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यूपीः पीजीआइ की निगरानी में होगा ब्लैक फंगस का इलाज

यूपी में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों से निबटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीजीआइ लखनऊ को सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी. रोगियों की केस हिस्ट्री को समझने के बाद लाइन ऑफ ट्रीटमेंट तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा पी‍जीआइ.

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प्रतीकात्मक फोटो (पीटीआइ) प्रतीकात्मक फोटो (पीटीआइ)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है. राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में करीब 700 मरीज हो गए हैं. अब तक करीब 35 की मौत हो चुकी है
  • ब्लैक फंगस के उपचार में प्रयोग होने वाली एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन के 1,260 वायल केंद्र सरकार ने यूपी को सौंपे हैं
  • मुख्यमंत्री योगी ने आम जनता के लिये एक मोबाइल ऐप्लीकेशन बनाने का निर्देश दिया है जिस पर स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध मानव संसाधन की जानकारी मिलेगी

योगी सरकार ने प्रदेश में ब्लैक फंगस बीमारी को नियंत्रित करने के लिये तेजी से कदम आगे बढ़ा दिये हैं. इसके तहत बुधवार, 26 मई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चिकित्सा क्षेत्र के दिग्गजों को मैदान में उतारा गया है. विशेषज्ञ डॉक्टरों की ये टीमें प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भर्ती मरीजों का सुपरविजन करेंगी. रोगियों की केस हिस्ट्री को समझने के बाद लाइन ऑफ ट्रीटमेंट तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. सरकार की योजना है कि ब्लैक फंगस के रोगियों पर सतत निगरानी को बढ़ाकर बीमारी पर जल्द काबू पाया जा सके.

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ब्लैक फंगस बीमारी नई चुनौती बन कर सामने आ गई है. प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों के मिलने का सिलसिला जारी है. राजधानी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों में इसके करीब 700 मरीज हो गए हैं. अब तक करीब 35 की मौत हो चुकी है. हर जिले में ब्लैक फंगस के मरीज चिह्नित हो रहे हैं. योगी सरकार ब्लैक फंगस के पूर्ण खात्मे में जुट गई है. इसके लिये उसने एसजीपीजीआई (संजय गांधी पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज), लखनऊ के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि लखनऊ, मेरठ, गोरखपुर, वाराणसी सहित जहां कहीं भी ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज हो रहा है, उनका इलाज अब एसजीपीजीआई के विशेषज्ञों के सुपरविजन में होगा. इसके लिये उन्होंने सभी अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों व निजी अस्पतालों में ब्लैक फंगस का इलाज करा रहे रोगियों की पूरी केस हिस्ट्री और लाइन ऑफ ट्रीटमेंट विशेषज्ञ डॉक्टरों को उपलब्ध कराने को कहा है.

सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीमारी पर तत्काल लगाम लगाने के लिये स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधिकारियों को सभी अस्पतालों के निरंतर सम्पर्क में रहने और कहीं भी उपयोगी दवाओं का अभाव न होने के निर्देश जारी कर दिये हैं. सरकार का मानना है कि ब्लैक फंगस के रोगियों पर निगरानी बढ़ाकर उपसर जल्द काबू पाया जा सकता है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता के लिये एक मोबाइल ऐप्लीकेशन बनाने पर भी जोर दिया है. जिसपर आसानी से चिकित्सा केंद्र पर कितने चिकित्सक हैं, पैरामेडिकल स्टाफ की स्थिति क्या है, दवाओं की उपलब्धता कितनी है, भवन, उपकरणों की क्या स्थिति है आदि की जानकारी मिल सके. उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधीन संचालित सभी पीएचसी, सीएचसी, हेल्थ सेंटर, जिला अस्पताल की सुविधाओं का एक डेटाबेस तैयार करने के भी आवश्यक निर्देश जारी किये हैं.

ब्लैक फंगस के उपचार में प्रयोग होने वाली एंफोटेरेसिन बी इंजेक्शन की कमी बनी हुई है. यह अभी तक सिर्फ सरकारी अस्पतालों में भी उपलब्ध हो पा रही है. इसे देखते हुए 3 दिन पहले केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को एंफोटेरेसिन बी उपलब्ध कराई है, इसमें करीब 1,260 वायल उतर प्रदेश को मिली है. इस इंजेक्शन को शासन की ओर से अस्पतालों को उपलब्ध कराया जाएगा. शासन की ओर से दवा वितरण के लिए वाराणसी, लखनऊ, आगरा, मेरठ, झांसी, कानपुर, गोरखपुर, बरेली मंडल को दवा वितरण का मुख्य केंद्र बनाया गया है. इन केंद्रों से आस-पास के मंडल मुख्यालय को भी दवा उपलब्ध कराई जाएगी. मंडल मुख्यालयों से रेड क्रॉस सोसाइटी के जरिए वितरण की व्यवस्था बनाई गई है.

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