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शख्स‍ियत: सड़कों से लोक निर्माण करते केशव

यूपी सरकार में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने लोक निर्माण विभाग में ई-टेंडरिंग, क्रॉस चेकिंग और रिसाइक्लिंग की व्यवस्था लागू कर नई कार्य संस्कृति को जन्म दिया है. पहली बार शहीदों और मेधावियों के सम्मान में उनके घर तक सड़कें बनाने की प्रथा शुरू हुई है.

केशव प्रसाद मौर्य केशव प्रसाद मौर्य
स्टोरी हाइलाइट्स
  • यूपी में पहली बार प्लास्ट‍िक कचरे का उपयोग करके 1,500 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है
  • प्रदेश की 2,275 बसावटों में 1,407 करोड़ रुपए की लागत से संपर्क मार्ग बनाना शुरू हुआ
  • यूपी में प्रतिदिन 10 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण हो रहा है

उत्तर प्रदेश में मार्च 2017 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार बनने के बाद से पार्टी के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष और फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री और लोकनिर्माण विभाग के कैबिनेट मंत्री जैसा महत्वपूर्ण ओहदा देकर सरकार में नंबर दो की हैसियत दी गई. सरकार बनने के बाद जब केशव प्रसाद मौर्य ने अपने विभाग के कामकाज की पड़ताल की तो पता चला कि सड़कों और सेतुओं के निर्माण का महत्पपूर्ण कार्य करने वाले लोक निर्माण विभाग में अधि‍कारियों और ठेकेदारों का गठजोड़ भ्रष्टाचार की धुरी बना हुआ था. केशव के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस गठजोड़ को समाप्त करने की थी. इससे निबटने के लिए केशव ने सबसे पहले विभाग के कामकाज में पारदर्श‍िता लाने के लिए ई-टेंडरिंग की व्यवस्था लागू की. दूसरे चरण में विभाग के कार्यों की जांच के लिए “क्रॉस चेकिंग” की व्यवस्था शुरू की गई. जांच में दोषी पाए गए अधि‍कारियों पर कड़ी कार्रवाई की गई. लोक निर्माण में सबसे ज्यादा 250 से अधि‍क अधि‍कारियों पर प्रतिकूल प्रवि‍ष्टि‍, पदावनति और सेवा समाप्त जैसी कार्रवाई की गई. बनने वाली सड़कों की गुणवत्ता जांचने के लिए न केवल अत्याधुनिक मशीनें लगाई गईं बल्कि‍ पहली बार एक क्षेत्र के अधि‍कारियों को दूसरे क्षेत्र के अधि‍कारि‍यों के इलाके में जांच करने को भेजा गया. इन अधि‍कारियों को कहां जांच करने जाना है, उसकी जानकारी सुबह‍ एक सील बंद लिफाफे में देकर उसी वक्त जांच के लिए रवाना करने की प्रथा शुरू की गई.

सड़कों की जांच करने के दौरान केशव ने पाया कि सड़क टूटने पर उसके ऊपर दूसरी सड़क बनाई गई. इस तरह सड़क के ऊपर नई सड़क की परत बनती रही. नतीजा आबादी क्षेत्र में सड़क ऊपर उठती चली जाती थी और लोगों के घर नीचे रह जाते थे. इसका नुकसान यह होता था कि बारिश के वक्त घरों में पानी घुसने जैसी समस्याएं पैदा हो रही थीं. दूसरी ओर पानी के जमाव से सड़कें भी जल्दी खराब हो रही थीं. हर बार बनी सड़क के टूटने पर ठेकेदार नई सड़क बनाकर विभाग से पैसे भी वसूल रहा था. इस गड़बड़ी को रोकने के लिए केशव ने पहली बार “रिसाइक्ल‍िंग” की व्यवस्था लागू की. इसमें टूटने वाली सड़क के ऊपर नई सड़क न बनाकर उसी सड़क की गिट्टी को निकालकर उसे ठीक कर सड़क बनाई गई. सड़क के किनारे नाली बनाकर पानी की निकासी का इंतजाम किया गया. इसका फायदा यह हुआ कि सड़क का लेवल बरकरार रहा और नई बनी सड़क ज्यादा टिकाऊ साबित हुई. “रिसाइक्ल‍िंग” की व्यवस्था से लोक निर्माण विभाग ने लंबे समय तक टिकाऊ और पर्यावरणीय मित्र सड़कों का निर्माण किया. इससे 40 लाख 31 हजार घन मीटर पत्थर की बचत हुई और नतीजा विभाग के 1,246 करोड़ रुपए बचे. विभागीय अनुमान के मुताबिक, “रिसाइक्लिंग” की तकनीकी के चलते 1.59 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को भी रोका गया. यह आंकड़ा करीब 3 लाख 83 हजार कार के जरिए एक साल में होने वाले कार्बन उत्सर्जन के बराबर है. चार करोड़ 13 लाख करोड़ पेड़ लगाने से 10 वर्ष में 1.59 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है. देश का प्रतिवर्ष कार्बन उत्सर्जन 1,500 मिलियन टन है. इस तरह से लोक निर्माण विभाग की सड़कों ने पर्यावरण को भी अपना योगदान दिया है.

