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जम्मू-कश्मीरः आतंकी धमकियों और बेवक्त बर्फबारी से हलकान सेब किसान, इंसाफ करो सरकार!

अनुच्छेद-370 हटने के बाद आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने वाले आतंकी अभी बौखलाए हैं. उनका पूरा ध्यान जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को खत्म करने पर है. पूरे देश का 75 फीसदी सेब यहीं पैदा होता है. सेब किसान इस वक्त उनके निशाने पर हैं. अगर सेब मंडियों तक नहीं पहुंचेगा तो अर्थव्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी. सेब व्यापारियों पर हमले होने के साथ ही धमकियों की खबरें लगातार आ रही हैं. आतंकियों के निशाने पर आए सेब किसानों की दूसरी मुसीबत बेवक्त बर्फबारी है. सरकार ने बाजार हस्तक्षेप लक्ष्य योजना लान्च भी की है. लेकिन इसका लाभ किसानों तक नहीं पहुंच रहा. सरकार से उम्मीद रखने के अलावा फिलहाल किसानों के पास अभी कोई विकल्प नहीं है.

उत्तर कश्मीर की एक तहसील लंगेट में बेवक्त बर्फबारी से सेब के बगान हुए बर्बाद उत्तर कश्मीर की एक तहसील लंगेट में बेवक्त बर्फबारी से सेब के बगान हुए बर्बाद

जम्मू-कश्मीर में पिछले साल की तरह इस बार भी बर्फबारी हुई. आतंकियों के धमकियों से पहले ही हलकान सेब किसानों पर इस बार बर्फबारी पिछले बार के मुकाबले और ज्यादा हताशा लेकर आई. श्रीनगर में सेब किसान तनवीर कहते हैं, कम से कम 60 प्रतिशत सेब इस असमय हुई बर्फबारी से खत्म हो गए. यह पूछने पर कि सरकार इस नुक्सान की भरपाई के लिए किसानों को हर्जाना तो देगी, तनवीर कहते हैं, '' पिछले साल किसानों को 600 रु. 1500 रु. और 1000 रु. बतौर हर्जाना दिया गया.

यह तो एक पेटी सेब के नुक्सान की भरपाई के बराबर भी नहीं था.'' वे सेबों के बगानों का हिसाब बताते हैं, ''एक एकड़ में 7-8 कनॉल होती है. एक कनॉल में 15-17 पेड़ होते हैं. एक पेड़ में कम से कम 20 पेटी सेब की पैदावार होती है. अब आप ही बताइये कि क्या जो हर्जाना यहां सेब किसानों को मिला वह जायज था?'' तनवीर कहते हैं, एक तरफ आतंकी हैं जो सेब की पेटियां मंडी ले जाने के खिलाफ धमकियां देते हैं तो दूसरी तरफ बर्फबारी में हुए नुक्सान पर सरकार हर्जाने के रूप में ऐसी रकम देकर किसानों का मखौल करती है.

नेफेड ने किसानों से सेब खरीदने का ऐलान किया था, इस सवाल पर तनवीर कहते हैं, '' हां, और खरीदे भी. लेकिन 5,000 पेटियां अगर किसी किसान ने नेफेड के अधिकारियों के सामने रखीं तो उसमें से महज 100-150 पेटियां ही नेफेड ने खरीदने के लिए चुनी.'' तनवीर कहते हैं अगर सरकार वाकई भला करना चाहती है तो नेफडे को स्थानीय किसानों के साथ करनी मुलाकात और बैठकें कर खरीददारी के नियम तय करने चाहिए थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

