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कोरोना महामारी के दौरान सबसे खराब भूमिका अखि‍लेश यादव की रही है: स्वतंत्र देव सिंह

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को लगता है कि महामारी के दौरान विपक्ष ने नकारात्मक भूमिका का निर्वहन किया. स्वतंत्र देव सिंह के साथ इंडिया टुडे के असिस्टेंट एडीटर आशीष मिश्र की खास बातचीत.

स्वतंत्र देव सिंह (फोटोः मनीष अग्निहोत्री) स्वतंत्र देव सिंह (फोटोः मनीष अग्निहोत्री)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • "मेरा मानना है कि जब चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं हो रहा हो तो प्रत्याशी नहीं खड़ा करना चाहिए था. हम लोगों से गलती हुई"
  • "ईमानदारी, अपराध मुक्त, कानून का राज, विकास ऐसे कई सारे बिंदुओं पर योगी आदित्यनाथ की सरकार के कामकाज के आगे अखि‍लेश की पिछली सरकार कहीं ठहरती नहीं है"
  • "2022 के विधानसभा चुनाव में जितनी सीटें भाजपा के पास है उससे अधि‍क सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. हम 51 प्रतिशत से अधि‍क वोट हासिल करेंगे"

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को लगता है कि कोरोना महामारी के दौरान विपक्ष ने नकारात्मक रूप में अपनी भूमिका का निर्वहन किया है. 6 जून की सुबह नौ बजे के करीब स्वतंत्र देव सिंह ने इंडिया टुडे के असिस्टेंट एडीटर आशीष मिश्र से खास बातचीत में भाजपा की रणनीति और विपक्ष की भूमिका पर अपने विचार रखे. बातचीत के प्रमुख अंश:

# यूपी में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने क्या चुनौतियां हैं?

कोरोना जैसी महामारी पहले कभी नहीं हुई. आम आदमी की प्राथमिकताएं बदल गई हैं. स्वास्थ्य जनता की प्राथमिकता बन गया है. जितना हो सकता है केंद्र और राज्य की सरकार पूरी प्रतिष्ठा लगाकर लोगों को बचाने की कोशि‍श कर रही है. पहले भी जब देश पर कोई संकट आया था तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी विपक्ष की भूमिका निभाते थे. संकट के समय वे हमेशा सत्ता पक्ष के साथ खड़े रहते थे. कोरोना काल के दौरान पहली बार यह देखने को मिला कि सभी विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि खराब करने का काम किया. विपत्त‍ि काल में विपक्ष ने वैक्सीनेशन और सरकार के रोकथाम के प्रयासों पर अकारण सवाल उठाकर लोगों के भीतर भय पैदा किया. विपक्ष की भूमिका नकारात्मक रही. यह देश के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है. कोरोना काल के दौरान सबसे खराब भूमिका तो समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की रही. राजनीति अब ईमानदार नेता और सेवक को पसंद करने लगी है.

# भाजपा के प्रदेश संगठन में बदलाव की अटकलें लगाई जा रही हैं?

भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है. कार्यकर्ता के निर्माण और उन्हें सक्रिय रखने के लिए चार बिंदुओं पर हमेशा काम चलता रहता है - रैली, प्रशि‍क्षण, बैठक और सम्मेलन. वंशवाद पर आधारित पार्टियों में कार्यकर्ता निर्माण की आवश्यकता नहीं है. इसलिए ये दल भाजपा की कार्यप्रणाली को नहीं समझ पाते. यही वजह है कि लोग भाजपा के नियमित दिनचर्या के कार्यों पर अटकलें लगाना शुरू कर देते हैं.

# पंचायत चुनाव में भाजपा के कमजोर प्रदर्शन की क्या वजह मानते हैं?

पंचायत चुनाव में भाजपा का पहला अनुभव था जब पार्टी ने सभी जगह पर अपना प्रत्याशी खड़ा किया. मेरा मानना है कि जब चुनाव चिन्ह पर चुनाव नहीं हो रहा हो तो प्रत्याशी नहीं खड़ा करना चाहिए था. हम लोगों से गलती हुई. अगर चुनाव चिन्ह होता तो परिणाम अलग आते. इसके बावजूद भाजपा ने बहुत बेहतर प्रदर्शन किया है. पिछले पंचायत चुनाव में 2,700 से अधि‍क जिला पंचायत सदस्यों को जिताने वाली सपा इस बार सात सौ के भीतर सिमट गई है. जिला पंचायत सदस्यों का चुनाव भाजपा बड़ी संख्या में जीतेगी.

