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बिहार में एनडीए का अलग-अलग स्लोगन

भाजपा अपने प्रचार अभियान में मोदी सरकार की उपलब्धियों और उसके कामकाज का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रही है. लेकिन बिहार सरकार की उपलब्धियों का कोई जिक्र इसमें नहीं है.

प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार (फाइल फोटो: पीटीआइ) प्रधानमंत्री मोदी और नीतीश कुमार (फाइल फोटो: पीटीआइ)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • भाजपा के प्रचार अभियान में बिहार सरकार की उपलब्धियों का कोई जिक्र नहीं है
  • भाजपा ने जिन 120 डिजिटल रथों को रवाना किया उसमें नीतीश को स्थान नहीं दिया गया है
  • भाजपा, जद (यू) और लोजपा, तीनों के चुनावी स्लोगन अलग-अलग हैं

बिहार विधानसभा चुनाव में फतह हासिल करने के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) पूरी ताकत लगा रहा है. लेकिन इस कुनबे का कोई संयुक्त नारा नहीं है. राज्य भर में बड़े पैमाने पर प्रचार कर रही भाजपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की उपलब्धि और बिहार में केंद्र सरकार के कामकाज का लेखा-जोखा प्रस्तुत कर रही है. लेकिन बिहार सरकार के उपलब्धियों का कोई जिक्र इसमें नहीं है. यहां तक कि भाजपा ने प्रचार के लिए जिन 120 डिजिटल रथ को रवाना किया है उसमें नीतीश कुमार को स्थान नहीं दिया गया है.

भाजपा ने आत्मनिर्भर बिहार का नारा देते हुए अपना स्लोगन ‘भाजपा है तैयार, आत्म निर्भर बिहार’ का नारा दिया है. वहीं लोजपा का नारा है, ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’. जद(यू) ने जो नारा दिया है वह एकदम ही अलग और काफी लंबा है जिसे संक्षेप में ‘हां, मैं नीतीश कुमार हूं.’ कह कर जद (यू) के कार्यकर्ता प्रचारित कर रहे हैं. बिहार के राजनीतिक मामलों के जानकार मणिकांत ठाकुर कहते हैं, "इन नारों को देख कर लगता है कि सभी दल अपने लिए प्रचार कर रहे हैं गठबंधन के लिए नहीं. पिछली बार जब राजद और जद (यू) साथ लड़े थे, उस वक्त दोनों दलों का एक ही नारा था: 'बिहार में बहार है नीतीशे कुमार है.' लेकिन इस बार ऐसा नहीं है."

हालांकि, प्रदेश भाजपा के महासचिव देवेश कुमार कहते हैं, "एनडीए पूरी एकजुटता के साथ प्रचार भी कर रहा है और रणनीति भी एक ही है. चूंकि इस गठबंधन में तीन दल हैं और वह अपने तरीके से प्रचार कर रहे हैं जिसका फायदा गठबंधन के सभी दलों को होगा." हालांकि, देवेश कुमार के इस दावे को मणिकांत ठाकुर खारिज करते हैं. वह कहते हैं, "यदि ऐसा होता तो भाजपा के डिजिटल रथ में नीतीश कुमार की भी तस्वीर होती और जद (यू) के पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा की तस्वीर होती. आखिर लोगों को लगना चाहिए कि सभी दल साथ मिल कर लड़ रहे हैं लेकिन ऐसा नहीं है."

सूत्रों का कहना है कि भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष जब पार्टी कार्यकर्ताओं से बात करते हैं तो वह राज्य में पार्टी को मजबूत बनाने की बात करते हैं. पिछले हफ्ते की बैठक में उन्होंने कार्यकर्ताओं से स्पष्ट रूप से कहा, "भाजपा के जीत का स्ट्राइक रेट 80 फीसद से ऊपर रखना है और इसके लिए प्रयास करें." संतोष ने एनडीए के स्ट्राइक रेट के बारे में नहीं कहा. इसके निहितार्थ क्या हैं? भाजपा के एक महासचिव कहते हैं, “ पार्टी की पहली प्राथमिकता है कि ज्यादा से ज्यादा सीट जीते. जद (यू) भी यही कोशिश करेगा और भाजपा भी.” तो क्या यदि भाजपा जद (यू) के मुकाबले ज्यादा सीट जीतती है तो क्या सीएम, भाजपा का होगा? इस प्रश्न के उत्तर में पार्टी के लोग कहते हैं कि पिछले चुनाव में भी जद (यू) के मुकाबले राजद को ज्यादा सीटें आई थी, लेकिन सीएम नीतीश ही बने. इसलिए भले गठबंधन के किसी भी दल को कितनी भी सीटे मिले, मुख्यमंत्री नीतीश ही बनेंगे. अलबत्ता सियासी हकीकत यह है कि गठबंधन में जो दल ज्यादा सीट जीतता है सरकार में उसका दखल उतना ही ज्यादा होता है.

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