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शख्स‍ियत: भूमाफि‍याओं की नकेल कसेगा सेल्वा का सॉफ्टवेयर

मुख्यमंत्री योगी की प्रेरणा से मुजफ्फरनगर की जिलाधि‍कारी सेल्वा कुमारी जयराजन ने तैयार कराया भूमाफि‍या विरोधी सॉफ्टवेयर 'धरा'. इस सॉफ्टवेयर के चलते मुजफ्फरनगर में भूमाफिया किसी सरकारी जमीन को न तो बेच सकेगा और न ही उस पर कब्जा कर सकेगा.

मुजफ्फरनगर की ज‍िलाध‍िकारी सेल्वा कुमारी जयराजन मुजफ्फरनगर की ज‍िलाध‍िकारी सेल्वा कुमारी जयराजन
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इस सॉफ्टवेयर को मकर संक्रांति के दिन मुजफ्फरनगर की डीएम सेल्वा कुमारी आधिकारिक रूप से लॉन्च करेंगी
  • 'धरा' भू-माफिया विरोधी सॉफ्टवेयर जीआइएस बेस आधारित है
  • इसमें गूगल मैपिंग के जरिये ग्राम समाज भूमि, तालाब, चारागाह आदि की ब्यौरा दिखेगा

'भारत का चीनी बाउल' नाम से मशहूर यूपी के मुजफ्फरनगर जिले में करीब डेढ़ साल पहले जिलाधि‍कारी के रूप में तैनात होने वाली सेल्वा कुमारी जयराजन को इस जिले में लंबे समय से चल रहे जमीन से जुड़े विवादों की जानकारी हुई थी. सेल्वा ने जब जमीनों पर हुए अवैध कब्जों के बारें में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कराई तो पता चला कि जमीनों की “डुप्लीकेसी” बहुत है. एक ही जमीन कई श्रेणियों में सरकारी दस्तावेजों में दर्ज है. जब भी कोई नया अफसर जिले में आता था तो उसे इन जमीनों के बारे में जानकारी जुटाने में काफी लंबा समय लग जाता था. इसी का फायदा भूमाफि‍या उठा रहे थे. जिले के सरकारी दस्तावेजों में कहीं एक जगह इस बात का रिकॉर्ड नहीं था कि किन जमीनों पर अवैध कब्जे हैं. वहीं दूसरी ओर आम जनता को भी इस बात की जानकारी नहीं होती थी कि वह जो जमीन खरीदने जा रहे हैं वह कहीं तलाब की तो नहीं है. या फि‍र जो जमीन खरीद रहे हैं वह विवादित तो नहीं है. भूमाफि‍या सरकारी जमीन के दस्तावेजों में हेरफेर करके इसे जनता को बेच देते हैं. एक जमीन को कई-कई बार बेच दिया जाता है.

मुजफ्फरनगर की जांच में सेल्वा कुमारी जे. को बड़ी संख्या में जनता के ऐसी जमीनों के चक्कर में फंसकर परेशान होने की जानकारी मिली. उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी राज्य में भूमाफि‍याओं के खि‍लाफ अभि‍यान चला रखा था. सेल्वा कुमारी जे. के सामने सबसे बड़ी समस्या ऐसी जमीनों को चिन्हित करने की चुनौती थी. इसके लिए इन्होंने एक ऐसा सॉफ्टवेयर तैयार करने का खाका खींचा जिससे जिले की सभी जमीनों के बारे में सही जानकारी मिल सके. इसके लिए एक निजी कंपनी की सहायता ली गई. जिले की सभी तहसीलों के अधि‍कारियों को इस सॉफ्टवेयर में जमीन से जुड़ी जानकारियों की युद्ध स्तर पर फीडिंग कराने का निर्देश दिया गया. सेल्वा कुमारी जे. ने पूरी प्रक्रिया की अपने स्तर पर निगरानी की. कोरोना महामारी के कारण इस कार्य में कुछ विलंब हुआ बावजूद इसके दो महीने के भीतर सॉफ्टवेयर बनकर तैयार हो गया. सेल्वा कुमारी जे. ने इस सॉफ्टवेयर को “धरा” नाम दिया. इस भू-माफिया विरोधी सॉफ्टवेयर को मकर संक्रांति के दिन डीएम सेल्वा कुमारी आधिकारिक रूप से लॉन्च करेंगी. इस सॉफ्टवेयर के चलते मुजफ्फरनगर में कोई भूमाफिया किसी भी सरकारी जमीन को ना तो बेच सकेगा और ना ही किसी सरकारी जमीन, तालाब, तथा चारागाह पर कब्जा ही कर सकेगा. जिन सरकारी जमीनों पर भूमाफिया ने कब्जा किया है, उन्हें भी खाली कराने में भी यह सॉफ्टवेयर बहुत उपयोगी साबित होगा. "धरा" भू-माफिया विरोधी सॉफ्टवेयर जीआईएस बेस आधारित है. इसमें गूगल मैपिंग के जरिये ग्राम समाज भूमि, तालाब, चारागाह आदि की ब्यौरा दिखेगा. जिले में कितनी सरकारी जमीन अतिक्रमण हुआ है और कितनी जमीन अतिक्रमण मुक्त है? किस-किस सरकारी जमीन पर कोर्ट में सुनवाई हो रही है? और कितनी सरकारी जमीन को लीज पर दिया गया है? इसका भी उल्लेख होगा. विकास प्राधिकरणों का मास्टर प्लान भी सॉफ्टवेयर के जरिये देखा जा सकेगा. प्राधिकरण के अधीन कुल कितनी ग्रीन बेल्ट है? इस साफ्टवेयर के जरिये यह भी पता चलेगा कि कौन-सी जमीन पर निर्माण हो सकेगा और किसी जमीन पर नहीं? इस जानकारी के चलते कोई भूमाफिया ग्रीन बेल्ट की जमीन को गलत तरीके से ना तो बेच सकेगा और ना ही उसपर कब्जा कर सकेगा.   

