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राजनीति में परिवारवाद का प्रवेशद्वार बने पंचायत चुनाव

उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव को नेता अपने बेटे, बेटियों, पत्न‍ियों के लिए राजनीति में प्रवेश के मौके के रूप में देख रहे हैं. करीब सभी पार्टियों के नेताओं ने अपने करीबी रिश्तेदारों पर दांव लगाया है.

प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो
स्टोरी हाइलाइट्स
  • पंचायत चुनाव में इस बार युवा वर्ग से सबसे अधि‍क प्रत्याशी होने की संभावना है
  • जौनपुर के पूर्व सांसद धनंजय सिंह, माफि‍या अनिल दुजाना की पत्नी पंचायत चुनाव लड़ रही हैं
  • हाथरस में कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय और उनके भाई की पत्न‍ियां चुनाव मैदान में आमने-सामने हैं

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी सरगर्मी तेज है. चुनावी मैदान में कई दिग्गजों के आने से मुकाबला रोचक होता जा रहा है. पंचायत चुनाव में इस बार युवा वर्ग से सबसे अधि‍क प्रत्याशी होने की संभावना है. पंचायत चुनाव को नेता अपने बेटे, बेटियों, पत्न‍ियों के लिए राजनीति में प्रवेश के मौके के रूप में देख रहे हैं.

जौनपुर जिले में पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह ने शनिवार, 3 अप्रैल  को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए नामांकन किया. वह वार्ड संख्या 45 (सिकरारा तृतीय) से उम्मीदवार हैं. श्रीकला सिंह के नामांकन के बाद जिले के सियासी हलके में खलबली मची हुई है. उनके पति धनंजय सिंह हाल में ही जेल से जमानत पर छूटे हैं और उसके बाद फरार हैं. लखनऊ में हुए अजीत सिंह हत्याकांड में साजिश रचने के आरोपी धनंजय की पुलिस को तलाश है.

कई आपराधि‍क मुकदमों में घिरे अनिल दुजाना ने भी अपनी पत्नी को पंचायत चुनाव में उतारने की तैयारी की है. अनिल दुजाना गौतमबुद्ध नगर जिले का रहने वाला है. दुजाना पर 20 से ज्यादा हत्या, लूट, जानलेवा हमले समेत कई मामले दर्ज हैं. अनिल दुजाना ने वर्ष 2016 के पंचायत चुनाव में गौतमबुद्ध नगर के वार्ड नंबर दो से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी, लेकिन इस बार सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए आरक्षित है. इस कारण अनिल चुनाव नहीं लड़ सकता, इसलिए उसने पत्नी पूजा को मैदान में उतारने की तैयारी की है. अनिल दुजाना के वकील जितेंद्र नागर ने पूजा नागर के नाम से 250-250 रुपये दो नामांकन पत्र भी खरीदे हैं. जितेंद्र नागर के मुताबिक बताया कि पूजा वार्ड नंबर दो से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ेंगी. अनिल दुजाना ने पूजा के साथ 16 फरवरी, 2021 को शादी की थी. शादी से एक दिन पहले ही अनिल दुजाना जमानत पर जेल से बाहर आया था. वहीं, फरवरी 2019 में सूरजपुर कोर्ट में पेशी के दौरान दोनों ने सगाई की थी. 22 वर्षीय पूजा बागपत के घिटौरा गांव की रहने वाली हैं और उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की है.

गौतमबुद्ध नगर में जिला पंचायत के पूर्व सदस्य रहे संजय भाटी ने बसपा में शामिल होने के बाद बेटे अक्षय चौधरी को चुनाव में उतारा है. संजय भाटी पूर्व दादरी विधायक समीर भाटी के चचेरे भाई हैं. वहीं गौतमबुद्ध नगर में जिला पंचायत के पूर्व चेयरमैन बिजेंद्र सिंह भाटी ने भी बसपा का दामन थामने के बाद अपने बेटे अमन भाटी को चुनाव में उतारा है.