# गांव में पार्टी के जनाधार में कमी आई है?

सपा कोई पार्टी नहीं है. यह एक ट्रस्ट है. जनता ने पांच साल इनका शासन देखा है. सैफई खानदान ही सरकार चलाता था. जनता के दिमाग में अभी भी सपा सरकार का खौफ बना हुआ है.

# दलित और पिछड़ी जाति के बीच भाजपा का जनाधार कम हो रहा है?

भाजपा सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी संगठन है. यूपी के प्रत्येक घर में भाजपा पहुंच चुकी है. पार्टी के पास पासी, जाटव, कठेरिया, कोरी, वाल्मीकि, खटीक, धोबी समेत अनुसूचित जाति के सभी वर्गों में नेतृत्व है. ओबीसी में भी कुर्मी, मौर्य, पाल, सैनी, बिंद, निषाद, मल्लाह, प्रजापति सभी जातियों में भाजपा के पास नेतृत्व है. भाजपा सभी जातियों की बात सुनती है और सभी को मौका देती है.

# अगले विधानसभा चुनाव में भाजपा की लड़ाई किस दल से मानते हैं?

योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव की तुलना कर लीजिए. ईमानदारी, अपराध मुक्त, कानून का राज, विकास ऐसे कई सारे बिंदुओं पर योगी आदित्यनाथ की सरकार के कामकाज के आगे अखि‍लेश की पिछली सरकार कहीं ठहरती नहीं है. सपा के पास वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जनता को बताने कुछ है ही नहीं. इसी से अखिलेश घबराए हुए हैं. कोरोना काल में जहां योगी जी गांव-गांव गए वहीं अखि‍लेश ने खुद को बंगले में कैद कर रखा. ऐसे में जनता अखि‍लेश को क्यों पसंद करेगी. सरकारी योजनाएं गरीब तक पहुंचे, इसके लिए योगी आदित्यनाथ ने एक दिन भी छुट्टी नहीं ली है. यह परिश्रम की पराकाष्ठा है.

# वर्ष 2017 में यूपी भाजपा के सहयोगी ओम प्रकार राजभर अलग हो चुके हैं तो अनुप्र‍िया पटेल भी कुछ नाराज चल रही हैं?

अनुप्र‍िया पटेल नाराज नहीं हैं. वह कल (5 जून) को मुझसे मिलने मेरे आवास पर आई थीं. भाजपा अपने सहयोगियों का सम्मान करती है.

# प्रदेश भाजपा के प्रकोष्ठ और मोर्चा का गठन नहीं हो पाया है?

प्रक्रिया चल रही है. दो हफ्ते के भीतर इनका गठन हो जाएगा.

# भाजपा नेताओं ने प्रदेश सरकार के कामकाज के खि‍लाफ पत्र लिखे हैं?

जिस पार्टी के पास तीन सौ से अधि‍क विधायक हों. साठ से अधि‍क सांसद हों, हजारों जनप्रतिनिधि‍ हों, उनमें दो-तीन नेताओं ने अगर सुझाव के लिए पत्र लिखे हों तो उसे किसी प्रकार का‍ विवाद नहीं मानना चाहिए.

# बीते कुछ दिनों में भाजपा नेताओं के अपराधि‍यों के साथ गठजोड़ की बातें भी सामने आयी हैं?

अपराधि‍यों को संरक्षण देने वाला चाहे वह प्रदेश सरकार में मंत्री हो या फिर संगठन में पदाधिकारी हो, सब पर सख्त कार्रवाई हो रही है.

# वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कितनी सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है?

जितनी सीटें भाजपा के पास है उससे अधि‍क सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. हम 51 प्रतिशत से अधि‍क वोट हासिल करेंगे.

# क्या मंत्रिमंडल विस्तार की संभावना है?

अभी कोई चर्चा नहीं हुई है. कोरोना महामारी में सरकार का ध्यान केवल लोगों की सुरक्षा करने में लगा है. अगले तीन महीने तक पार्टी जनता के बीच जाकर उनकी सेवा पर ध्यान लगाएगी.

# यूपी भाजपा और सरकार में कई सारे पॉवर सेंटर बनने के आरोप लग रहे हैं?

प्रदेश सरकार योगी जी के नेतृत्व में काम कर रही है. संगठन राष्ट्रीय अध्यक्ष के नेतृत्व में काम कर रहा है.

# भाजपा और बसपा के बीच तालमेल की अटकलें लगाई जा रही हैं?

यह सब खबरें निराधार हैं. बहन जी (मायावती) स्वयं सपा से ज्यादा ताकतवर हैं. 

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