scorecardresearch
 

साइकिल से उतारे गए मुलायम के समधी

पिछले काफी समय से बगावती तेवर दिखा रहे फि‍रोजाबाद की सिरसागंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक हरिओम सिंह यादव को पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है.

फि‍रोजाबाद की रैली में प्रसपा अध्यक्ष शि‍वपाल यादव के साथ हरिओम यादव फि‍रोजाबाद की रैली में प्रसपा अध्यक्ष शि‍वपाल यादव के साथ हरिओम यादव
स्टोरी हाइलाइट्स
  • सपा के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हरिओम यादव 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा की लहर के बीच सिरसागंज सीट बचाने में सफल रहे थे
  • वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में फि‍रोजाबाद से प्रसपा प्रत्याशी शि‍वपाल सिंह‍ यादव का समर्थन किया था
  • वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और प्रसपा के बीच गठबंधन की संभावनाएं धूमि‍ल हो सकती हैं

पिछले काफी समय से बगावती तेवर दिखा रहे फि‍रोजाबाद की सिरसागंज विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक हरिओम सिंह यादव को पार्टी ने अनुशासनहीनता के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है. हरिओम सिंह यादव सपा के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे हैं और इनके रिश्ते में समधी लगते हैं. पिछले महीने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने फीरोजाबाद जिले की तीन सीटों के लिए प्रत्याशी घोषित किए थे. शि‍वपाल ने सिरसागंज से सपा विधायक हरिओम सिंह यादव को प्रसपा की ओर से प्रत्याशी घोषित किया था. इसके बाद से सपा तीन बार के विधायक हरिओम सिंह यादव पर कार्रवाई की तैयारी कर रही थी. हरिओम यादव पिछले काफी समय से पार्टी लाइन से हटकर काम कर रहे थे.  

एक समय सपा के कद्दावर नेताओं में शुमार रहे हरिओम यादव 2017 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश में भाजपा की लहर के बीच सिरसागंज सीट बचाने में सफल रहे थे. फि‍रोजाबाद जिले की चार सीट भाजपा के खाते में गई थी, लेकिन शि‍वपाल से नजदीकियां बढ़ने के साथ सपा से हरिओम का मोहभंग होता चला गया. पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने सपा से अलग होकर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी लोहिया का गठन किया तो हरिओम यादव खुलकर उनके साथ आ गए थे. 2019 के लोकसभा चुनाव में सिरसागंज विधायक ने प्रसपा के लिए काम किया. लोकसभा चुनाव में फि‍रोजाबाद सीट से प्रसपा उम्मीदवार शिवपाल यादव एवं सपा उम्मीदवार अक्षय यादव के बीच चली वर्चस्व की लड़ाई के बीच भाजपा के डॉ. चंद्रसेन जादौन जीते थे. हरिओम सिंह यादव खुलकर शि‍वपाल सिंह यादव का समर्थन कर रहे थे. उल्‍लेखनीय है कि पिछले वर्ष नवंबर में हुए उपचुनाव के दौरान फि‍रोजाबाद की टूंडला सीट से सपा उम्‍मीदवार की हार के बाद हरिओम सिंह यादव ने अखिलेश यादव समेत पार्टी के नेताओं के खिलाफ बयान दिया था. हरिओम सिंह यादव ने कहा था कि समाजवादी पार्टी टूंडला सीट इसलिए हारी क्‍योंकि स्‍थानीय नेताओं से लेकर अखिलेश यादव तक ने सपोर्ट नहीं किया.

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2016 में हरिओम सिंह‍ यादव के पुत्र विजय सिंह यादव उर्फ छोटू यादव को फि‍रोजाबाद जिला पंचायत का अध्यक्ष बनाया गया था. फि

फिरोजाबाद में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव के दौरान हरिओम सिंह यादव और उनके विजय प्रताप पुत्र के विरुद्ध जान से मारने के प्रयास के मामले में मुकदमा दर्ज हुआ था. मार्च 2017 में प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद विजय सिंह यादव के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव आ गया, जिसमें जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के विरोध में डीएम को पत्र सौंपा था. उसी दौरान पिता-पुत्र को जेल जाना पड़ा था. जेल जाने के बाद रामगोपाल यादव ने विधायक हरिओम सिंह पर जिला पंचायत सदस्यों को बेचे जाने का आरोप लगाया था. इसके बाद से हरिओम सिंह यादव सपा के राष्ट्रीय महामंत्री रामगोपाल यादव के धुर विरोधी हो गए. रामगोपाल के विरोध में खड़े शि‍वपाल सिंह यादव से हरिओम सिंह यादव की नजदीकियां बढ़ीं और इन्होंने सपा के खि‍लाफ बगावती तेवर अपनाना शुरू कर दिया. राजनीतिक विश्लेषक हरिओम सिंह यादव के खिलाफ हुई कार्रवाई को शि‍वपाल सिंह‍ यादव और सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखि‍लेश यादव के बीच लगातार बढ़ रही दूरियों की ओर इशारा कर रहे हैं. इससे वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा और प्रसपा की गठबंधन की संभावनाओं पर नकारात्मक असर पड़ेगा. सपा के एक बड़े़ पदाधि‍कारी बताते हैं, “वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जुटी सपा ने हरिओम सिंह यादव को पार्टी से निकाल कर स्पष्ट संदेश दिया है कि वह पिछले चुनाव की तरह किसी भी रूप में बिखरी हुई नहीं दिखना चाहती है. इसलिए पार्टी के विरोध में काम करने वाले नेताओं को हरिओम यादव पर हुई कार्रवाई एक चेतावनी के रूप में है. “

***

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें