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देश में सबसे जल्दी कानपुर में दौड़ेगी अनोखी खूबियों वाली मेट्रो

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कानपुर में मेट्रो रेल का पहला ट्रॉयल रन नवंबर, 2021 में शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है.

तेजी से चल रहा कानपुर मेट्राे का न‍िर्माण कार्य तेजी से चल रहा कानपुर मेट्राे का न‍िर्माण कार्य
स्टोरी हाइलाइट्स
  • 15 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री योगी द्वारा कानपुर मेट्रो के सिविल निर्माण का शुभारंभ हुआ था
  • फरवरी, 2022 में कानपुर में आइआइटी से मोतीझील के बीच पहली मेट्रो ट्रेन चलेगी
  • मेट्रो स्टेशनों के कॉनकोर्स का आधार तैयार करने के लिए डबल टी-गर्डर्स का प्रयोग किया गया है

निर्माण कार्य पूरा कर मेट्रो ट्रेन चलाने के मामले में कानपुर मेट्रो ने एक नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिया है. दिल्ली में मेट्रो का पहला कॉरिडोर तैयार करने में करीब चार वर्ष का समय लगा था जिसे लखनऊ मेट्रो ने तीन साल में पूरा कर एक रिकॉर्ड बना दिया था. अब कानपुर मेट्रो लखनऊ के रिकॉर्ड को तोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कानपुर में मेट्रो रेल का पहला ट्रॉयल रन नवंबर, 2021 में शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. शासन ने भी स्पष्ट कर दिया है कि फरवरी 2022 में कानपुर में आइआइटी से मोतीझील के बीच पहली मेट्रो ट्रेन चलेगी. यानी तीन साल के लखनऊ मेट्रो के समय से काफी पहले कानपुर मेट्रो का संचालन शुरू हो जाएगा. 

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लि. (यूपीएमआरसी) के तत्वाधान में कानपुर मेट्रो परियोजना के सिविल निर्माण को 15 नवंबर को एक साल पूरे हो गए हैं. शहर की विस्तृत आबादी, जनसंख्या घनत्व और यातायात की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के संयुक्त प्रयासों से कानपुर में 8 मार्च, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में कानपुर मेट्रो परियोजना का शिलान्यास हुआ था. उसके बाद 15 नवंबर, 2019 को हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), आवास और शहरी कार्य मंत्रालय, की मौजूदगी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आइआइटी, कानपुर से परियोजना के सिविल निर्माण कार्य का आरंभ किया गया. 

नए प्रयोगों ने बनाया कानपुर मेट्रो को ख़ास
यूपी मेट्रो के प्रबंध निदेशक कुमार केशव के नेतृत्व में मेट्रो इंजीनियरों की टीम ने कानपुरवासियों को निर्धारित समय-सीमा के अंतर्गत मेट्रो सेवाओं की सौगात देने के उद्देश्य के साथ कई नवोन्मेष किए और देश की अन्य मेट्रो मेट्रो परियोजनाओं के लिए नए प्रतिमान स्थापित किए. यूपी मेट्रो ने कानपुर मेट्रो परियोजना के अंतर्गत मेट्रो स्टेशनों के कॉनकोर्स (उपरिगामी स्टेशन का पहला तल) का आधार तैयार करने के लिए डबल टी-गर्डर्स का प्रयोग किया, जो देश में पहली बार था. इन डबल टी-गर्डर्स का प्रयोग निर्माण कार्य की रफ़्तार को बढ़ाने और मेट्रो ढांचे की सुंदरता या फ़िनिशिंग को बेहतर बनाने के लिए किया गया. मेट्रो इंजीनियरों की टीम, लखनऊ मेट्रो परियोजना के अनुभवों के आधार पर कानपुर मेट्रो परियोजना के निर्माण को पहले से कहीं बेहतर ढंग से अंजाम दे रही है. आमतौर पर मेट्रो स्टेशनों का कॉनकोर्स तैयार करने के लिए सिंगल टी-गर्डर का इस्तेमाल होता है. लेकिन कानपुर मेट्रो में एलिवेटेड (उपरिगामी) मेट्रो स्टेशनों के कॉनकोर्स फ़्लोर की स्लैब तैयार करने के लिए डबल टी-गर्डर का इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि निर्माण कार्य में लगने वाले समय की बचत हो और साथ ही, स्ट्रक्चर की फ़िनिशिंग भी बेहतर हो सके.