राष्ट्रीय किसान महासंघ के प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ कहते हैं, वैसे तो किसानों की हालत कहीं ठीक नहीं लेकिन जम्मू-कश्मीर के किसानों के प्रति सरकार को और संवेदनशील होना चाहिए. पिछले महीने ही पंजाब से आए दो सेब व्यापारियों को आतंकियों ने निशाना बनाया. इसमें एक की मौत हो गई. इससे पहले शोपियां से सेब भरकर राजस्थान ले जा रहे ट्रक ड्राइवर को भी आतंकियों ने गोली मारी. इस ड्राइवर की भी मौत हो गई. सेब मंडियों तक न पहुंचे इसके लिए तो धमकियां रोजाना मिलती हैं. इस पूरे मामले को लेकर हम घाटी के सभी जिलों में इस महीने बैठक करने वाले हैं. इसमें सेब किसानों को मंडी तक सेब लाने के लिए सुरक्षा देने, नेफेड द्वारा सेब खरीददारी जैसे मसले शामिल होंगे.

सेब किसानों के लिए सितंबर में लान्च हुई थी बाजार हस्तक्षेप लक्ष्य योजना

इसी साल सितंबर में राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने श्रीनगर में सेब किसानों के लिए बाजार हस्तक्षेप लक्ष्य योजना (मार्केट इंटरवेशन टार्गेट स्कीम) को लान्च किया. इस योजना के अंतर्गत केंद्र सरकार की नोडल खरीद एजेंसी या एनएएफईडी (NAFED) के जरिए किसानों से लाभकारी मूल्यों पर सेबों की खरीद की जा रही है. लेकिन यह योजना भी किसानों के नुक्सान की भरपाई नहीं कर पा रही है.

आखिर घाटी का सेब किसान क्यों हैं इतना महत्वपूर्ण?

जार हस्तक्षेप लक्ष्य योजना (मार्केट इंटरवेशन टार्गेट स्कीम) को लॉन्च करते वक्त राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने खुद ही वे आंकड़े पेश किए जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जम्मू- कश्मीर का सेब किसान आखिर इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

उन्होंने बताया, कश्मीर दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सेब पैदावार केंद्र है. देश के 75 प्रतिशत सेबों की पैदावार जम्मू एवं कश्मीर में होती है. यह योजना किसानों की कमाई में जबरदस्त इजाफा करेगी. राज्यपाल ने कहा कि सी-ग्रेड सेब कुल पैदावार का 40 प्रतिशत हैं, मौजूदा समय में प्रति किलो के लिए तीन से सात रु. ही किसानों को मिल पाते हैं लेकिन इस योजना के लागू होने के बाद इसका मूल्य प्रति किलो दोगुना और तिगुना हो जाएगा.

राज्यपाल ने कहा कि सेब मार्केट टर्नओवर 8000 करोड़ प्रति वर्ष है, और इससे 7 लाख परिवार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस सेक्टर पर और ध्यान दिए जाने की जरूरत हैं. उन्होंने कहा कि अब NAFED किसानों से सबों की खरीद करेगा और किसानों को हर किस्म के सेब के लिए मिलने वाली कीमतें बढ़ जाएगी.

 राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कश्मीर में सेब किसानों को धमकाने वाले आतंकियों को भी चेताया. मलिक ने कहा कि ऐसे लोग जल्द से जल्द सुधर जाएं, अन्यथा सरकार उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी. मलिक ने कहा, "हम किसानों की रक्षा करेंगे और उन्हें सुरक्षा देंगे, जो किसानों को धमका रहे हैं, उनके खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी." बता दें कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद बौखलाहट में कुछ असमाजिक तत्वों ने सेब बाहर भेज रहे किसानों पर हमले की कोशिश की है.

मलिक के इस बयान के अगले महीने ही आतंकियों ने पंजाब के दो सेब व्यापारियों को गोली मारी और सेबों से भरा ट्रक राजस्थान ले जा रहे एक ट्रक ड्राइवर को भी गोली मारी. धमकियां लगातार सेब किसानों को मिल रही हैं. नेफेड से किसानों को उम्मीद थी लेकिन बागान में सेब खरीददारी के लिए पहुंचे नेफेड अधिकारी गुणवत्ता को आधार बनाकर सेबों को रिजेक्ट कर रहे हैं.

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