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'जा पर विपदा पड़त है, सोई आवत यह देश’

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव ने चित्रकूट से 'मिशन-2022' की शुरुआत की है. आठ साल पहले भाजपा ने भी चित्रकूट से ही यूपी में सत्ता वापसी का अभि‍यान शुरू किेया था.

चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा के बाद मंदिर के अतिथि रजिस्टर में लिखते अखिलेश यादव चित्रकूट में कामदगिरि की परिक्रमा के बाद मंदिर के अतिथि रजिस्टर में लिखते अखिलेश यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा प्रमुखे अखि‍लेश यादव 7 जनवरी को चित्रकूट पहुंचे
  • चित्रकूट में अखिलेश यादव ने कार्यकर्ता प्रशि‍क्षण शि‍विर में शि‍रकत किया
  • चित्रकूट के अलावा बांदा और महोबा जिले की आठ विधानसभा क्षेत्रों से आए सपा के 800 कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी इस शि‍विर में शामिल हुए

रामचरित मानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास का मन जब व्याकुल हुआ तो विनय पत्रिका में उन्होंने ‘हारे मन अब चित्रकूटहि’ लिखकर राम की तपोभूमि का बखान किया था.  इसी प्रकार मुगल सम्राट अकबर के नौ रत्नों में से एक रहीम ने ‘चित्रकूट में रम रहे रहिमन अवध नरेश, जा पर विपदा पड़त है, सोई आवत यह देश’ की रचना कर चित्रकूट की महिमा बताई थी. भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास का सर्वाधि‍क समय चित्रकूट में ही बिताया था. लंबे समय से सत्ता से दूर रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने यूपी में अपनी राजनीतिक ताकत बढ़ाने का अभि‍यान चित्रकूट से ही शुरू किया था. अप्रैल 2013 में तत्कालीन नवनियुक्त भाजपा प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने पार्टी की पूरी कार्यसमिति के साथ चित्रकूट में कामदगिरी की परिक्रमा कर अभि‍यान की शुरुआत की थी. चित्रकूट में आयोजित भाजपा प्रदेश कार्यसमिति में भी पार्टी को बूथ पर मजबूत करने की एक गहन योजना भी बनी थी.

चित्रकूट से भाजपा ही नहीं बल्कि‍ समाजवादी पार्टी (सपा) के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी राजनीतिक शक्त‍ि लेते रहे हैं. वर्ष 2006 में पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने मुख्यमंत्री रहते हुए प्रदेश की सत्ता में दोबारा आने के लिए भगवान राम की तपोस्थली चित्रकूट में तीन दिवसीय चिंतन शिविर का आयोजन कर चुनावी तैयारियों की शुरुआत की थी. अपने पिता के कदमों पर चलते हुए इस बार सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी “मिशन 2022” की कामयाबी के लिए इसी चित्रकूट की धरती से शुरुआत की. 7 जनवरी को चित्रकूट पहुंचे अखि‍लेश यादव ने यहां के एक गेस्ट हाउस में तीन दिवसीय कार्यकर्ता प्रशि‍क्षण शि‍विर में शि‍रकत किया. अगले दिन 8 जनवरी को घने कोहरे के बीच उनका काफिला शुक्रवार की सुबह साढ़े सात बजे कर्वी स्थित लोक निर्माण विभाग के डाक बंगला से कामदगिरि प्रमुख द्वार पहुंचा. कामदगिरि प्रमुख के अधिकारी संत मदन गोपाल दास ने पूर्व मुख्यमंत्री को विधिवत भगवान कामतानाथ की पूजा अर्चना कराई. अतिथि रजिस्टर में अखि‍लेश ने लिखा कि 'कामतानाथ की कृपा हो'. फिर पूर्व सीएम ने समर्थकों के साथ कामतानाथ और जय सियाराम के जयकारों के साथ पंचकोसी परिक्रमा की. खोही की जलेबी वाली गली में वे करीब दस मिनट रुके, दुकानदारों के साथ बैठकर चाय पी और उनका दुख दर्द सुना.