ट्रैफ़िक जाम से बचाने के इंतज़ाम
कानपुर मेट्रो की निर्माण गतिविधियों के चलते शहरवासियों को यातायात की समस्याओं से न जूझना पड़े, इसके लिए कानपुर में यूपी मेट्रो के इंजीनियरों ने एक और नया प्रयोग किया. कानपुर में आइआइटी से मोतीझील के बीच प्रयॉरिटी कॉरिडोर या प्राथमिक सेक्शन का निर्माण कार्य चल रहा है. इस कॉरिडोर के अंतर्गत, स्थान विशेष पर सड़क पर होने वाली निर्माण गतिविधियां पूरी होने के बाद मेट्रो कॉरिडोर की बैरिकेडिंग को संकरा कर दिया जाता है और कॉरिडोर में पौधा रोपण के लिए लगाए जाने वाले कर्ब स्टोन की ढलाई के बाद बैरिकेडिंग को हटा लिया जाता है. 9 किमी लंबे प्रयॉरिटी कॉरिडोर पर दोनों शिफ़्टों में 25-30 ऐसे स्पॉट चयनित किए जाते हैं, जहां ट्रैफ़िक जाम की आशंका अधिक होती है और जहां पर ट्रैफिक डायवर्जन के चलते अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है. इन सभी जगहों पर दिन-रात मेट्रो के लगभग 50 मार्शल्स तैनात रहते हैं, जो ट्रैफ़िक को सुचारू रूप से चालू रखने में मदद करते हैं.

इस तरह आगे बढ़ रही कानपुर मेट्रो 
#15 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री आदित्यनाथ द्वारा कानपुर मेट्रो के सिविल निर्माण का शुभारंभ.
#31 दिसंबर, 2019 को आइआइटी से मोतीझील के बीच बन रहे प्रयॉरिटी कॉरिडोर का पहला पियर (पिलर) तैयार हुआ. 9 किमी. लंबे प्राथमिक सेक्शन में कुल 506 पियर (पिलर) तैयार होने हैं, जिनमें से अभी तक 294 पियर तैयार हो चुके हैं.
#20 जनवरी, 2020 को लखनपुर कास्टिंग यार्ड में यू-गर्डर्स की कास्टिंग शुरू हुई. एक यू-गर्डर 27 मीटर लंबा और लगभग 4 मीटर चौड़ा होता है, जिसका वजन लगभग 150 टन होता है.
#2 मार्च, 2020 को पियर कैप इरेक्शन (परिनिर्माण) की शुरुआत हुई. 9 किमी. लंबे प्राथमिक सेक्शन में कुल 300 पियर कैप रखे जाने हैं, जिसमें से 132 रखे जा चुके हैं. मेट्रो पियर (पिलर) के ऊपरी हिस्से में फिट होता है पियर कैप. इन पियर पर ही यू-गर्डर बिछाकर तैयार होता है मेट्रो ट्रैक का आधार.
#25 जुलाई, 2020 को यूपी मेट्रो ने आइआइटी मेट्रो स्टेशन के कॉनकोर्स के लिए पहला डबल टी-गर्डर रखा. सिर्फ़ 2.5 महीने में यूपी मेट्रो ने 100 डबल टी-गर्डर्स का इरेक्शन पूरा कर लिया. प्रयॉरिटी कॉरिडोर के 9 मेट्रो स्टेशनों के लिए कुल 384 डबल टी-गर्डर रखे जाने हैं, जिनमें से अभी तक 165 रखे जा चुके हैं.
#11 अगस्त, 2020 को मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन की उपस्थिति में प्रयॉरिटी कॉरिडोर में आइआइटी, कानपुर के नज़दीक से यू-गर्डर इरेक्शन की शुरुआत हुई. पहले ही दिन, रात में दो यू-गर्डर रखे गए. सिर्फ़ 67 दिनों के भीतर यू-गर्डर इरेक्शन की सेंचुरी पूरी की गई. प्राथमिक सेक्शन में कुल 638 यू-गर्डर रखे जाने हैं, जिनमें से अभी तक 142 यू-गर्डर्स रखे जा चुके हैं. 

दिल्ली, लखनऊ और कानपुर मेट्रो निर्माण में अंतर 
#दिल्ली के पहले कॉरिडोर में शाहदरा से मेट्रो परियोजना का आरंभ 24 सितंबर 2002 को हुआ था. परियोजना के पूरा होने में चार वर्ष लगे थे. 
#लखनऊ मेट्रो का काम 27 सितंबर 2004 को शुरू हुआ था. करीब तीन वर्ष बाद 5 सितंबर 2017 को मेट्रो को कामर्शियल संचालन शुरू हुआ. 
#कानपुर में आइआइटी से मोतीझील के बीच मेट्रो का निर्माण कार्य 15 नवंबर 2019 को शुरू हुआ. नवंबर 2021 में पहला ट्रॉयल रन शुरू करने का लक्ष्य निर्धारित है. 
#दिल्ली मेट्रो का पहला कॉरिडोर 8.4 किलोमीटर का था, लखनऊ मेट्रो का 8.5 किलोमीटर का था. कानपुर मेट्रो का पहला कॉरिडोर 8.728 किलोमीटर का है.

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