उपमुख्यमंत्री बनने के करीब एक महीने बाद केशव प्रसाद मौर्य आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से होकर हरदोई में एक कार्यक्रम में शि‍रकत करने जा रहे थे. रास्ते में उन्होंने देखा कि एक्सप्रेसवे के किनारे बसें गांवों को सर्विस रोड के जरिए कनेक्ट‍िविटी नहीं दी गई है. केशव ने एक्सप्रेसवे पर रुक कर भी गांव वालों से बातचीत की तो पता चला कि संपर्क मार्ग न होने से उन्हें आने-जाने में काफी कठिनाई होती है. इसके बाद केशव ने फौरन विभागीय अधि‍कारियों से ऐसे गांवों में सड़क पहुंचाने की योजना तैयार करने को कहा. इसके बाद प्रदेश के भीतर चाहे एक्सप्रेसवे, स्टेट हाइवे, नेशनल हाइवे हो या फि‍र सात मीटर या इससे चौड़ी कोई भी सड़क हो उस सड़क से पांच किलोमीटर अंदर तक जो भी गांव 250 तक की आबादी वाले थे, उनको मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए अभि‍यान चलाया गया. इसमें प्रदेश की 2,275 बसावटों में 1,407 करोड़ रुपए की लागत से संपर्क मार्ग बनाना शुरू हुआ. इसमें से 1,422 बसावटों में 1,800 किलोमीटर का संपर्क मार्ग बनाकर इसका लोकार्पण भी किया जा चुका है. इतना ही नहीं 2001 की जनगणना के हिसाब से प्रदेश में 1,900 गांव ऐसे भी थे जिनकी आबादी 250 के करीब थी लेकिन ये किसी भी सड़क से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हुए थे. ऐसे गांवों के लिए 184 करोड़ रुपए की लागत से सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है. केशव की निगरानी में लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश में 11,607 किलोमीटर के ग्रामीण मार्गों का निर्माण कराया है. करीब 13 हजार किलोमीटर का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण का कार्य किया गया है. भाजपा की सरकार बनने से पहले प्रदेश के सभी तहसील आपस में नहीं जुड़े हुए थे. तहसील और ब्लॉक को टू-लेन सड़कों से जोड़ने के लिए 387 करोड़ की लागत से 222 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण शुरू किया गया है. इस तरह यूपी में प्रतिदिन 10 किलोमीटर लंबी नई सड़कों का निर्माण हो रहा है और रोज 11 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण या सुदृढ़ीकरण हो रहा है. औसतन हर तीसरे दिन एक सेतु बनाने का काम हो रहा है.

