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सात समुंदर पार गूंजेगी पीलीभीत की बांसुरी की स्वरलहरी

राज्‍य सरकार की ओडीओपी योजना के तहत नई उम्‍मीदों के साथ खड़े हो रहे पीलीभीत के बांसुरी उद्योग के लिए देश के साथ विदेशी बाजार ने भी बांहें खोल दी है.

पीलीभीत में बांसुरी का निर्माण करता कारीगर पीलीभीत में बांसुरी का निर्माण करता कारीगर
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पीलीभीत का बांसुरी उद्योग सरकारी उपेक्षा का शि‍कार हो गया था
  • राज्य सकार की ओडीओपी योजना के तहत यह फिर उम्मीदों के साथ खड़ा हुआ है
  • इस योजना के तहत बांसुरी व्यवसायियों को 70 करोड़ रुपए की मदद दी जा चुकी है

पीलीभीत में बिजली घर के पास लालरोड देश-विदेश में बांसुरी के कारोबार के लिए जानी जाती है. आजादी के बाद करीब पांच दशकों तक यहां की बनाई बांसुरी देश-विदेश में अपनी धाक जमा रही थी. उस वक्त यहां पर 2,500 के करीब बांसुरी कारीगर थे जिनका हुनर संगीत की परख रखने वालों के सिर चढ़ कर बोल रहा था. इसी वजह से पीलीभीत को बांसुरी नगरी के रूप में भी जाना जाता था. समय के साथ बांसुरी सरकारी उपेक्षा की शि‍कार हो गई. व्यवसाय घटने लगा. पीलीभीत में बांसुरी व्यवसायियों की संख्या भी घटकर आधी से कम रह गई. पीलीभीत के दम तोड़ते बांसुरी व्यवसाय को 'आक्सीजन' वर्ष 2018 में मिली जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में 'वन डिस्ट्र‍िक्ट वन प्रोडक्ट' (ओडीओपी) योजना लॉन्च की और इसमें पीलीभीत के बांसुरी उद्योग को भी जगह दी गई.

पीलीभीत के लालरोड के  के मोहल्ला बशीरखान में रहने वाले बांसुरी कारीगर इकरार नबी अपने परिवार की चौथी पीढ़ी के रूप में इस पुश्तैनी काम में लगे हुए हैं. इकरार मियां इस बात के गवाह हैं कि किस तरह से सरकारी उपेक्षा के बाद बदहाल हुआ बांसुरी उद्योग ओडीओपी की बैसाखी पाकर दोबारा खड़ा हो रहा है. इकरार नबी बताते हैं, “ओडीओपी में शामिल होने के बाद से पीलीभीत के बांसुरी कारीगरों को बैंक से लोन लेना आसान हो गया है. इससे अब काम छोड़ चुके बांसुरी कारीगर दोबारा इस धंधे में लौटने लगे हैं.”

राज्‍य सरकार की ओडीओपी योजना के तहत नई उम्‍मीदों के साथ खड़े हो रहे पीलीभीत के बांसुरी उद्योग के लिए देश के साथ विदेशी बाजार ने भी बांहें खोल दी है. पीलीभीत की बांसुरी का निर्यात अमेरिकी और यूरोपीय देशों में शुरू कर दिया गया है. एमएसएमई के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2018 में ओडीओपी योजना शुरू होने के बाद बांसुरी उद्योग में करीब 20 फीसद की बढ़त हुई है. राज्‍य सरकार के मुताबिक, पीलीभीत के बांसुरी उद्योग का सालाना औसत व्‍यापार 2 करोड़ तक पहुंच गया है. पीलीभीत से सालाना 20 से 25 लाख बांसुरी महाराष्‍ट्र ,तमिलनाडु समेत दक्षिण भारत और पूर्वोतर के राज्‍यों में भेजी जा रही है. ओडीओपी योजना के तहत पीलीभीत की बांसुरी को ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर भी जगह दी गई है. इससे बांसुरी को एक ग्लोबल मार्केट भी मिल गया है. अमेरिकी और यूरोपीय देशों में पीलीभीत की बांसुरी की मांग बढ़ने से आने वाले समय में स्‍थानीय इकाइयों को बड़ा फायदा मिलने की उम्‍मीद की जा रही है. एमएसएमई विभाग के अपर मुख्य सचिव नवनीत सहगल ने सरकार की तरफ से पीलीभीत के बांसुरी उद्योग के बारे में पूरा रिसर्च कराया है. इसी के अनुरूप कार्रवाई कराई की जा रही है.

बांसुरी उद्योग को सरकार की संजीवनी

.#ओडीओपी मार्जिन मनी स्कीम—इसके तहत बीस लाख रुपए तक की मार्जिन मनी सरकार अनुदान के रूप में प्रदान करती है. पीलीभीत में बांसुरी के व्यवसायियों को इस योजना के तहत 70 करोड़ रुपए की मदद दी जा चुकी है.

#मार्केटिंग डेवलेप असिस्टेंट स्कीम—इसके तहत सरकार कारीगर को देश और विदेश में लगी वाली प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है. इसमें सरकार कारीगार के आने-जाने, स्टॉल लगाने समेत कुल खर्च का सत्तर फीसद हिस्सा वहन करती है.

#ई-कॉमर्स अनुदान—इसके तहत कोई भी कारीगर ई-कामर्स प्लेटफार्म पर रजिस्ट्रेशन कराता है तो सरकार उसे 10 हजार रुपए तक अनुदान के रूप में प्रदान करती है. पीलीभीत समेत पूरे प्रदेश के ओडीओपी उत्पादों को बिक्री के लिए ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ हुए समझौते के बाद दो वर्षों में 24 करोड़ रुपए का व्यवसाय हो चुका है. पीलीभीत में ई-कॉमर्स के जरिए बांसुरी की बिक्री में उल्लेखनीय प्रगति दिखाने वाले एक कारीगर का सम्मान भी किया गया है.

#ट्रेनिंग ऐंड टूल किट स्कीम—इसके तहत सरकार कारीगर को कौश‍ल विकास के लिए दस दिन की नि:शुल्क रेजीडेंशि‍यल ट्रेनिंग देती है. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद कारीगर को सर्ट‍िफि‍केट के साथ उन्नत टूलकिट दी जाती है.

#कॉमन फेसिलि‍टी सेंटर---कारीगारों की जरूरतें पूरी करने के लिए हर जिले में कॉमन फेसिलिटी सेंटर की स्थापना की जा रही है. कारीगर और सरकार के सहयोग से स्थापित होने वाले इस कॉमन फेसिलिटी सेंटर की निर्माण लागत का 90 फीसद सरकार वहन कर रही है.

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