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गंगा के जरिए हिंदुत्व की अलख जलाए रखेगा संघ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत का प्रयागराज में दो दिन का प्रवास संघ की भविष्य की रणनीति का खाका खींच गया. यूपी में वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संघ ने हिंदुत्व एजेंडे को गंगा के बहाने धार देने की रणनीति बनाई है.

प्रयागराज में गंगा आरती करतेे मोहन भागवत प्रयागराज में गंगा आरती करतेे मोहन भागवत
स्टोरी हाइलाइट्स
  • अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद मोहन भागवत पहली बार संगम की रेती पर पहुंचे थे
  • संघ ने गंगा के निर्मलीकरण अभियान के जरिए हिंदुओं को जोड़े रखने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है
  • संघ प्रमुख ने गंगा किनारे बसे सभी गांवों में नियमित रूप से मां गंगा की आरती करवाने की बात कही है

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक मोहन भागवत का प्रयागराज में दो दिन का प्रवास संघ की भविष्य की रणनीति का खाका खींच गया. माघ मेले में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के शि‍वि‍र में “गंगा समग्र” की दो दिवसीय बैठक में भाग लेने के लिए पहुंचे मोहन भागवत ने 19 फरवरी को अपने कार्यक्रम की शुरुआत गंगा के दुग्धाभि‍षेक और आरती करके की. वर्ष 2019 में प्रयागराज में आयाजित कुंभ के दौरान भी मोहन भागवत संगम की रेती पर आए थे. इस दौरान उन्होंने विहिप कार्यालय में संतों के साथ बैठक करके अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था. अब अयोध्या में राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद मोहन भागवत पहली बार संगम की रेती पर पहुंचे थे. यह पहला मौका था जब मोहन भागवत ने गंगा की आरती की. इसने यह संकेत दिया है कि यूपी में वर्ष 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए संघ ने हिंदुत्व एजेंडे को गंगा के बहाने धार देने की रणनीति बनाई है. संगम के किनारे संघ के अनुषांगिक संगठन “गंगा समग्र” का कार्यकर्ता कार्यक्रम वैसे तो गंगा के निर्मलीकरण को लेकर आयोजित था, लेकिन संघ प्रमुख ने इस आयोजन के दूसरे दिन गंगा किनारे सभी गांवों में गंगा आरती का आयोजन करवाने की बात कहने के साथ हिंदुओं को आपस में जोड़े जाने का भी संदेश दे दिया. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि गंगा के दोनों तट पर पांच किलोमीटर के दायरे में बसे गांवों एवं शहरों में निर्मलीकरण के लिए नियमित कार्यक्रम शुरू करने होंगे. दो वर्ष पूर्व प्रयागराज में कुंभ के आयोजन के दौरान भी संघ प्रमुख ने संगम तट पर विहिप शिविर में आयोजित संत सम्मेलन में कुंभ मेले जरिए जातपात से इतर हिंदुओं को जोड़े जाने का संदेश दिया था. इस दौरान उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का संकल्प लिया. राम मंदिर निर्माण के जरिए हिंदुत्व में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ मजबूत हुई. वर्ष 2019 में केंद्र में मोदी सरकार लगातार दूसरी बार काबिज हो गई. यूपी में 62 सीटें जीतकर भाजपा ने केंद्र में सरकार बनाने में बड़ी भूमिका निभाई. प्रयागराज में मोहन भागवत के कार्क्रम में मौजूद रहे विहिप के एक पदाधि‍कारी बताते हैं, “यूपी के साथ कई अन्य राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के पूर्व संघ चाहता है कि हिंदू वोटरों का बिखराव न हो. इसी वजह से उन्हें जोड़े रखने के लिए पिछले वर्ष नवंबर माह में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए हर एक हिंदू की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए धन संग्रह की व्यापक रणनीति बनाई गई. चूंकि धन संग्रह का यह अभियान माघ पूर्णिमा तक ही चलना है इस वजह से संघ ने अब गंगा के निर्मलीकरण अभियान के जरिए हिंदुओं को जोड़े रखने की रणनीति पर काम करना शुरू किया है.” इस वजह से संघ प्रमुख ने गंगा किनारे बसे सभी गांवों में नियमित रूप से मां गंगा की आरती करवाने की बात कही है. गंगा के अलावा इसकी सहायक नदियों को भी संघ इस अभि‍यान से जोड़ेगा. ऐसे में गंगा के साथ ही यमुना किनारे के जिलों, गांवों और तहसीलों में आरती या अन्य ऐसे कार्यक्रम बनाए जा सकते हैं जिसमें ज्यादा से ज्यादा हिंदुओं की सहभागिता हो.