पंचायत चुनाव के इस बढ़े आकर्षण की एक बड़ी वजह पंचायतों में पहुंचने वाला धन भी है. 14 वें वित्त आयोग के बाद से पंचायतों को बड़ा आवंटन मिलना शुरू हुंआ है. 15वें वित्त आयोग ने वर्ष 2020-21 समेत पिछले छह वर्षों में 47,764 करोड़ रुपए के आवंटन पर सहमति दी है. अगले पांच वर्षों (2021-22 से 2025-26) में नवनिर्वाचित प्रतिनिधि‍यों के माध्यम से 38 हजार करोड़ रुपए से अधि‍क खर्च होने वाले हैं. कई ग्राम पंचायतों को अच्छे प्रदर्शन के जरिए पिछले पांच साल में एक करोड़ से अधि‍क का बजट मिला है. राज्य वित्त आयोग और अन्य मदों से मिलने वाली राशि‍ इसके अलावा है. लखनऊ के विद्यांत कालेज में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनीष हिंदवी बताते हैं, “पंचायतों में विभि‍न्न पदों पर रहे लोगों की राजनीतिक हलकों में भूमिका और पंचायत को मिलने वाली राशि‍ वरिष्ठ नेताओं की अगली पीढ़ी को आकर्ष‍ित कर रही है. यही वजह है कि नेताओं ने अपने बेटे-बेटियों को पंचायत चुनाव में उतार दिया है.” हालांकि पंचायत चुनाव की होड़ ने राजनीतिक परिवारों में भीतरी जंग की भी शुरूआत की है. इसी क्रम में 2 अप्रैल को यूपी पंचायत चुनाव में भाजपा के उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होते ही हाथरस जिले में सियासत परवान चढ़ गई. इस लिस्ट के जारी होते ही प्रदेश के कद्दावर नेता पूर्व ऊर्जा मंत्री रामवीर उपाध्याय के परिवार की कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई. पहली बार रामवीर ने प्रेस कान्फ्रेंस की और अपने छोटे भाई मुकुल उपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाए. हालांकि मुकुल भी अपने भाई से माफी मांगते रहे. उल्लेखनीय है कि लंबे समय से जिले के कद्दावर नेता रामवीर उपाध्याय के परिवार में कलह चल रही है. रामवीर के छोटे भाई मुकुल उपाध्याय की पत्नी रितु उपाध्याय ने हाथरस के वार्ड संख्या 14 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में जिला पंचायत सदस्य के रूप में नामांकन किया है. इससे यह साफ हो गया है कि देवरानी रि‍तु उपाध्याय का अपनी जेठानी पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय से मुकाबला होगा. रामवीर की पत्नी सीमा जिला पंचायत अध्यक्ष और सांसद रह चुकी हैं.

अयोध्या में समाजवादी पार्टी ने जेल में बंद आइपीएस अधिकारी अरविंद सेन यादव की पत्नी प्रियंका सेन यादव और अरविंद सेन के छोटे भाई पूर्व मंत्री आनंद सेन यादव की पत्नी इंदू सेन यादव को जिला पंचायत सदस्य का उम्मीदवार बनाया है. प्रियंका सिंह यादव को हैरिंग्टनगंज प्रथम से और आनंद सेन यादव की पत्नी इंदू सेन यादव को हैरिंग्टनगंज तृतीय से चुनाव लड़ेंगी. देवरानी, जेठानी के चुनाव मैदान में उतरने से चर्चाओं का बाजार गर्म है. बता दें आइपीएस अरविंद सेन यादव और पूर्व मंत्री आनंद सेन यादव अयोध्या जनपद के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय मित्रसेन यादव के पुत्र हैं. प्रियंका सेन यादव के पति आइपीएस अरविंद सिंह यादव पशुपालन घोटाले में काफी समय तक फरार रहने के बाद इस समय जेल में बंद हैं. वहीं इंदू सेन यादव के पति पूर्व मंत्री आनंद सेन यादव सपा से ही विधायक रह चुके हैं और बसपा में यह मंत्री भी थे.

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