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यूपी में पटरी दुकानदारों को मिलने वाले कर्ज पर संशय

लॉकडाउन के कारण रोज कमाकर खानेवाले पटरी दुकानदारों की आर्थिक हालत बहुत खराब है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने राहत पैकेज में पटरी दुकानदारों को दस-दस हजार रुपए की पूंजी रोजगार के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है.

फोटोः इंडिया टुडे फोटोः इंडिया टुडे

लॉकडाउन के कारण रोज कमाकर खानेवाले पटरी दुकानदारों की आर्थिक हालत बहुत खराब है. इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने अपने राहत पैकेज में पटरी दुकानदारों को दस-दस हजार रुपए की पूंजी रोजगार के लिए उपलब्ध कराने का प्रावधान किया है.

लेकिन इस कर्ज के प्रावधानों को लेकर संशय बना हुआ है.

केंद्र सरकार से घोषित पैकेज का पटरी दुकानदारों को लाभ दिलाने के लिए प्रदेश सरकार अपनी कार्ययोजना तैयार कर रही है. नगर विकास विभाग ने सभी नगर निकायों को एक पत्र भेजकर उनके यहां पटरी दुकानदारों की जानकारी मांगी थी.

विभाग को मिली जानकारी के अनुसार यूपी के 17 नगर निगमों में डेढ़ लाख से अधिक पटरी दुकानदार रजिस्टर्ड हैं. इसमें 12 हजार के करीब लखनऊ में हैं. नगर निगम पटरी दुकानदारों का सर्वे करेगा. उनसे सहमति पत्र लेगा और इस बीच उन दुकानदारों का भी ब्योरा जुटाया जाएगा जिन्होंने अभी तक नगर निगम में पंजीकरण नहीं कराया है.

ऐसे अपंजीकृत दुकानदारों को भी अगर वे चाहेंगे तो उन्हें यह कर्ज उपलब्ध कराने का प्रावधान नगर विकास विभाग तैयार कर रहा है. ऐसे लोगों को पंजीकरण के लिए आकर्षित करने के लिए पंजीकरण शुल्क माफ कर दिया गया है.

हालांकि, इस कर्ज को लेकर कई तरह की दुविधाएं हैं.

लखनऊ नगर निगम के एक कर निर्धारण अधिकारी बताते हैं “शासन के आदेश के बाद उन पटरी दुकानदारों से सहमति लेना है जो पूंजी चाहते हैं. सहमति पत्र लेने के बाद शासन को पत्र भेजा जाएगा. यह एक तरह का कर्ज होगा, इसपर कितना ब्याज लिया जाएगा यह अभी पता नहीं है.”

लखनऊ के अमीनाबाद पटरी दुकानदार एसोसिएशन के एक पदाधिकारी राकेश सोनकर बताते हैं कि सरकार से मिलने वाले इस कर्ज की पूरी जानकारी किसी को भी नहीं है. सोनकर बताते हैं "नगर निगम को सभी पंजीकृत पटरी दुकानदारों के मोबाइल पर मैसेज भेजकर उन्हें योजना की पूरी और सही जानकारी मुहैया कराना चाहिए."

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