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तस्करी के जरिए यूपी में पहुंचने लगे रेमडेसिविर इंजेक्शन

कानपुर पुलिस ने 15 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इनके पास 265 इंजेक्शन बरामद किए गए हैं. देश में रेमडेसिविर इंजेक्शन की भारी किल्लत के बीच इस इनजेक्शन की तस्करी का भी यह पहला मामला है.

रेमडेसिविर इंजेक्शन रेमडेसिविर इंजेक्शन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मिलिट्री इंटेलीजेंस लखनऊ यूनिट की सूचना पर एसटीएफ ने की कार्रवाई
  • मामले के खुलासे के लिए पश्च‍िमी बंगाल जाएगा पुलिस बल
  • आगरा में नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचे जाने का का मामला भी सामने आया

कोरोना के कारण एक तरफ रेमिडिसिवर इंजेक्शन की कमी हो गई है और उसके लिए मारामारी मची है तो दूसरी तरफ कुछ लोग मौके का फायदा उठाने के लिए कालाबाजारी कर रहे हैं. कानपुर में ऐसा ही मामला 15 अप्रैल को पकड़ा गया है.

कानपुर पुलिस ने 15 अप्रैल को रेमडेसिविर इंजेक्शन की तस्करी करने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया. इनके पास 265 इंजेक्शन बरामद किए गए हैं. इनकी कीमत लाखों में बताई जा रही है. देश में भारी किल्लत के बीच इस इनजेक्शन की तस्करी का भी यह पहला मामला है.

मिलिट्री इंटेलीजेंस लखनऊ यूनिट को सूचना मिली थी कि कोलकाता से इंजेक्शन की खेप कानपुर भेजी गई है. इसकी सप्लाई कानपुर के खाड़ेपुर नौबस्ता निवासी मोहन सोनी को दी जानी है. अफसरों ने मोहन सोनी से ग्राहक बनकर सौदा तय किया. इसके बाद स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को सूचना दी गई. एसटीएफ के एसआई राजेश और सिपाही देवेश ने ग्राहक बनकर मोहन से संपर्क किया. इंजेक्शन की डिलीवरी कोपरगंज स्थित होटल गणेश में तय की गई. उससे पहले एसटीएफ और बाबूपुरवा पुलिस ने किदवई नगर में छापेमारी कर तीन आरोपितों को धर-दबोचा. एसटीएफ के मुताबिक, यमुना नगर, हरियाणा निवासी सचिन कुमार, खाड़ेपुर नौबस्ता निवासी मोहन सोनी और पशुपति नगर निवासी प्रशांत शुक्ला को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से मोबाइल भी बरामद किए गए हैं. सूचना मिलने पर कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण भी बाबूपुरवा थाने पहुंचे. उन्होंने आरोपितों से पूछताछ की.

एसटीएफ के डिप्टी एसपी टीबी सिंह ने बताया, “अब तक की जांच में सामने आया है कि दवा कोलकाता से मंगाई गई थी. आरोपितों के आगे का नेटवर्क खंगाला जा रहा है. यह पता लगाया जा रहा है कि दवा किन-किन शहरों में सप्लाई करने वाले थे.” पुलिस का दावा है कि मोहन सोनी का पश्चिम बंगाल निवासी अपूर्व मुखर्जी से लेनदेन चलता है. मोहन को अपूर्व से करीब एक लाख रुपये लेने थे. इसके बदले में अपूर्व ने इंजेक्शन की खेप भेजी. अपूर्व एक फार्मा कंपनी से जुड़ा है. हालांकि यह तर्क गले नहीं उतर रहा है. किसी का अगर पैसा उधार होगा तो वो उसके बदले में इंजेक्शन क्यों लेगा. वहीं पुलिस का दूसरा तर्क है कि मोहन ने इसकी जानकारी फेसबुक पर शेयर की और इंजेक्शन उपलब्ध होने की बात लिखी. कुछ इंजेक्शन लेने के लिए हरियाणा से सचिन आया था. इस मामले के खुलासे के लिए दो टीमों का गठन किया गया है. एक टीम पश्चिम बंगाल रवाना की जाएगी. दूसरी टीम को शातिरों के पास से मिले मोबाइल नंबरों की सीडीआर खंगालने व इस गोरखधंधे में संलिप्त अन्य लोगों की तलाश करने के लिए लगाया गया है. पुलिस ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया कि पूरी खेप आरोपी किसको पहुंचाने वाले थे. हालांकि, यह स्पष्ट है कि इतनी अधिक संख्या में इंजेक्शन किसी दवा कारोबारी के जरिये ही खपाने की तैयारी थी. सूत्रों के मुताबिक, पुलिस दवा कारोबारियों को बचाने की कोशिश में जुट गई है. यही वजह है कि खेप किसके पास पहुंचनी थी, इसे स्पष्ट नहीं किया गया. कानपुर पुलिस कमिश्नर असीम अरुण बताते हैं, “आरोपियों का कृत्य मानवता के विरुद्ध बेहद गंभीर अपराध है. इसलिए आरोपियों पर एनएसए लगाया जाएगा. पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा, जो भी इसमें शामिल होगा सभी पर कार्रवाई होगी.”

उधर, आगरा में फर्जी रेमडेसिविर इंजेक्शन बेचने का मामला सामने आया है. आगरा के निजी अस्पताल में सीटी स्कैन में पाजिटिव आए संक्रमित मरीज का इलाज चला. अस्पताल को फार्मा कंपनी से रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मि‍ला. लिहाजा मरीज के तीमारदारों ने जुगाड़ लगाया और एक मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन ब्लैक में खरीदा. डॉक्टर के कहने पर मरीज ने 12 इंजेक्शन खरीद के दिए. इतने इंजेक्शन लगाने के बाद मरीज की हालत और बिगड़ गई. मरीज एस एन मेडिकल कालेज आगरा के आइसीयू में भर्ती है. आइएमए के एक पदाधि‍कारी डॉ. रमेश गुलाटी कहते हैं कि आगरा नकली दवाओं की मंडी है. ऐसे में यहां पर नकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की सप्लाई से इंकार नहीं किया जा सकता. औषधि‍ विभाग आगरा के अनुसार शहर के सरकारी और नि‍जी अस्पतालों को रेमडेसिविर इंजेक्शन सप्लाई किया गया है. इसके अलावा कहीं भी फर्जी इंजेक्शन बिकता पाया गया तो उसपर कार्रवाई की जाएगी. 

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