डर कर मंगवाए थे. इसमें से 30 रोटि‍यां पुलिस चौकी में मौजूद पुलिस वालों के भोजन के लिए भेजी गई थीं. एक अगस्त को खुर्जा कोतवाली में हंगामे के दौरान मृत वकील के परिजन बार-बार पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगा रहे थे. उनका कहना था कि पुलिसकर्मियों ने आरोपी की रोटी खाई थी इसीलिए वह लापता/अपहृत वकील को ढूंढ़ने की बजाय आरोपी की मदद कर रहे थे.

यूपी पुलिस की शर्मनाक नाकामी उस वक्त भी जाहिर हुई जब 22 जून को घर आते वक्त अपहृत हुए कानपुर के बर्रा निवासी लैबटेक्नीशि‍यन संजीत यादव को खोजने में पुलिस ने अपनी चिरपरिचित सुस्ती से काम लिया. यही वजह रही कि पुलिस न केवल संजीत यादव के अपहरणकर्ताओं को ढूंढ़ने में नाकाम रही बल्कि‍ हीलाहवाली करते हुए अपहरणकर्ताओं को संजीत यादव के परिजनों से 30 लाख रुपए भी दिलवा दिये. लैबटेक्नीशि‍यन के अपहरण के बाद हत्या होने से खफा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानपुर की एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता समेत 11 पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया है. इसके बावजूद अभी तक पुलिस संजीत के शव को नहीं बरामद कर पाई है. पुलिस की कार्रवाई से असंतोष जता रहे संजीत के परिजनों की मांग पर मुख्यमंत्री ने 2 अगस्त को इस पूरे प्रकरण की सीबीआई से जांच कराने के आदेश दिए हैं.

संजीत के परिजनों का कहना है कि पूर्व एसपी साउथ अपर्णा गुप्ता से कभी संजीत के अपहरण से जुड़ी शि‍कायत को गंभीरता से नहीं लिया. संजीत की बहन रुचि का आरोप है कि अपर्णा गुप्ता ने ही स्वॉट टीम प्रभारी को भेजकर 14 जुलाई बैग में रुपए न होने की बात कहलवाई थी जबकि उसके एक दिन पहले परिजनों ने 30 लाख रुपए अपहरणकर्ताओं को पुलिस के बताए तरीके के अनुसार ही दिए थे. यही नहीं इस पूरे मामले में पुलिस लगातार लापरवाही पर लापरवाही करती जा रही है. संजीत का अपहरण होने के बाद पुलिस ने 24 जुलाई को पांच अपहरणकर्ताओं की गिरफ्तारी कर मामले का राजफाश किया था. इसके बावजूद पुलिस ने घटनास्थल जहां संजीत को अपहरण कर रखा गया था और बाद में हत्या कर दी गई, से तत्काल सबूत जुटाने की जहमत नहीं उठाई गई. जब परिजनों ने सवाल उठाया तब पुलिस घटनास्थल पहुंची और सफाई धुलाई कर फोरेंसिेक साक्ष्य बटोरे. क्रिमिनल वकील रजत सक्सेना बताते हैं “जांच में पुलिस के पास आरोपितों के बयान ही हैं जो मजिस्ट्रेट के सामने नहीं हुए हैं. पुलिस अभि‍रक्षा में हुए बयानों को कोर्ट नहीं मानता है. पुलिस ऐसे किसी चश्मदीद गवाह ढूंढ़ने में नाकामयाब रही जों संजीत के अपहरण के बारे में ठोस जानकारी दे सकता हो. यही नहीं पुलिस संजीत का ड्यूटी बैग, फि‍रौती वाला बैग या फि‍र या उससे जुड़ा कोई सामान नहीं बरामद कर पाई. इन सब कमजोरियों ने हो रही किरकिरी से बचने के लिए ही प्रदेश सरकार के सामने इस पूरे प्रकरण को सीबीआई जांच के लिए भेजने के अलावा कोई चारा नहीं था. ”

यूपी में पिछले एक महीने में गोरखपुर, कानपुर, कानपुर देहात, गाजियाबाद, गोंडा समेत कई जिलों में आधा दर्जन से अधि‍क अपहरण की वारदातें सामने आ चुकी हैं. अचानक अपहरण की घटनाओं में तेजी आने के पीछे की वजह सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक आर. एस. सिंह बताते हैं “लॉकडाउन के दौरान काम धंधा बिल्कुल बंद रहा. अपराध भी न्यूनतम थे. लॉकडाउन में काम-धंधा मंदा होने के कारण लोगों की आर्थिक स्थिति काफी गड़बड़ा गई है. एक झटके में काफी पैसों का इंतजाम करने के लिए अपहरण की वारदातें बढ़ गई हैं. पुलिस का टालू रवैया इन घटनाओं को और बढ़ा रहा है. ”

इसी तरह गोरखपुर में प्रापर्टी डीलर दयानंद ने पान कारोबारी के बेटे बलराम का अपहरण कर एक करोड़ रुपए फि‍रौती वसूलने की साजिश रची थी. मामला उलटा पड़ता देखा तो उसने खुद को बचाने के लिए 14 वर्षीय मासूम को गला घोंटकर मार डाला. अपहरण की सभी घटनाओं में अपहृत की जान चली गई हो ऐसा नहीं है. कुछ खुशकि‍स्मत ऐसे भी हैं जिन्हें पुलिस ने सूझबूझ और तेजी दिखाते हुए न केवल सलामत मुक्त कराया है बल्कि अपहरणकर्ताओं को गिरफ्तार भी किया है. गोरखपुर में एडीशनल एसपी रहे रामचंद्र श्रीवास्तव बताते हैं “ जिन मामलों में अपहरण की सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्परता दिखाई है उनमें से ज्यादातर अपहृत सकुशल मुक्त कराये गए हैं. अपहरण के ऐेसे मामले जिनमें अपहर्ता पहचान का होता है उनमें वह ज्यादातर में जेल जाने से बचने के लिए अपहृत की हत्या कर देता है. ऐसे मामले में पुलिस की ढिलाई भारी पड़ती है.”

अपहरण के मामलों में पुलिस की लापरवाही सामने आने पर पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) हितेश चंद्र अवस्थी ने पुलिस अधि‍कारियों को निर्देश जारी किए हैं. उन्होंने वारदात की सूचना मिलते ही तत्काल घटनास्थल का निरीक्षण करने, अपहरण के मामलों में उचित धारा में अभि‍योग पंजीकृत करने तथा फि‍रौती के लिए अपहरण से जुड़े वारदातों में प्रथम सूचना रिपोर्ट धारा 364 ए के तहत अविलंब दर्ज करने के साथ ही अपहृत की सकुशल बारामदगी के लिए एक अलग से टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं. डीजीपी ने अपने निर्देश में कहा है कि अगर जरूरत है तो एसटीएफ से मदद लेने के लिए फौरन उच्च अधि‍कारियों से संपर्क किया जाए. साथ ही 24 घंटे के भीतर अपहृत की फोटो और अन्य जानकारियां दूसरे प्रदेशों को भी भेजकर वहां से जानकारी हासिल की जाए. अगर अपहृत के पास मोबाइल फोन है तो उससे संबंधि‍त डेटा का तकनीकी परीक्षण कराया जाए. वरिष्ठ अधि‍कारी ऐसे मामलों में अपहृत की बरामदगी तक निरंतर मामले की निगरानी करते रहें.

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