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तकनीकी पेंच में फंसा मध्य प्रदेश विधानसभा का उपचुनाव

कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल होकर मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री बनने वाले 14 लोग उस वक्त विधायक नहीं थे. इन लोगों को मंत्री बनने के लिए छह महीने के अंदर उप-चुनाव जीत कर आना होगा, अन्यथा इन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा.

भाजपा नेताओं के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक (प्रतीकात्मक फोटो) भाजपा नेताओं के साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनके समर्थक (प्रतीकात्मक फोटो)

मार्च की 10 तारीख को ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक 22 विधायकों ने कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद, भाजपा नेता शिवराज सिंह चौहान के लिए मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ कर दिया था. 23 मार्च को शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और लगभग तीन महीने के बाद उन्होंने 2 जुलाई को कैबिनेट का विस्तार करते हुए कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए 22 में से 14 लोगों को मंत्री पद की शपथ दिलाई थी. ये 14 लोग मंत्री बनते वक्त विधायक नहीं थे और इन्हें मंत्री बनने के लिए छह महीने के अंदर उप-चुनाव जीत कर आना होगा अन्यथा इन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ेगा.

तकनीकी पेचीदगी यही से शुरू होती है. फिलहाल सवाल यह उठ रहा है कि जिन विधानसभा सीट से इन विधायकों ने इस्तीफा दिया है वह विधानसभा बिना जनप्रतिनिधि के 10 मार्च से खाली है, लिहाजा छह महीने यानी 10 सितंबर तक यहां से नया विधायक चुना जाना अनिवार्य है. लेकिन भाजपा के लोग यह तर्क दे रहे हैं कि जिन 14 लोगों ने बिना विधायक रहते हुए 2 जुलाई को मंत्री पद की शपथ ली है उन्हें छह महीने अर्थात् 2 जनवरी 2021 से पहले उप-चुनाव जीत कर आना होगा. अर्थात् विधानसभा छह महीने से अधिक समय तक खाली रह सकता है. संवैधानिक मामलों के जानकार सुभाष कश्यप कहते हैं, "कायदे से तो जिस दिन से विधानसभा खाली है उस दिन से छह महीने के अंदर ही विधायकों को चुन कर आना चाहिए लेकिन खाली हुए सीट पर चुनाव कराने का अंतिम फैसला चुनाव आयोग को ही लेना है." 

सूत्रों का कहना है कि यह मामला बेहद पेचीदा है. चुनाव आयोग, किसी विधानसभा या लोकसभा को खाली तभी मानता है जब औपचारिक रूप से उसे संबंधित लोकसभा या विधानसभा का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति यह सूचित करे कि उसने विधायक के पद से इस्तीफा दे दिया है. या कोई अन्य व्यक्ति या संस्था उसे इस बारे में आधिकारिक रूप से सूचित करे. चूंकि इस मामले में चुनाव आयोग को शायद सूचित नहीं किया गया होगा इसलिए छह महीने के अंदर चुनाव नहीं हो पा रहा है. वैसे भी मध्य प्रदेश में अभी 24 सीटें खाली हैं. 2 सीट में से एक जऊरा 21 दिसंबर 2019 से तथा अगार जनवरी 30 से खाली है और यहां जुलाई तक चुनाव हो जाने थे लेकिन कोरोना की वजह से यहां चुनाव नहीं हो सके हैं. चुनाव आयोग के अधिकारी अनौपचारिक रूप से यह कहते हैं कि आयोग रिक्त हुए सीट पर छह महीने के अंदर चुनाव कराता है लेकिन कोरोना के हालात को देखते हुए इस बार स्थिति अलग है. आयोग के अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि जिन लोगों ने बिना विधायक रहे हुए मंत्रीपद की शपथ ली है उन्हे मंत्री पद की शपथ लेने के छह महीने के अंदर विधायक चुन कर आना पड़ेगा.

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