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ऊहापोह में मनोहर पर्रिकर, किस पार्टी की पसंद के बुत को कहें हां

गोवा के मुख्यमंत्री इस समय गठबंधन धर्म के संकट में फंस गए हैं...किस दल की माने मांग और किस दल को कहें न.

बुतों को लेकर आमने सामने सहयोगी राजनीतिक दल बुतों को लेकर आमने सामने सहयोगी राजनीतिक दल

गोवा के सत्तारूढ़ गठबंधन के तीन घटक दलों में महापुरुषों के बुतों को लेकर ठन गई है. इसकी शुरुआत गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफपी) से हुई जिसने विधानसभा परिसर में जैक सेक्वेइरा की मूर्ति लगाने की मांग की.

1967 में गोवा के महाराष्ट्र में विलय को रोकने में जैक की महत्वपूर्ण भूमिका थी. लेकिन महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी चाहती थी कि वहां समाजवादी नेता राम मनोहर लोहिया की मूर्ति लगाई जाए. भाजपा विधायक यहां छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा लगाने के पक्षधर हैं.

भाजपा विधायक राजेश पाटनेकर ने दावा किया कि उनके क्षेत्र डिकोलिम से शिवाजी का नाता था. तो एमजीपी के मुखिया दीपक धवलीकर यह चाहते हैं कि विधानसभा परिसर में टी.बी. कुन्हा की प्रतिमा लगाई जाए, जिन्होंने 1961 में पुर्तगालियों से गोवा को मुक्त कराने के आंदोलन का नेतृत्व किया था.

जीएफपी के नेता सरदेसाई कहते हैं कि सबसे पहले एमजीपी को अपने नाम से 'महाराष्ट्र' शब्द हटा लेना चाहिए.

इससे मुख्यमंत्री मनोहर पर्रीकर दुविधा में हैं. वे न तो सेक्वेइरा की प्रतिमा लगाने का विरोध कर सकते हैं और न ही समर्थन. हालांकि पहले भाजपा और एमजीपी, दोनों ने बुत लगाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था.

उनका मानना था कि मुख्यमंत्री दयानंद बंडोडकर की प्रतिमा लगी हुई है और किसी अन्य प्रतिमा की जरूरत नहीं है. लेकिन जब डिप्टी स्पीकर माइकल लोबो (भाजपा) और पूर्व मुख्यमंत्री चर्चिल अलेमाओ (जीएफपी) ने सेक्वेइरा की प्रतिमा लगाने की मांग का समर्थन किया तो दोनों दलों ने रवैया बदल लिया.

फिलहाल मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की तबियत ठीक नहीं है. लेकिन देखते हैं कि तबियत ठीक होने के बाद किसी पार्टी की पसंद का बुत लगवाएंगे? और दूसरी पार्टी को कैसे समझाएंगे?

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