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का अनुषांगिक संगठन “गंगा समग्र” वर्ष 2011 से गंगा निर्मलीकरण पर कार्य कर रहा है जिसमें छह आयाम स्वच्छता, वृक्षारोपण, चिकित्सा, तीर्थ पुरोहित, स्नानघाट व श्मशान घाट शामिल हैं. “गंगा समग्र” प्रशासनिक दृष्ट‍ि से पांच राज्य एवं संगठनात्मक दृष्ट‍ि से 12 प्रांत में गंगा के किनारे बसे 80 जिलों में काम कर रहा है. 13वें प्रांत के रूप में अब दिल्ली को शामिल किया गया है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र विभाग के पूर्व प्रोफेसर डॉ. एस. के. शुक्ल बताते हैं, “राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद संघ के पास गंगा ही एक ऐसा मुद्दा है जिसके जरिए वह हिंदुओं को आपस में बांधे रख सकता है. इसीलिए गंगा के बहाने संघ न केवल यूपी में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव बल्क‍ि वर्ष 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव तक हिंदुत्व के एजेंडे को जिंदा रखना चाहता है.” पिछले वर्ष 27 जनवरी से यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बिजनौर से बलिया तक “गंगा यात्रा” का आयोजन किया था. इसके एक वर्ष बाद योगी सरकार एक बार फि‍र बिजनौर से लेकर बलिया तक गंगा की आरती करने की योजना तैयार कर रही है. काशी, प्रयाग समेत उत्‍तर प्रदेश के करीब 1,100 स्‍थानों पर अब गंगा आरती होगी. इसके लिए बिजनौर से बलिया तक योगी सरकार 1,038 नए आरती चबूतरों का निर्माण करने जा रही है. नमामि गंगे विभाग की अगुआई में गंगा के दोनों किनारों पर बसे 1,038 गांवों को नए आरती स्‍थल के तौर पर चुना गया है.

तय योजना के तहत बिजनौर से लेकर बलिया तक गंगा के 5 किलोमीटर के दायरे में दोनों किनारों पर बसे गांवों में नए आरती स्‍थलों के निर्माण की प्रक्रिया पर्यटन विभाग के सहयोग से शुरू की जाएगी. नए आरती स्‍थलों को जन सहभागिता के आधार पर संचालित किया जाएगा. आरती चबूतरों पर रोज तय समय पर गंगा आरती का आयोजन किया जाएगा. बिजनौर से लेकर बलिया तक इन 1,038 गांवों में गंगा घाट का निर्माण कर उन्‍हें धार्मिक स्‍थल के रूप में विकसित किया जाएगा. गंगा के 5 किलोमीटर के दायरे में बसे इन गांवों में धर्मार्थ भवन निर्माण करने के भी निर्देश दिए गए हैं. दिसंबर,2020 में अन्‍य विभागों अधिकारियों के साथ ही जल शक्ति मंत्रालय की बैठक में इन गांवों में प्राचीन और ऐतिहासिक धर्म स्‍थलों और मंदिरों का विकास कर उन्‍हें पर्यटन स्‍थल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं.

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