चित्रकूट के दौरे ने अखि‍लेश की बदलती सियासत की झलक पेश की है. चित्रकूट के समाजसेवी संदीप रिछारिया बताते हैं, “उत्तर प्रदेश की सियासत में भाजपा की हिंदू वोटरों पर मजबूत पकड़ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व के तेवर को देखते हुए समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव भी यह बात समझ गए हैं कि उन्हें मुस्लिम समर्थक छवि से बाहर निकलकर सॉफ्ट हिंदुत्व की सियासी छवि बनानी ही पड़ेगी.” हिंदुत्व की राजनीति से सार्वजनिक तौर पर परहेज करने वाले अखिलेश यादव अब मंदिरों और धार्मिक प्रतीकों की सियासत करने से परहेज नहीं कर रहे हैं. अखिलेश कहते हैं, “नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ने चित्रकूट में शिविर किया था और यहीं पर डॉ. राम मनोहर लोहिया जी ने रामलीला की शुरुआत की थी. तब भी मैं यहां आकर पूरा परिक्रमा मार्ग घूमा था. यहां के मंदिर पुजारी, संत, व्यापारी और दुकानदार सभी समाजवादी पार्टी के सरकार द्वारा किए गए कामों को याद कर रहे हैं.” अखि‍लेश बताते हैं कि चित्रकूट में रोप वे, दो तहसीलें, मुख्यालय में ओवरब्रिज, बेडीपुलिया से सीतापुर व शिवरामपुर, पीलीकोठी मार्ग का निर्माण सपा सरकार की देन है. रामघाट में सुंदरीकरण भी सपा सरकार ने ही कराया है. चित्रकूट में आयोजित शिविर में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने करीब 20 सदस्यीय एक्सपर्ट टीम के साथ पदाधिकारियों को लगातार दो दिन सफलता का पाठ पढ़ाया. समापन में पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री करीब ढ़ाई घंटे तक कार्यकर्ताओं के बीच रहे.

चित्रकूट के अलावा बांदा और महोबा जिले की आठ विधानसभा क्षेत्रों से आए 800 कार्यकर्ता तथा पदाधिकारी इस शि‍विर में शामिल हुए. सपा के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में सर्वाधिक फोकस कृषि कानूनों पर ही रहा. पार्टी इन कानूनों की कमजोरी के जरिए किसानों को अपने पाले में लाने का काम करेगी. सपा ने प्रशि‍क्षण पाए कार्यकर्ताओं को गांवों में जाकर किसानों को कृषि कानूनों के संबंध में हकीकत बताने का निर्देश दिया है. इसके किए कार्यकर्ता गांव में रात्र‍ि विश्राम करके कृषि‍ कानून में होने वाली गड़बड़ी को समझाएंगे. इस तरह से सपा अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए भाजपा सरकार की पोल खोलने का काम करेगी.

सपा और बसपा का बुंदेलखंड में कई वर्षों तक राजनीतिक दबदबा रहा था. यहां की कुल 19 सीटों पर वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने नीला परचम लहराते हुए 14 सीटों पर कब्जा किया था. इस चुनाव में भाजपा बुंदेलखंड में एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पायी थी. पांच साल बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा की सीटें घटकर आधी रह गईं. सपा ने भी अपनी चार सीटों में से एक का इजाफा किया लेकिन भाजपा ने 3 और कांग्रेस ने 4 सीटें जीतकर सपा-बसपा के दबदबे को कड़ी चुनौती दी थी. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की आंधी ऐसी चली कि बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर कमल खि‍ल गया और सपा समेत दूसरे विपक्षी दल हाशि‍ए पर पहुंच गए. अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव ने साइकिल के लिए यूपी की सत्ता का वनवास खत्म करने के लिए चित्रकूट से अपने मिशन की शुरुआत की है. अगर अखि‍लेश अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट कर सपा से छिटके वोटबैंक को वापस ला पाए तो चित्रकूट से हुई शुरुआत साइकिल के लिए वैसा ही नतीजा लेकर आएगी जैसा चुनावी फल कमल को मिला था.

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