इतना ही नहीं गांव में भी ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ इस सॉफ्टवेयर के चलते कार्रवाई करने में प्रशासन को आसानी होगी. इसके चलते जिले में जमीनी विवाद और अतिक्रमण की समस्या का स्थायी समाधान किया जा सकेगा. ग्राम समाज की जमीन का समूचा ब्यौरा गूगल मैप के जरिये इस सॉफ्टवेयर में दर्ज होने के चलते यह संभव होगा. ऐसे में जब भी ग्राम समाज की जमीन को कोई भूमाफिया बेचने का प्रयास करेगा तो वह प्रकरण राजस्व विभाग के संज्ञान में आ जाएगा और राजस्व विभाग के अफसर भूमाफिया के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करेंगे. तालाब और चरागाहों पर कब्जा करने वालों के खिलाफ भी इस सॉफ्टवेयर के चलते त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य में माफि‍याओं-अपराधि‍यों से मुक्त कराई गई जमीन पर जिलों में उद्योग-धंधे लगाने की योजना तैयार की जा रही हैं. जिसके तहत प्रदेश सरकार ने हर जिले में एक लैंड बैंक बनाकर जमीन और संप‍त्त‍ियों की जियो टैंगिंग करने की तैयारी शुरू की है. इस कार्य में मुजफ्फरनगर का धरा सॉफ्टवेयर काफी उपयोगी साबित होने जा रहा है.  

चेन्नै की रहने वाली सेल्वा कुमारी की प्रारंभि‍क शि‍क्षा इसी शहर में हुई. इन्होंने मद्रास विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर प्राप्त करने के बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ पब्ल‍िक पॉलि‍सी में डिग्री प्राप्त की. वर्ष 2006 में इनका चयन सिविल सेवा में हुआ. वर्ष 2006 बैच की आइएएस अफसर सेल्वा कुमारी जयराजन कासगंज, कन्नौज, बहराइच, एटा, फतेहपुर, इटावा और फिरोजाबाद में भी डीएम रहीं हैं. इन सभी जिलों में उन्होंने यह पाया था कि गांव में ग्राम समाज की भूमि पर भूमाफिया कब्जा कर उसे बेच देते हैं और बाद में जब ऐसे प्रकरणों की शिकायत राजस्व विभाग को मिलती है तो कार्रवाई की जाती है. इन सभी जिलों में इन्होंने भूमाफि‍याओं के खि‍लाफ कड़ा अभि‍यान चलाया था. तेजतर्रार अफसर की छवि के चलते सेल्वा कुमार जे. को कई सारे पुरस्कार भी मिले हैं. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा महिला कल्याण, स्वास्थ्य और स्वच्छता में अग्रणी कार्य करने के लिए नारी शक्ति‍ पुरस्कार, निकायों और उद्योग विभाग के विभि‍न्न पुरस्कारों सहित ट्रस्ट अधारित बिलिंग के लिए पुरस्कार, क्लाउड अधारित शहरी बिलिंग और केस्को कानपुर के प्रमुख के रूप में नवाचारों के लिए भारत सरकार से इन्हें पुरस्कृत किया जा चुका है. जुलाई 2019 में मुजफ्फरनगर की पहली महिला जिलाधि‍कारी के तौर पर भी सेल्वा कुमार जे. ने इस जिले में कई नवाचार करके चीनी के लिए प्रसिद्ध इस जिले को नई पहचान दिलाई है.

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