केशव प्रसाद मौर्य ने लोक निर्माण विभाग की छवि सुधारने के क्रम में सड़कों के निर्माण में लोगों की भावनाओं का भी ख्याल रखा. पहली बार मेधावी छात्रों के घर तक सड़कें पहुंचायी गईं. वर्ष 2017-18 में यूपी बोर्ड की परीक्षा की मेरिट सूची में जिन विद्यार्थि‍यों ने टॉप टेन में जगह बनाई थी उनके घरों तक सड़कें बनाई गईं. इस सड़क का नाम “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गौरवपथ” रखा गया. सड़क के किनारे लगे बोर्ड पर मेधावी विद्यार्थी का नाम और उसकी फोटो लगाई गई. इस सड़क का शि‍लान्यास और लोकार्पण भी उसी मेधावी विद्यार्थी से कराने की प्रथा शुरू की गई. इसका बड़ा व्यापक प्रभाव पड़ा. एक मेधावी छात्र जिसके घर तक सड़क बनी थी जब उसके पास लोक निर्माण विभाग के अधि‍कारी सड़क निर्माण के लिए सर्वे करने गए तो उसने कहा कि उसके विद्यालय तक जाने की सड़क बहुत खराब है. छात्र ने अपने घर की सड़क बनाने की बजाय विद्यालय की सड़क बनाने का निवेदन किया. यह जानकारी मिलने के बाद केशव ने न केवल उसके विद्यालय तक सड़क बनवायी बल्कि‍ अपनी योजना को संशोधि‍त कर यह प्रावधान किया कि जिस विद्यालय से टॉपर विद्यार्थी निकलेंगे उस विद्यालय तक भी “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गौरवपथ” के रूप में सड़कें बनाई जाएंगी. इस प्रकार 2017-18 में “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गौरवपथ” के रूप में कुल 24 सड़कों का निर्माण किया गया. 2018-19 में इस योजना का दायरा बढ़ाया गया. इसमें टॉप 20 विद्यार्थ‍ियों को शामिल किया गया. इस वर्ष “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गौरवपथ”  के रूप में कुल 89 सड़कों का निर्माण हुआ. इस तरह अबतक लोक निर्माण विभाग कुल 210 सड़कें “डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम गौरवपथ” के रूप में बना चुका है. इसमें 172 विद्यार्थी हाइस्कूल के और 38 विद्यार्थी इंटरमीडियट के हैं.

सड़कों के जरिए सेना और पुलिस के जवानों के प्रति आभार व्यक्त करने की प्रथा भी केशव ने ही शुरू की है. देश की रक्षा करने में शहीद होने वाले सेना के जवान या अपराधियों से जनता की रक्षा करने में अपनी जान गवाने वाले पुलिस के जवान की याद में उनके घर तक सड़क पहुंचाने  के लिए ”जय हिंद वीर पथ” के नाम से योजना भी शुरू हुई है. इतना ही नहीं खेल के क्षेत्र में देश और विदेश में उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले खि‍लाड़ियों के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए भी केशव मौर्य ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खि‍लाडि़यों के घर तक की सड़क को “मेजर ध्यान चंद विजय पथ” के नाम से बनाने की योजना शुरू की है. सड़कों के जरिए पर्यावरणीय संरक्षण की शुरुआत भी की गई है. नुकसानदेय प्लास्ट‍िक के कचरे को मशीनों के जरि‍ए दानों में तब्दील करके इनका उपयोग सड़क निर्माण में करना शुरू किया गया है. इन प्लास्ट‍िक के दानों का उपयोग करके पहले चरण में प्रदेश में 1,500 किलोमीटर लंबी सड़कें बनाने का लक्ष्य रखा गया है. कोरोना महामारी के दौरान हुए लॉकडाउन में यूपी में केशव ने लोक निर्माण विभाग से सभी 75 जिलों में कम्युनिटी किचेन संचालित कराए. लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों और अन्य जरूरतमंदों को 2 लाख 66 लंच पैकेट और डेढ़ लाख राशन के पैकेट बांटे गए. वर्ष 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले में शहीदों के परिवारों के लिए लोक निर्माण विभाग के हर कर्मचारी अधि‍कारी ने अपना एक दिन का वेतन दान में दिया जिससे हर शहीद के परिवार को 22 लाख रुपए की आर्थि‍क मदद दी गई.

सड़कों के जरिए यूपी में विकास को न्योता देने में जुटे केशव प्रसाद मौर्य का जन्म इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में शामिल रहे कौशांबी (अब अलग जिला) सिराथु तहसील के सिराथु गांव (वर्तमान में नगर पंचायत) में 7 मई 1969 को हुआ था. इनके पिता छोटे किसान थे. तीन भाई और तीन बहनों में केशव का नंबर तीसरा हैं. इनके परिवार की माली हालत ठीक नहीं थी ऐसे में केशव ने अपने पिता के साथ मजदूरी, चाय बेचने के अलावा कई ऐसे छोटे-छोटे काम किए जिसका एक गरीब परिवार से वास्ता रहता है. शुरुआती शिक्षा गांव के ही प्राइमरी विद्यालय में हुई. इसके पास के ही इन्होंने जूनियर हाइस्कूल से शि‍क्षा ग्रहण की. इसी दौरान यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क में आकर स्वयंसेवक बने. आगे की पढ़ाई के लिए वर्ष 1989 में प्रयागराज आ गए. इस दौरान केशव विश्व हिंदू परिषद में पूर्वी उत्तर प्रदेश के संगठन मंत्री ठाकुर गुरजन सिंह और विश्व हिंदू परिषद के महामंत्री अशोक सिंघल के संपर्क में आए. केशव को विश्व हिंदू परिषद के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के नाते प्रयागराज के यमुनापार इलाके के संगठन मंत्री की जिम्मेदारी मिली. इस वक्त तक रामजन्मभूमि आंदोलन गति पकड़ चुका था और इसमें केशव प्रसाद मौर्य भी सक्रियता से शामिल हुए.

संगठन का कार्य करते रहने के साथ केशव ने वर्ष 1993 हिंदी साहित्य सम्मेलन से साहित्य रत्न की उपाधि‍ ली. अयोध्या में विवादित ढांचा ध्वंस के बाद केशव विश्व हिंदू परिषद के गोरक्षा अभि‍यान के हिस्सा बने. विश्व हिंदू परिषद में विभाग और संभाग का काम देखने के बाद यह संगठन मंत्री के तौर पर दिल्ली पहुंचे. इसके बाद लंबे समय तक अयोध्या में प्रांत संगठन मंत्री के तौर पर काम किया. वर्ष 2002 में कुछ पारिवारिक वजहों से यह अपने घर लौट आए. इसके वर्ष 2004 में इलाहाबाद में शहर पश्च‍िमी विधानसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी के रूप में इन्होंने उपचुनाव लड़ा. यह उपचुनाव माफि‍या अतीक अहमद के सांसद बनने के बाद खाली हुई सीट पर हो रहा था. इस सीट पर अतीक का भाई चुनाव लड़ रहा था जो तत्कालीन बसपा विधायक राजूपाल हत्याकांड में मुख्य अभि‍युक्त था. वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में भी केशव ने चुनाव लड़ा था लेकिन सफलता नहीं मिली. इसके बाद वर्ष 2012 में केशव को सिराथु विधानसभा सीट से भाजपा ने प्रत्याशी बनाया. यह इनके राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन चुनौती थी क्यों‍कि सि‍राथु सीट कभी भी भाजपा ने नहीं जीती थी. केशव ने वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में सि‍राथु में पहली बार भगवा झंडा फहरा दिया. इसके दो साल बाद फूलपुर लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी के रूप में केशव विजयी रहे.

भाजपा ने अब यूपी में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज की तो सबसे बड़ी चुनौती सपा के पिछड़े वोटबैंक में सेंध लगाने की थी. इसके बाद भाजपा ने केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनाकर दांव खेला. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद केशव ने कार्यकर्ताओं में जमकर जोश भरा. नतीजा वर्ष 2017 में भाजपा और उसके सहयोगियों ने मिलकर यूपी की 325 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की. प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के बाद केशव प्रसाद मौर्य को उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई. लोकसभा सदस्य के रूप में इस्तीफा देकर केशव विधान परिषद सदस्य बने. महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव के बाद पश्च‍िम बंगाल के विधानसभा चुनाव में यहां की 36 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है. लोक निर्माण विभाग में एक नई कार्य संस्कृति पैदा करने वाले केशव अब सड़कों के किनारे औषधीय पेड़-पौधे लगाकर “हर्बल पथ” की योजना को साकार करने के साथ सड़कों से बहकर जाने वाले पानी से भूगर्भ जल को रिचार्ज करने की एक अनोखी योजना का खाका खींच कर इसपर अमल करने में जुट गए हैं. 

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